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Farrukhabad News: कानपुर-कासगंज रेलमार्ग के दोहरीकरण के लिए ड्रोन सर्वे शुरू
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फोटो-15 मिशन कंपाउंड के पास रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए ड्रोन उड़ाता पायलट और खड़े लोग। स्रोत:
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फर्रुखाबाद। कानपुर-कासगंज रेलमार्ग के दोहरीकरण के लिए ड्रोन सर्वे का काम शुरू हो गया। सर्वे कंपनी के कर्मियों ने फतेहगढ़ से फर्रुखाबाद रेललाइन के ऊपर ड्रोन उड़ाया। रेलवे बोर्ड ने डीपीआर बनाने के लिए पिछले महीने 5.82 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। ड्रोन उड़ता देखकर लाइन के किनारे बने मकान मालिकों में चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
रेलवे बोर्ड ने कानपुर-कासगंज के बीच करीब 244 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग के दोहरीकरण की तीन-चार माह पहले मंजूरी दे दी थी। पिछले महीने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए 5.82 करोड़ रुपये भी अवमुक्त कर किए थे। इसके बाद दोहरीकरण को गति मिलने का अनुमान लगाया जाने लगा था। डीपीआर बनाने वाली कंपनी ने फतेहगढ़ फर्रुखाबाद के बीच ड्रोन सर्वे का काम पूरा किया।
ड्रोन कंपनी के अधिकारी और कर्मचारियों ने फतेहगढ़ भोलेपुर रेलवे क्राॅसिंग से ड्रोन उड़ाया। इसके बाद कर्मचारी मिशन कंपाउंड पहुंचे। यहां से श्यामनगर भोपतपट्टी होकर देवरामपुर क्राॅसिंग तक गए। बतों दें कि रेल लाइन से सटकर बने 200 से अधिक मकानों में रह रहे लोगों की नजर ड्रोन पर पड़ी तो आशंकित होने लगे। दोहरीकरण होने से उनके मकानों पर संकट के बादल मंडराने से वह चिंतित है।
ड्रोन पायलट रोहित कुमार ने बताया कि 10 दिन पहले कानपुर से सर्वे शुरू किया था। कासगंज तक का काम पूरा करने में अभी 15 दिन का समय और लगेगा। इससे मैपिंग और लेबल समेत सभी तकनीकी रिपोर्ट तैयार करके विभागीय उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। सर्वे से आसपास की बस्ती की भी असलियत का पता चल जाएगा। मकानों की गिनती, दूरी आदि भी चिह्नित होगी।
बढ़ेंगी ट्रेनें और व्यापार को लगेंगे पंख
मथुरा-कासगंज के बीच छह-सात महीने पहले ड्रोन सर्वे होने के बाद डीपीआर बनाकर रेलवे बोर्ड को भेजा जा रहा है। अब कानपुर-कासगंज के बीच ड्रोन सर्वे शुरू होने से जिले में व्यापारिक गतिविधियों को पंख लगना तय माना जा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य सभी बड़े शहरों के लिए ट्रेन की सुविधा बढ़ेगी। इससे कच्चा-पक्का माल लाने और ले जाना सस्ता हो जाएगा। इससे जिले को खासा फायदा होगा।
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ड्रोन कंपनी के अधिकारी और कर्मचारियों ने फतेहगढ़ भोलेपुर रेलवे क्राॅसिंग से ड्रोन उड़ाया। इसके बाद कर्मचारी मिशन कंपाउंड पहुंचे। यहां से श्यामनगर भोपतपट्टी होकर देवरामपुर क्राॅसिंग तक गए। बतों दें कि रेल लाइन से सटकर बने 200 से अधिक मकानों में रह रहे लोगों की नजर ड्रोन पर पड़ी तो आशंकित होने लगे। दोहरीकरण होने से उनके मकानों पर संकट के बादल मंडराने से वह चिंतित है।
ड्रोन पायलट रोहित कुमार ने बताया कि 10 दिन पहले कानपुर से सर्वे शुरू किया था। कासगंज तक का काम पूरा करने में अभी 15 दिन का समय और लगेगा। इससे मैपिंग और लेबल समेत सभी तकनीकी रिपोर्ट तैयार करके विभागीय उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। सर्वे से आसपास की बस्ती की भी असलियत का पता चल जाएगा। मकानों की गिनती, दूरी आदि भी चिह्नित होगी।
बढ़ेंगी ट्रेनें और व्यापार को लगेंगे पंख
मथुरा-कासगंज के बीच छह-सात महीने पहले ड्रोन सर्वे होने के बाद डीपीआर बनाकर रेलवे बोर्ड को भेजा जा रहा है। अब कानपुर-कासगंज के बीच ड्रोन सर्वे शुरू होने से जिले में व्यापारिक गतिविधियों को पंख लगना तय माना जा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य सभी बड़े शहरों के लिए ट्रेन की सुविधा बढ़ेगी। इससे कच्चा-पक्का माल लाने और ले जाना सस्ता हो जाएगा। इससे जिले को खासा फायदा होगा।