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Etawah News: इंडियन स्किमर की चहचहाहट से चंबल के किनारे गुलजार

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 11:30 PM IST
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The banks of the Chambal are abuzz with the chirping of the Indian Skimmer.
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फोटो: 16 चंबल के किनारे घोसले में इंडियन स्किमर के बच्चे। स्रोत सेंचुरी विभाग

फोटो: 17 चंबल किनारे उड़ान भरते इंडियन स्किमर पक्षी। स्रोत सेंचुरी विभाग
इटावा रेंज में 276 बच्चों ने लिया जन्म, अब कर रहे चंबल में अठखेलियां

संवाद समाचार एजेंसी
इटावा/चकरनगर। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में इन दिनों हर ओर खुशियों की बहार है। दुनिया भर में विलुप्तप्राय माने जाने वाले इंडियन स्किमर पक्षियों के परिवार में नन्हे मेहमानों के आने से चंबल का किनारा गुलजार हो गया है।
इटावा रेंज में इस वर्ष इंडियन स्किमर के करीब 276 बच्चों की सफल हैचिंग हुई है, जिससे वन विभाग और सेंचुरी प्रशासन भी उत्साहित है। रेतीले टापुओं पर यह नन्हें पक्षी अब उड़ान भरने की तैयारी कर रहे हैं।
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इटावा रेंज के पाली और खेड़ागांव के नीचे चंबल किनारे लगभग 276 बच्चों की हैचिंग दर्ज की गई है। वहीं आगरा की बाह रेंज के नदगुआ और चिल्लारपुरा क्षेत्र में करीब 150 बच्चों ने जन्म लिया है। अंडों से निकलने के बाद अब ये बच्चे चंबल के शांत पानी में अठखेलियां करते नजर आने लगे हैं।
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वन विभाग के अनुसार चंबल नदी का सुरक्षित और प्राकृतिक वातावरण इंडियन स्किमर को रास आ रहा है। पिछले कई दशकों से इन पक्षियों की संख्या लगातार घट रही थी और प्रजनन भी बेहद कम हो गया था। वर्ष 2022 में बरचोली गांव के नीचे चंबल किनारे पहली बार करीब 12 अंडे मिलने के बाद विभाग को इनके संरक्षण की उम्मीद जगी थी। इसके बाद लगातार अनुकूल मौसम और सुरक्षित पर्यावास मिलने से इनकी संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
रेंज के कांयछी बीट के पाली और खेड़ा गांव के अलावा भरेह, पथर्रा, बरचोली, महुआसूड़ा और सहसों गांव के नीचे का इलाका भी इंडियन स्किमर का पसंदीदा प्रजनन क्षेत्र बन गया है। रेंजर कोटेश त्यागी ने बताया कि इंडियन स्किमर अपनी खूबसूरत लाल चोंच और अनोखे शिकार करने के अंदाज के कारण लोगों को आकर्षित करता है। यह पक्षी पानी की सतह को चीरते हुए शिकार करता है, इसलिए इसे स्थानीय भाषा में “पनचीरा” भी कहा जाता है।



मार्च से जून तक प्रजनन काल रहता है
यह पक्षी करीब छह माह तक चंबल के रेतीले टापुओं पर डेरा डालते हैं। जुलाई और अगस्त में जब चंबल का जलस्तर बढ़ने लगता है और टापू डूबने लगते हैं, तब ये पक्षी गुजरात के जामनगर, आंध्रप्रदेश के काकीनाडा और बांग्लादेश के निझुम द्वीप की ओर उड़ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इंडियन स्किमर के बच्चे जन्म के समय भूरे रंग के होते हैं, लेकिन बड़े होने पर उनका शरीर काला, गर्दन सफेद, पैर गुलाबी और चोंच लाल रंग की हो जाती है।



बयान

सुरक्षित पर्यावास और बेहतर संरक्षण के चलते इस वर्ष इंडियन स्किमर की हैचिंग काफी अच्छी रही है। विभाग के कर्मचारी लगातार इन नन्हे मेहमानों की निगरानी कर रहे हैं।- चांदनी सिंह, डीएफओ चंबल सेंचुरी आगरा
इंडियन स्किमर का बढ़ता कुनबा
वर्ष घोंसले अंडे
2024 -25 92 235

2025-26 97 281
2026- 27 98 276
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