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Farrukhabad News: दहेज हत्या में पति समेत तीन को सात वर्ष की कैद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Wed, 25 Mar 2026 01:32 AM IST
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फर्रुखाबाद। थाना कायमगंज क्षेत्र के चर्चित दहेज हत्या मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय संख्या-01) संजय कुमार ने पति समेत तीन आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषियों को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। छह हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर दो महीने के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया।
कोतवाली कायमगंज के गांव अताईपुर जदीद निवासी राजेश कुमार ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसने पुत्री रिंकी की शादी 3 फरवरी 2005 को गांव रायपुर खास निवासी बबलू के साथ की थी। विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज में 20 हजार रुपये, रंगीन टीवी और भैंस की मांग की जा रही थी। मांग पूरी न होने पर रिंकी को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
10 जून 2007 को आरोपियों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर रिंकी को जहर देकर मार डाला। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इस पर वादी ने अदालत की शरण ली। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने पति बबलू उर्फ प्रमोद कुमार उर्फ विनोद कुमार, देवर प्रदीप कुमार, ससुर प्रेमचंद्र और सास हीरा देवी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की विवेचना की। आरोपियों के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में ससुर प्रेमचंद्र की मौत हो जाने से उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी गई। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने महिला के पिता, माता सहित कुल आठ गवाह पेश किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा, एफआईआर सहित अन्य दस्तावेज साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
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कोतवाली कायमगंज के गांव अताईपुर जदीद निवासी राजेश कुमार ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसने पुत्री रिंकी की शादी 3 फरवरी 2005 को गांव रायपुर खास निवासी बबलू के साथ की थी। विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज में 20 हजार रुपये, रंगीन टीवी और भैंस की मांग की जा रही थी। मांग पूरी न होने पर रिंकी को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
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10 जून 2007 को आरोपियों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर रिंकी को जहर देकर मार डाला। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इस पर वादी ने अदालत की शरण ली। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने पति बबलू उर्फ प्रमोद कुमार उर्फ विनोद कुमार, देवर प्रदीप कुमार, ससुर प्रेमचंद्र और सास हीरा देवी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की विवेचना की। आरोपियों के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में ससुर प्रेमचंद्र की मौत हो जाने से उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी गई। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने महिला के पिता, माता सहित कुल आठ गवाह पेश किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा, एफआईआर सहित अन्य दस्तावेज साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।