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Farrukhabad News: अभद्रता करने पर आशाओं ने सीएमओ को घेरा, मुर्दाबाद के लगाए नारे
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sat, 31 Jan 2026 01:34 AM IST
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फर्रुखाबाद। डेढ़ माह से धरने पर बैठीं आशा कार्यकर्ता शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंचीं। वहां सीएमओ ने उनका दर्द सुनने के बजाय अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इससे आशाओं के धैर्य का बांध टूट गया और सीएमओ का घेराव कर मुर्दाबाद के नारे लगाए। पुलिस कर्मियों ने सीएमओ को घेरा कर बचाया। मौके मिलते ही सीएमओ सभागार में घुस गए।
उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष मिथलेश सोलंकी, सचिव सपना कटियार के नेतृत्व में 15 दिसंबर से सीएमओ कार्यालय परिसर में 14 सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन चल रहा है। 1600 आशा कार्यकर्ताओं को एक वर्ष का विभिन्न मदों में बकाया करीब एक करोड़ 81 लाख रुपये भुगतान नहीं किया गया।
सुनवाई न होने से परेशान बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता दोपहर को कलक्ट्रेट पहुंचीं। जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल को सौंपा। सिटी मजिस्ट्रेट ने सीएमओ को फोन कर स्पीकर ऑन कर दिया। इस सीएमओ ने अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि आशाएं कुछ काम नहीं करती हैं। दो-चार की सेवा समाप्त करेंगे, तभी ठीक हो जाएंगी।
यह सुनकर आशा कार्यकर्ता आक्रोशित हो गईं। सभागार के बाहर सीएमओ को घेर लिया और कहा कि अब बोलो अपशब्द। इस पर सीएमओ अपशब्द कहने से मुकर गए। आशा कार्यकर्ताओं ने सीएमओ को चारों तरफ से घेर लिया। इससे सीएमओ ने निकलने का प्रयास किया। इसी बीच पहुंचे पुलिस कर्मियों ने सीएमओ को घेरे में लेकर बचाया। मौका मिलते ही सीएमओ कलक्ट्रेट सभागार में घुस गए। आशा कार्यकर्ता सीएमओ मुर्दाबाद के नारे लगाती रहीं।
इसके बाद सभी आशाओं ने वहां से जाकर सीएमओ कार्यालय का घेराव किया। कहा कि सीएमओ की भाषाशैली से पूरा विभाग परेशान है। सीएमओ माफी मांगे या फिर इनका गैर जनपद ट्रांसफर किया जाए। एसीएमओ डॉ.रंजन गौतम ने आशा कार्यकर्ताओं को समझाया और समस्याओं का निस्तारण कराने का भरोसा दिया। इस पर आशा कार्यकर्ताओं ने उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष मिथलेश सोलंकी व सचिव सपना कटियार ने कहा कि जब तक सीएमओ माफी नहीं मांगेंगे, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। जरूरत पड़ी तो सीएमओ कार्यालय में ताला भी डाला जाएगा। सरस्वती, अनीता, विमला, सुषमा, मंजू, ईश्वर देवी आदि बड़ी संख्या में आशा मौजूद रहीं।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि आशा कार्यकर्ता डेढ़ माह से धरना प्रदर्शन कर रही हैं। इसी को लेकर हमने कहा था कि आशा कोई काम नहीं कर रही हैं। अपशब्द नहीं बोले थे। नेतागिरी कर सरकारी काम बाधित करने वाली दो-चार कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के हम पत्र लिख रहे हैं। हम अपने घर के काम लिए नहीं कह रहे, सरकारी काम के लिए कह रहे हैं, वह तो करना ही होगा। इसमें कोई गलत बात नहीं कही है। दूर से बात करें, लेकिन घेराव क्यों कर रही हैं।
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सुनवाई न होने से परेशान बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता दोपहर को कलक्ट्रेट पहुंचीं। जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल को सौंपा। सिटी मजिस्ट्रेट ने सीएमओ को फोन कर स्पीकर ऑन कर दिया। इस सीएमओ ने अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि आशाएं कुछ काम नहीं करती हैं। दो-चार की सेवा समाप्त करेंगे, तभी ठीक हो जाएंगी।
यह सुनकर आशा कार्यकर्ता आक्रोशित हो गईं। सभागार के बाहर सीएमओ को घेर लिया और कहा कि अब बोलो अपशब्द। इस पर सीएमओ अपशब्द कहने से मुकर गए। आशा कार्यकर्ताओं ने सीएमओ को चारों तरफ से घेर लिया। इससे सीएमओ ने निकलने का प्रयास किया। इसी बीच पहुंचे पुलिस कर्मियों ने सीएमओ को घेरे में लेकर बचाया। मौका मिलते ही सीएमओ कलक्ट्रेट सभागार में घुस गए। आशा कार्यकर्ता सीएमओ मुर्दाबाद के नारे लगाती रहीं।
इसके बाद सभी आशाओं ने वहां से जाकर सीएमओ कार्यालय का घेराव किया। कहा कि सीएमओ की भाषाशैली से पूरा विभाग परेशान है। सीएमओ माफी मांगे या फिर इनका गैर जनपद ट्रांसफर किया जाए। एसीएमओ डॉ.रंजन गौतम ने आशा कार्यकर्ताओं को समझाया और समस्याओं का निस्तारण कराने का भरोसा दिया। इस पर आशा कार्यकर्ताओं ने उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष मिथलेश सोलंकी व सचिव सपना कटियार ने कहा कि जब तक सीएमओ माफी नहीं मांगेंगे, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। जरूरत पड़ी तो सीएमओ कार्यालय में ताला भी डाला जाएगा। सरस्वती, अनीता, विमला, सुषमा, मंजू, ईश्वर देवी आदि बड़ी संख्या में आशा मौजूद रहीं।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि आशा कार्यकर्ता डेढ़ माह से धरना प्रदर्शन कर रही हैं। इसी को लेकर हमने कहा था कि आशा कोई काम नहीं कर रही हैं। अपशब्द नहीं बोले थे। नेतागिरी कर सरकारी काम बाधित करने वाली दो-चार कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के हम पत्र लिख रहे हैं। हम अपने घर के काम लिए नहीं कह रहे, सरकारी काम के लिए कह रहे हैं, वह तो करना ही होगा। इसमें कोई गलत बात नहीं कही है। दूर से बात करें, लेकिन घेराव क्यों कर रही हैं।
