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Farrukhabad News: गैर इरादतन हत्या में पिता व तीन पुत्रों को 10 वर्ष की सजा
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फर्रुखाबाद। गैर इरादतन हत्या के मामले में जनपद न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए पिता व तीन पुत्रों को दोषी ठहराया। चारों को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सभी पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना की रकम अदा न करने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया। धनराशि जमा करने पर उसका आधा भाग पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया।
थाना कंपिल क्षेत्र के गांव डढ़ियापुर निवासी प्रमोद कुमार ने हत्या करने व धमकी देने के मामले में थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि उसके बड़े भाई महेशचंद्र 3 दिसंबर 2019 की शाम छह बजे अपने पड़ोसी सत्यभान के घर सरसों की फसल में हुए नुकसान की शिकायत करने गए थे। आरोप था कि पतेल में लगाई गई आग से उनकी फसल में नुकसान पहुंचा था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। सत्यभान अपने पुत्रों संजीव, आकाश और राजीव के साथ लाठी-डंडे लेकर बाहर आया और महेशचंद्र से गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।
महेशचंद्र की चीख-पुकार सुनकर उनका पुत्र अजय कुमार और पुत्रवधू राजबाला बचाने पहुंचे तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। घटना में गंभीर रूप से घायल महेशचंद्र को पहले सीएचसी कायमगंज और बाद में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद ले जाया गया। वहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि घटना अचानक हुए विवाद और आवेश में हुई थी। इसी आधार पर मामला हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का माना गया।
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थाना कंपिल क्षेत्र के गांव डढ़ियापुर निवासी प्रमोद कुमार ने हत्या करने व धमकी देने के मामले में थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि उसके बड़े भाई महेशचंद्र 3 दिसंबर 2019 की शाम छह बजे अपने पड़ोसी सत्यभान के घर सरसों की फसल में हुए नुकसान की शिकायत करने गए थे। आरोप था कि पतेल में लगाई गई आग से उनकी फसल में नुकसान पहुंचा था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। सत्यभान अपने पुत्रों संजीव, आकाश और राजीव के साथ लाठी-डंडे लेकर बाहर आया और महेशचंद्र से गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।
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महेशचंद्र की चीख-पुकार सुनकर उनका पुत्र अजय कुमार और पुत्रवधू राजबाला बचाने पहुंचे तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। घटना में गंभीर रूप से घायल महेशचंद्र को पहले सीएचसी कायमगंज और बाद में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद ले जाया गया। वहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि घटना अचानक हुए विवाद और आवेश में हुई थी। इसी आधार पर मामला हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का माना गया।