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Farrukhabad News: बीमा क्लेम का भुगतान न देने पर आयाेग ने 45 दिनों में दावा निस्तारण के दिए आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 02 Feb 2026 12:58 AM IST
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फर्रुखाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ट्रक बीमा क्लेम के एक पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से लंबे समय तक दावा न निपटाने को सेवा में कमी माना। बीमा कंपनी को 45 दिनों में दावा निस्तारित करने के आदेश दिए।
मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के खिमसेपुर मरहाला निवासी रामबक्श ने ट्रक खरीदकर बीमा कराया था। बीमा पॉलिसी की अवधि 31 मार्च 2013 से 30 अप्रैल 2014 तक थी। 15 अक्तूबर 2013 को छत्तीसगढ़ के बतौली क्षेत्र में ट्रक दुर्घटनाग्रस्त होकर पुल के नीचे गिरकर क्षतिग्रस्त हो गया था।
परिवादी ने तत्काल थाना बतौली व बीमा कंपनी को दुर्घटना की सूचना दी। बीमा कंपनी ने स्थलीय निरीक्षण भी कराया। इसके बाद ट्रक गाजियाबाद स्थित अधिकृत वर्कशॉप में मरम्मत के लिए ले जाया गया, जहां करीब चार लाख रुपये खर्च आया। बीमा कंपनी ने क्लेम के लिए कार्रवाई शुरू की और सभी जरूरी कागजात देने के बावजूद भुगतान नहीं किया। बीमा कंपनी ने अपने बचाव में मामले को पोषणीय न होने और कागजातों के सत्यापन में समस्या का हवाला दिया, लेकिन आयोग के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।
आयोग ने माना कि बीमा कंपनी के कथन आपस में विरोधाभासी हैं। आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्य नाजरीन बेगम व विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर क्लेम का निस्तारण करने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक क्षति के रूप में पांच हजार तथा वाद व्यय के लिए तीन हजार रुपये देने के आदेश दिए। आदेश का पालन न होने पर बीमा कंपनी को 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के खिमसेपुर मरहाला निवासी रामबक्श ने ट्रक खरीदकर बीमा कराया था। बीमा पॉलिसी की अवधि 31 मार्च 2013 से 30 अप्रैल 2014 तक थी। 15 अक्तूबर 2013 को छत्तीसगढ़ के बतौली क्षेत्र में ट्रक दुर्घटनाग्रस्त होकर पुल के नीचे गिरकर क्षतिग्रस्त हो गया था।
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परिवादी ने तत्काल थाना बतौली व बीमा कंपनी को दुर्घटना की सूचना दी। बीमा कंपनी ने स्थलीय निरीक्षण भी कराया। इसके बाद ट्रक गाजियाबाद स्थित अधिकृत वर्कशॉप में मरम्मत के लिए ले जाया गया, जहां करीब चार लाख रुपये खर्च आया। बीमा कंपनी ने क्लेम के लिए कार्रवाई शुरू की और सभी जरूरी कागजात देने के बावजूद भुगतान नहीं किया। बीमा कंपनी ने अपने बचाव में मामले को पोषणीय न होने और कागजातों के सत्यापन में समस्या का हवाला दिया, लेकिन आयोग के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।
आयोग ने माना कि बीमा कंपनी के कथन आपस में विरोधाभासी हैं। आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्य नाजरीन बेगम व विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर क्लेम का निस्तारण करने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक क्षति के रूप में पांच हजार तथा वाद व्यय के लिए तीन हजार रुपये देने के आदेश दिए। आदेश का पालन न होने पर बीमा कंपनी को 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
