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Etawah News: बसें न मिलने से दिल्ली-लखनऊ जाने के लिए यात्री रहे परेशान
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इटावा। सैफई डिपो के यात्रियों को बुधवार को बसें न मिलने से परेशानी हुई। सबसे ज्यादा लखनऊ, दिल्ली रूट की बसों को लेकर यात्री परेशान दिखे। इस डिपो की 15 बसें गंगा एक्सप्रेसवे उद्घाटन कार्यक्रम के लिए कन्नौज भेजी गई थीं जिस वजह से डिपो में आधे से भी कम बसें रह गईं। लंबी दूरी के यात्रियों को असुविधा हुई।
इटावा क्षेत्र के आठ डिपो में इटावा डिपो को छोड़कर अन्य सात डिपो की 300 बसें इस कार्यक्रम में लगाई गई थीं। सैफई डिपो से भी 15 बसें कार्यक्रम में शामिल की गईं। इस डिपो में कुल 28 बसें हैं आधे से ज्यादा बसें कार्यक्रम में चले जाने से संख्या मात्र 13 रह गईं। डिपो से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली-लखनऊ की दो बसें कार्यक्रम में लगाई गईं। डिपो के पास इस रूट की दो ही बसें हैं, इस वजह से इसके यात्री भटकने को मजबूर रहे। उन्हें मैनपुरी और इटावा आकर संसाधन तलाशना पड़ा।
वहीं एक्सप्रेसवे इटावा-दिल्ली की तीन, करहल से दिल्ली की दो, इटावा से काले खां की दो, इटावा से बदरपुर की चार, इटावा-एटा एक, आगरा, सैफई, इटावा की एक-एक बस को कार्यक्रम में शामिल किया गया। अन्य बसों को दिल्ली के यात्रियों के लिए चलाया गया लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी रही। एआरएम मुकेश अग्रवाल ने बताया कि लंबे रूट की गाड़ियां सबसे ज्यादा फिट रहती हैं इसलिए लखनऊ, दिल्ली रूट की गाड़ियों को भेजा गया। शेष बसों से वैकल्पिक व्यवस्था की गईं।
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इटावा क्षेत्र के आठ डिपो में इटावा डिपो को छोड़कर अन्य सात डिपो की 300 बसें इस कार्यक्रम में लगाई गई थीं। सैफई डिपो से भी 15 बसें कार्यक्रम में शामिल की गईं। इस डिपो में कुल 28 बसें हैं आधे से ज्यादा बसें कार्यक्रम में चले जाने से संख्या मात्र 13 रह गईं। डिपो से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली-लखनऊ की दो बसें कार्यक्रम में लगाई गईं। डिपो के पास इस रूट की दो ही बसें हैं, इस वजह से इसके यात्री भटकने को मजबूर रहे। उन्हें मैनपुरी और इटावा आकर संसाधन तलाशना पड़ा।
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वहीं एक्सप्रेसवे इटावा-दिल्ली की तीन, करहल से दिल्ली की दो, इटावा से काले खां की दो, इटावा से बदरपुर की चार, इटावा-एटा एक, आगरा, सैफई, इटावा की एक-एक बस को कार्यक्रम में शामिल किया गया। अन्य बसों को दिल्ली के यात्रियों के लिए चलाया गया लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी रही। एआरएम मुकेश अग्रवाल ने बताया कि लंबे रूट की गाड़ियां सबसे ज्यादा फिट रहती हैं इसलिए लखनऊ, दिल्ली रूट की गाड़ियों को भेजा गया। शेष बसों से वैकल्पिक व्यवस्था की गईं।
