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Farrukhabad News: गंगा में 24 घंटे में समाए 11 मकान
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फर्रुखाबाद। सदर तहसील के दिलीप की मड़ैया में 24 घंटे में 11 मकान और एक झोपड़ी गंगा में समा गई। अब तक गांव के 25 मकानों का अस्तित्व खत्म हो चुका है। एसडीएम सदर और तहसीलदार ने गांव का जायजा लिया। गंगा की तेज धार सीधी टकराने से खतरे को देखते हुए गांव के अधिकांश लोगों को निकाल लिया है। अब गांव का अस्तित्व खत्म होना तय माना जा रहा है।
गांव के पश्चिम की ओर से गंगा की धार सीधी टकरा रही है। चंद घंटों में पांच से सात मीटर कटान हो रहा है। गंगा की एक धार दिलीप की मड़ैया से दक्षिण की ओर से तेज हो गई है। ग्रामीणों को अंदेशा है कि यदि दूसरी तरफ कटान तेज हुआ, तो गंगा का रुख और विकराल हो जाएगा।
एसडीएम सदर संजय कुमार सिंह, तहसीलदार विक्रम सिंह, लेखपाल रामवरन गांव में पहुंचे। गांव के हालात बदतर दिखे। 12-14 मकान और झोपड़ी ही बची हैं। शनिवार शाम से रविवार शाम तक 24 घंटे में आशाराम, राजपाल, बाबूराम, मोरपाल, धर्मपाल समेत 11 पक्के मकान और एक झोपड़ी गंगा में समा गई। प्रशासन ने खतरे को भांपते हुए महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भिजवाया। चंद लोग ही गांव में बचे हैं।
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ग्रामीणों से मांगे कागजात, खाते में पहुंचेगी राहत की रकम
फर्रुखाबाद। एसडीएम सदर संजय कुमार सिंह ने बताया कि 24 घंटे में 11 मकान और एक झोपड़ी गंगा में समा गई है। ग्रामीणों से कागजात एकत्रित किए जा रहे हैं। इन लोगों को त्वरित राहत के लिए ऑनलाइन आवेदन कर खाते में आपदा राहत की रकम भेजी जाएगी। फिलहाल पूरे नाम एकत्रित करने में लगे हैं। देर रात तक काम पूरा कर लिया जाएगा।
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मासूम गिट्टी से बना रहे मकान की आकृति
फर्रुखाबाद। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के मासूमों को नहीं पता कि गांव के हालात क्या हैं। मकान तोड़ने के बाद बिखरी पड़ी ईंटों और छोटी गिट्टी रखकर दो बच्चे मकान की आकृति बनाते दिखे। छोटी गिट्टी एक दूसरे के ऊपर रखकर दीवारनुमा आकृति बना रहे थे। जिस स्थान पर शनिवार को ये बच्चे बैठे थे, अब वहां अथाह जल बह रहा है।
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गांव के पश्चिम की ओर से गंगा की धार सीधी टकरा रही है। चंद घंटों में पांच से सात मीटर कटान हो रहा है। गंगा की एक धार दिलीप की मड़ैया से दक्षिण की ओर से तेज हो गई है। ग्रामीणों को अंदेशा है कि यदि दूसरी तरफ कटान तेज हुआ, तो गंगा का रुख और विकराल हो जाएगा।
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एसडीएम सदर संजय कुमार सिंह, तहसीलदार विक्रम सिंह, लेखपाल रामवरन गांव में पहुंचे। गांव के हालात बदतर दिखे। 12-14 मकान और झोपड़ी ही बची हैं। शनिवार शाम से रविवार शाम तक 24 घंटे में आशाराम, राजपाल, बाबूराम, मोरपाल, धर्मपाल समेत 11 पक्के मकान और एक झोपड़ी गंगा में समा गई। प्रशासन ने खतरे को भांपते हुए महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भिजवाया। चंद लोग ही गांव में बचे हैं।
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ग्रामीणों से मांगे कागजात, खाते में पहुंचेगी राहत की रकम
फर्रुखाबाद। एसडीएम सदर संजय कुमार सिंह ने बताया कि 24 घंटे में 11 मकान और एक झोपड़ी गंगा में समा गई है। ग्रामीणों से कागजात एकत्रित किए जा रहे हैं। इन लोगों को त्वरित राहत के लिए ऑनलाइन आवेदन कर खाते में आपदा राहत की रकम भेजी जाएगी। फिलहाल पूरे नाम एकत्रित करने में लगे हैं। देर रात तक काम पूरा कर लिया जाएगा।
मासूम गिट्टी से बना रहे मकान की आकृति
फर्रुखाबाद। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के मासूमों को नहीं पता कि गांव के हालात क्या हैं। मकान तोड़ने के बाद बिखरी पड़ी ईंटों और छोटी गिट्टी रखकर दो बच्चे मकान की आकृति बनाते दिखे। छोटी गिट्टी एक दूसरे के ऊपर रखकर दीवारनुमा आकृति बना रहे थे। जिस स्थान पर शनिवार को ये बच्चे बैठे थे, अब वहां अथाह जल बह रहा है।