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Farrukhabad News: 80 से अधिक राजकीय नलकूप ठप, सिंचाई के लिए किसान परेशान
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फोटो-21 कंपिल क्षेत्र के गांव कटिया में बंद पड़ा राजकीय नलकूप। संवाद
- फोटो : Samvad
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फर्रुखाबाद। जनपद में 350 में से 80 से अधिक राजकीय नलकूपों की दगाबाजी से किसान परेशान हैं। फाइलों में पानी फेंक रहे नलकूपों के ही हलक सूखे हैं। खराब मोटर महीनों न बदले जाने से किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे फसलों की लागत बढ़ रही है। इसके चलते किसान परेशान हैं।
राजकीय नलकूप विभाग जिले में करीब 350 नलकूप चालू दिखा रहा है। जबकि हकीकत इससे काफी अलग है। जिन नलकूपों के मोटर खराब होने व अन्य तकनीकी कमियों से महीनों से बंद पड़े हैं, विभाग की फाइलों में वह भी पानी फेंक रहे हैं। आलू के घाटे से बर्बाद हुए किसानों के सामने इन दिनों आर्थिक संकट है। इससे उन्हें दूसरी फसल तैयार करने के लिए लागत भी उधार लेनी पड़ रही है। यदि उन्हें राजकीय नलकूप से सिंचाई का निशुल्क लाभ मिले तो वह काफी राहत महसूस करेंगे, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते यह नलकूप किसानों को गच्चा दे रहे हैं।
जिले में करीब 100 राजकीय नलकूप किसानों के लिए बंद हैं। कहीं नाली क्षतिग्रस्त होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, तो कहीं मोटर खराब होने या अन्य कमियों से नलकूप बंद हैं। मोहम्मदाबाद ब्लॉक क्षेत्र में करीब 100 से अधिक नलकूप हैं। यहां 75 एफजी भरतपुर रसूलपुर, 119 एफजी पमरखिरिया, 116 एफजी रोहिला व सहसापुर सहित करीब 40 से अधिक नलकूप बंद हैं।
इनमें कई नलकूपों की मोटर खराब है, तो कुछ की मोटर बनने के लिए महीनों ने विभाग के वर्कशॉप में पड़ी है। इसके अलावा अधिकांश नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त हैं। कुछ ऐसा ही हाल ब्लॉक नवाबगंज के नलकूपों का है। वहीं कायमगंज के विश्वबैंक फीडर के 30 राजकीय नलकूप करीब 15 वर्ष से अधिक समय तक लगातार बंद रहे। गत वित्तीय वर्ष में इनकी लाइनें ठीक कराकर ट्रांसफार्मर रखवाए गए। फिर इन्हें कागजों में चालू कर दिया गया। हकीकत यह है कि अभी तक एक-दो नलकूपों को छोड़कर सभी बंद पड़े हैं। कंपिल क्षेत्र के गांव कटिया में भी नलकूप बंद पड़ा है। इससे साफ है कि राजकीय नलकूपों की सिंचाई फाइलों तक ही सीमित है, इसका किसानों तक लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
चार दिन में ही फुंक जाता मोटर
मोहम्मदाबाद के रोहिला निवासी रामरहीस ने बताया कि नलकूप की मोटर बदलने के बाद दो-चार दिन में ही फुंक जाती है। इससे अधिकांश समय नलकूप बंद रहता है। किसानों ने मजबूरी में निजी नलकूप से किराया देकर फसलों की सिंचाई करनी पड़ती है। सुरेश सिंह यादव उर्फ झब्बू ने बताया कि राजकीय नलकूप एक माह से बंद है। मोटर खराब हो गया है, इसे बदलवाने के बजाय खोला भी नहीं गया। मिस्त्री से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इससे उनकी 12 बीघा मक्का की फसल में सिंचाई प्रभावित है। नाली भी टूटी है।
किसानों ने बयां किया दर्द
फोटो-42 सुनील कुमार
गांव मौधा निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उनके गांव में लगा राजकीय नलकूप पिछले डेढ़ साल से खराब पड़ा है। शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। इससे किसानों को किराया देकर सिंचाई करनी पड़ रही है।
फोटो-43 राजेश कुमार
मौधा निवासी राजेश कुमार का कहना है कि यदि राजकीय नलकूप ठीक करा दिया जाए तो किसानों को सिंचाई में काफी राहत मिलेगी। लापरवाही इस कदर हावी है कि पूरी नाली कंडम होने के बावजूद कोई इसे ठीक कराने की सुधि नहीं ले रहा है।
फोटो-44 सर्वेश कुमार
मौधा निवासी सर्वेश कुमार ने बताया कि राजकीय नलकूपों की जांच कराई जाए तो क्षेत्र में आधे से अधिक नलकूप बंद मिलेंगे। प्रशासन को नलकूपों की जांच कराकर हकीकत देखनी चाहिए और किसानों के हित में इन्हें चालू कराना चाहिए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
राजकीय नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता शशांक कुमार ने बताया कि जिन नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त हैं, उनका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। इसके अलावा कुछ नलकूप रिबोर की श्रेणी में हैं। उनके पास जनपद कन्नौज का भी चार्ज है। जो नलकूप मोटर की खराबी व अन्य तकनीकी कमियों से बंद हैं, उन्हें दिखवाकर शीघ्र चालू कराने का प्रयास किया जाएगा।
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राजकीय नलकूप विभाग जिले में करीब 350 नलकूप चालू दिखा रहा है। जबकि हकीकत इससे काफी अलग है। जिन नलकूपों के मोटर खराब होने व अन्य तकनीकी कमियों से महीनों से बंद पड़े हैं, विभाग की फाइलों में वह भी पानी फेंक रहे हैं। आलू के घाटे से बर्बाद हुए किसानों के सामने इन दिनों आर्थिक संकट है। इससे उन्हें दूसरी फसल तैयार करने के लिए लागत भी उधार लेनी पड़ रही है। यदि उन्हें राजकीय नलकूप से सिंचाई का निशुल्क लाभ मिले तो वह काफी राहत महसूस करेंगे, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते यह नलकूप किसानों को गच्चा दे रहे हैं।
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जिले में करीब 100 राजकीय नलकूप किसानों के लिए बंद हैं। कहीं नाली क्षतिग्रस्त होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, तो कहीं मोटर खराब होने या अन्य कमियों से नलकूप बंद हैं। मोहम्मदाबाद ब्लॉक क्षेत्र में करीब 100 से अधिक नलकूप हैं। यहां 75 एफजी भरतपुर रसूलपुर, 119 एफजी पमरखिरिया, 116 एफजी रोहिला व सहसापुर सहित करीब 40 से अधिक नलकूप बंद हैं।
इनमें कई नलकूपों की मोटर खराब है, तो कुछ की मोटर बनने के लिए महीनों ने विभाग के वर्कशॉप में पड़ी है। इसके अलावा अधिकांश नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त हैं। कुछ ऐसा ही हाल ब्लॉक नवाबगंज के नलकूपों का है। वहीं कायमगंज के विश्वबैंक फीडर के 30 राजकीय नलकूप करीब 15 वर्ष से अधिक समय तक लगातार बंद रहे। गत वित्तीय वर्ष में इनकी लाइनें ठीक कराकर ट्रांसफार्मर रखवाए गए। फिर इन्हें कागजों में चालू कर दिया गया। हकीकत यह है कि अभी तक एक-दो नलकूपों को छोड़कर सभी बंद पड़े हैं। कंपिल क्षेत्र के गांव कटिया में भी नलकूप बंद पड़ा है। इससे साफ है कि राजकीय नलकूपों की सिंचाई फाइलों तक ही सीमित है, इसका किसानों तक लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
चार दिन में ही फुंक जाता मोटर
मोहम्मदाबाद के रोहिला निवासी रामरहीस ने बताया कि नलकूप की मोटर बदलने के बाद दो-चार दिन में ही फुंक जाती है। इससे अधिकांश समय नलकूप बंद रहता है। किसानों ने मजबूरी में निजी नलकूप से किराया देकर फसलों की सिंचाई करनी पड़ती है। सुरेश सिंह यादव उर्फ झब्बू ने बताया कि राजकीय नलकूप एक माह से बंद है। मोटर खराब हो गया है, इसे बदलवाने के बजाय खोला भी नहीं गया। मिस्त्री से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इससे उनकी 12 बीघा मक्का की फसल में सिंचाई प्रभावित है। नाली भी टूटी है।
किसानों ने बयां किया दर्द
फोटो-42 सुनील कुमार
गांव मौधा निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उनके गांव में लगा राजकीय नलकूप पिछले डेढ़ साल से खराब पड़ा है। शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। इससे किसानों को किराया देकर सिंचाई करनी पड़ रही है।
फोटो-43 राजेश कुमार
मौधा निवासी राजेश कुमार का कहना है कि यदि राजकीय नलकूप ठीक करा दिया जाए तो किसानों को सिंचाई में काफी राहत मिलेगी। लापरवाही इस कदर हावी है कि पूरी नाली कंडम होने के बावजूद कोई इसे ठीक कराने की सुधि नहीं ले रहा है।
फोटो-44 सर्वेश कुमार
मौधा निवासी सर्वेश कुमार ने बताया कि राजकीय नलकूपों की जांच कराई जाए तो क्षेत्र में आधे से अधिक नलकूप बंद मिलेंगे। प्रशासन को नलकूपों की जांच कराकर हकीकत देखनी चाहिए और किसानों के हित में इन्हें चालू कराना चाहिए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
राजकीय नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता शशांक कुमार ने बताया कि जिन नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त हैं, उनका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। इसके अलावा कुछ नलकूप रिबोर की श्रेणी में हैं। उनके पास जनपद कन्नौज का भी चार्ज है। जो नलकूप मोटर की खराबी व अन्य तकनीकी कमियों से बंद हैं, उन्हें दिखवाकर शीघ्र चालू कराने का प्रयास किया जाएगा।