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Etawah News: फतेहपुरा की राशन सूची में हरियाणा व टूंडला के बाशिंदे
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फोटो 19: ग्राम पंचायत फतेहपुरा का प्राथमिक स्कूल। संवाद
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एक्सलूसिव-- -
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- आयुष्मान कार्ड बनाने गई टीम के सत्यापन में खुली पोल
- हर माह 64 लोगों के नाम से निकल रहा राशन, विभाग ने कराई जांच
अजय द्विवेदी
इटावा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयुष्मान कार्ड के लिए कराए गए सत्यापन में ग्राम पंचायत फतेहपुरा में बड़ा गोलमाल सामने आया है। यहां सूची पर दर्ज अंत्योदय कार्डधारकों के नाम हर माह राशन निकल रहा है, जबकि सत्यापन टीम को 64 ऐसे मिले जो यहां के बाशिंदे ही नहीं हैं। सूची में दिए गए मोबाइल नंबर पर संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने संपर्क किया तो कोई हरियाणा तो कोई टूंडला का निकाला। पूछने उन्होंने बताया कि फतेहपुरा गांव से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग को अभी हाल में आठ लाख आयुष्मान कार्ड बनवाने का लक्ष्य दिया गया था। इसमें अंत्योदय कार्डधारक व 70 से अधिक उम्र के लोगों के राशन कार्ड बनवाए जाने थे। इसमें से विभाग चार लाख से अधिक कार्ड बनवा चुका है। अन्य लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाने में रुचि न लेने पर स्वास्थ्य विभाग ने पंचायत सहायक, आशा व सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) को लगाया गया था। सत्यापन में महेवा ब्लॉक के फतेहपुरा गांव के नाम पर दर्ज पते पर लोग मिले ही नहीं। यहां पंचायत सहायक राधा, आशा सुनीता देवी व सीएचओ योगेश शर्मा ने 64 ऐसे लोगों को पाया जो ग्राम पंचायत के रहने वाले नहीं थे। टीम के सदस्यों ने इनके परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने साफ कह दिया कि वह इन नाम के किसी भी व्यक्ति को नहीं पहचानते हैं। इसकी पुष्टि ग्राम प्रधान पूनम चौहान ने भी की। इसके बाद यह रिपोर्ट जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय को सौंपी गई।
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केस-1
हरियाणा में चला रहे बेकरी, राशन की नहीं जरूरत
सूची में दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया तो यह हरियाण लगा जाकर। बोलने वाले ने बताया कि उसका नाम रोनित गोयल है। वह हरियाणा में बेकरी का संचालन करता है। उसने बताया कि वह इटावा को नहीं जानता है, कहां पड़ता है और कभी गया नहीं। उसका मोबाइल नंबर राशन की सूची में कैसे दर्ज है, इसकी उसे जानकारी नहीं है। इतनी बड़ी बेकरी चलाने पर उसे निशुल्क राशन की जरूरत नहीं है।
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केस-2
मोबाइल नंबर कैसे दर्ज हुआ नहीं पता
एक और नंबर मिलाने पर प्रेम बघेल ने बताया कि वह फिरोजाबाद के टूंडला का रहने वाला है। इटावा में न कोई रिश्तेदारी है और न ही वह कभी गया है। राशन कार्ड में उनका मोबाइल नंबर कैसे पहुंचा, यह उसे जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उसके नाम पर अगर राशन निकाला जा रहा है तो इसकी जांच होनी चाहिए।
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सूची में दर्ज कई नंबर मिले बंद तो कई सेवा में नहीं
सूची में दर्ज अधिकतर नंबर बंद मिले या नॉट अवेलेबल बता रहा है। इससे साफ जाहिर है यह नंबर कहीं और जगह के है या फिर इनका प्रयोग नहीं हो रहा है। इसकी वजह से यह पहुंच से बाहर बता रहे हैं।
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अंत्योदय कार्डधारकों को हर माह 35 किलो मिलता राशन
अंत्योदय कार्डधरकों को प्रति परिवार प्रति माह 35 किलो राशन दिया जाता है। इसमें प्रति परिवार प्रति माह 15 किलोग्राम गेहूं और 20 किलोग्राम चावल मिलता है। वहीं, पात्र गृहस्थी के परिवार को पांच किलो राशन मुफ्त में मिलता है।
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वर्जन-- -
स्वास्थ्य विभाग से ग्राम पंचायत फतेहपुरा की सूची प्राप्त हुई है। इसका जल्द ही सत्यापन कर अपात्र लोगों के नाम काटे जाएंगे। अपात्रों के अभी तक नाम क्यों नहीं कटे, इसके बारे में राशन डीलर से पूछा जाएगा।
-सीमा त्रिपाठी, डीएसओ
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राशन कार्ड धारकों की सूची प्राप्त हुई थी। इनके आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सत्यापन कराया गया था। फतेहपुरा गांव में सत्यापन के दौरान 64 लोग अपने पते पर ही नहीं मिले। सभी की रिपोर्ट आपूर्ति विभाग की टीम को दी गई है।
- डॉ. यतेंद्र राजपूत, डिप्टी सीएमओ
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- आयुष्मान कार्ड बनाने गई टीम के सत्यापन में खुली पोल
- हर माह 64 लोगों के नाम से निकल रहा राशन, विभाग ने कराई जांच
अजय द्विवेदी
इटावा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयुष्मान कार्ड के लिए कराए गए सत्यापन में ग्राम पंचायत फतेहपुरा में बड़ा गोलमाल सामने आया है। यहां सूची पर दर्ज अंत्योदय कार्डधारकों के नाम हर माह राशन निकल रहा है, जबकि सत्यापन टीम को 64 ऐसे मिले जो यहां के बाशिंदे ही नहीं हैं। सूची में दिए गए मोबाइल नंबर पर संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने संपर्क किया तो कोई हरियाणा तो कोई टूंडला का निकाला। पूछने उन्होंने बताया कि फतेहपुरा गांव से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
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स्वास्थ्य विभाग को अभी हाल में आठ लाख आयुष्मान कार्ड बनवाने का लक्ष्य दिया गया था। इसमें अंत्योदय कार्डधारक व 70 से अधिक उम्र के लोगों के राशन कार्ड बनवाए जाने थे। इसमें से विभाग चार लाख से अधिक कार्ड बनवा चुका है। अन्य लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाने में रुचि न लेने पर स्वास्थ्य विभाग ने पंचायत सहायक, आशा व सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) को लगाया गया था। सत्यापन में महेवा ब्लॉक के फतेहपुरा गांव के नाम पर दर्ज पते पर लोग मिले ही नहीं। यहां पंचायत सहायक राधा, आशा सुनीता देवी व सीएचओ योगेश शर्मा ने 64 ऐसे लोगों को पाया जो ग्राम पंचायत के रहने वाले नहीं थे। टीम के सदस्यों ने इनके परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने साफ कह दिया कि वह इन नाम के किसी भी व्यक्ति को नहीं पहचानते हैं। इसकी पुष्टि ग्राम प्रधान पूनम चौहान ने भी की। इसके बाद यह रिपोर्ट जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय को सौंपी गई।
केस-1
हरियाणा में चला रहे बेकरी, राशन की नहीं जरूरत
सूची में दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया तो यह हरियाण लगा जाकर। बोलने वाले ने बताया कि उसका नाम रोनित गोयल है। वह हरियाणा में बेकरी का संचालन करता है। उसने बताया कि वह इटावा को नहीं जानता है, कहां पड़ता है और कभी गया नहीं। उसका मोबाइल नंबर राशन की सूची में कैसे दर्ज है, इसकी उसे जानकारी नहीं है। इतनी बड़ी बेकरी चलाने पर उसे निशुल्क राशन की जरूरत नहीं है।
केस-2
मोबाइल नंबर कैसे दर्ज हुआ नहीं पता
एक और नंबर मिलाने पर प्रेम बघेल ने बताया कि वह फिरोजाबाद के टूंडला का रहने वाला है। इटावा में न कोई रिश्तेदारी है और न ही वह कभी गया है। राशन कार्ड में उनका मोबाइल नंबर कैसे पहुंचा, यह उसे जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उसके नाम पर अगर राशन निकाला जा रहा है तो इसकी जांच होनी चाहिए।
सूची में दर्ज कई नंबर मिले बंद तो कई सेवा में नहीं
सूची में दर्ज अधिकतर नंबर बंद मिले या नॉट अवेलेबल बता रहा है। इससे साफ जाहिर है यह नंबर कहीं और जगह के है या फिर इनका प्रयोग नहीं हो रहा है। इसकी वजह से यह पहुंच से बाहर बता रहे हैं।
अंत्योदय कार्डधारकों को हर माह 35 किलो मिलता राशन
अंत्योदय कार्डधरकों को प्रति परिवार प्रति माह 35 किलो राशन दिया जाता है। इसमें प्रति परिवार प्रति माह 15 किलोग्राम गेहूं और 20 किलोग्राम चावल मिलता है। वहीं, पात्र गृहस्थी के परिवार को पांच किलो राशन मुफ्त में मिलता है।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग से ग्राम पंचायत फतेहपुरा की सूची प्राप्त हुई है। इसका जल्द ही सत्यापन कर अपात्र लोगों के नाम काटे जाएंगे। अपात्रों के अभी तक नाम क्यों नहीं कटे, इसके बारे में राशन डीलर से पूछा जाएगा।
-सीमा त्रिपाठी, डीएसओ
राशन कार्ड धारकों की सूची प्राप्त हुई थी। इनके आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सत्यापन कराया गया था। फतेहपुरा गांव में सत्यापन के दौरान 64 लोग अपने पते पर ही नहीं मिले। सभी की रिपोर्ट आपूर्ति विभाग की टीम को दी गई है।
- डॉ. यतेंद्र राजपूत, डिप्टी सीएमओ