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Farrukhabad News: द्रोपदी जन्मस्थली 4.70 करोड़ से बनेगी विश्वस्तरीय पर्यटक केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Tue, 31 Mar 2026 01:46 AM IST
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फर्रुखाबाद। महाभारत काल की धरोहर समेटे कंपिल (काम्पिल्य) अब विश्व स्तरीय पर्यटन के नक्शे पर चमकेगा। शासन से महाभारत सर्किट के तहत इस पौराणिक स्थल के विकास के लिए 4.70 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। पहली किस्त में 1.40 करोड़ रुपये जनपद को मिले हैं। इस धनराशि से द्रौपदी जन्मस्थली सहित कई कार्य कराए जाएंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी दी कि पर्यटन विभाग कंपिल में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। महाभारत सर्किट के तहत द्वापर युग की प्राचीन भूमि को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। तकनीकी माध्यम से भी इतिहास और घटनाओं से रूबरू कराया जाएगा। इसके लिए इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन की व्यवस्था की जाएगी।
गत वर्ष विदेशियों सहित 21.67 लाख पर्यटक पहुंचे। कंपिल में पर्यटकों के अनुभव को और अधिक आकर्षक व ज्ञानवर्धक बनाने के लिए करीब 2.37 करोड़ रुपये से चार इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन स्थापित होंगे। इसमें द्रौपदी के जन्म, स्वयंवर, द्रौपदी-श्रीकृष्ण की मित्रता व कपिल मुनि के आश्रम में दी जाने वाली शिक्षा जैसे पौराणिक प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के जरिए जीवंत प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन रामेश्वर नाथ मंदिर को भव्य रूप देने की तैयारी है। यहां करीब 30 लाख रुपये से पारंपरिक स्थापत्य शैली पर आधारित प्रवेश द्वार बनाया जाएगा, जो आगंतुकों को आकर्षित करेगा। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी, सावन में इसके दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महत्व समझाने के लिए स्टोन स्टोरी बोर्ड लगाए जाएंगे।
पर्यटक सुविधाओं पर विशेष जोर
कंपिल में पर्यटकों की सुविधा के लिए 55 लाख से टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा। इसमें साफ-सुथरे शौचालय, पेयजल व्यवस्था, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया व कार्यालय आदि सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी।
काम्पिल्य का प्राचीन गौरव पुनर्स्थापित करने का प्रयास
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि पांचाल की राजधानी रहा महाभारत कालीन काम्पिल्य आज भी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत से पर्यटन के नक्शे पर खास पहचान बनाए है। मान्यता है कि यहां द्रौपदी का जन्म व स्वयंवर हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश को 12 विशिष्ट पर्यटन सर्किटों में विभाजित किया गया है। इनमें रामायण और इको सर्किट के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। महाभारत सर्किट का विकास भगवान कृष्ण के दुनियाभर में फैले अनुयायियों को आकर्षित करेगा। काम्पिल्य, जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ की जन्मस्थली और निकट स्थित संकिसा भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों में भी शामिल है। काम्पिल्य के सर्वांगीण विकास के जरिए उसके प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित किया जाएगा।
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पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी दी कि पर्यटन विभाग कंपिल में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। महाभारत सर्किट के तहत द्वापर युग की प्राचीन भूमि को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। तकनीकी माध्यम से भी इतिहास और घटनाओं से रूबरू कराया जाएगा। इसके लिए इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन की व्यवस्था की जाएगी।
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गत वर्ष विदेशियों सहित 21.67 लाख पर्यटक पहुंचे। कंपिल में पर्यटकों के अनुभव को और अधिक आकर्षक व ज्ञानवर्धक बनाने के लिए करीब 2.37 करोड़ रुपये से चार इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन स्थापित होंगे। इसमें द्रौपदी के जन्म, स्वयंवर, द्रौपदी-श्रीकृष्ण की मित्रता व कपिल मुनि के आश्रम में दी जाने वाली शिक्षा जैसे पौराणिक प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के जरिए जीवंत प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन रामेश्वर नाथ मंदिर को भव्य रूप देने की तैयारी है। यहां करीब 30 लाख रुपये से पारंपरिक स्थापत्य शैली पर आधारित प्रवेश द्वार बनाया जाएगा, जो आगंतुकों को आकर्षित करेगा। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी, सावन में इसके दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महत्व समझाने के लिए स्टोन स्टोरी बोर्ड लगाए जाएंगे।
पर्यटक सुविधाओं पर विशेष जोर
कंपिल में पर्यटकों की सुविधा के लिए 55 लाख से टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा। इसमें साफ-सुथरे शौचालय, पेयजल व्यवस्था, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया व कार्यालय आदि सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी।
काम्पिल्य का प्राचीन गौरव पुनर्स्थापित करने का प्रयास
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि पांचाल की राजधानी रहा महाभारत कालीन काम्पिल्य आज भी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत से पर्यटन के नक्शे पर खास पहचान बनाए है। मान्यता है कि यहां द्रौपदी का जन्म व स्वयंवर हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश को 12 विशिष्ट पर्यटन सर्किटों में विभाजित किया गया है। इनमें रामायण और इको सर्किट के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। महाभारत सर्किट का विकास भगवान कृष्ण के दुनियाभर में फैले अनुयायियों को आकर्षित करेगा। काम्पिल्य, जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ की जन्मस्थली और निकट स्थित संकिसा भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों में भी शामिल है। काम्पिल्य के सर्वांगीण विकास के जरिए उसके प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित किया जाएगा।