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Farrukhabad News: कटपीस आलू 20 से 80 रुपये क्विंटल, मंडी शुल्क 600 के हिसाब से
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फर्रुखाबाद/कमालगंज। भीषण मंदी और घाटे के दलदल में फंसे आलू कारोबार में मंडी शुल्क की दरें आश्चर्य में डालने वाली हैं। 300 रुपये क्विंटल बिक रहे सफेद आलू ख्याती व पुखराज पर 600 रुपये के हिसाब से मंडी शुल्क जमा कराया जा रहा है। बाहर भेजने के लिए अच्छे आलू की शीतगृहों में छंटाई के दौरान निकलने वाला कटपीस आलू 20 से 80 रुपये क्विंटल बिक रहा है। इस पर भी मंडी शुल्क 600 रुपये की दर से लगाया जा रहा है।
दूसरे जिलों में बिकने के लिए जाने वाले आलू पर 1.5 प्रतिशत मंडी शुल्क लगता है। आलू कारोबार इन दिनों घाटे से घिरा है। इसके बाद भी न्यूनतम 600 रुपये क्विंटल के भाव पर मंडी शुल्क लिया जा रहा है। इस हिसाब से प्रति क्विंटल नौ रुपये शुल्क बैठता है। शीतगृहों में सबसे ज्यादा आलू ख्याती व पुखराज है। इसका भाव इस समय 300 रुपये क्विंटल चल रहा है, जबकि मंडी शुल्क दो गुने भाव का जमा हो रहा है।
शाहजहांपुर क्षेत्र में जाता है कटपीस आलू
- नगला दाऊद के किसान इशरत हुसैन का कहना है कि शीतगृहों में बिकने वाले आलू को सुखाकर सड़ा एवं कटपीस (कटा, फटा, चटका व दागी) आलू निकालकर साफ-सुथरा अच्छा आलू ट्रकों से बाहर भेजा जाता है। वहीं, छंटाई में जो कटपीस आलू निकलता है, वह भी बेच दिया जाता है। कटपीस आलू पर भी मंडी टैक्स 600 रुपये क्विंटल की दर से लग रहा है। कटपीस आलू अधिक मात्रा में शाहजहांपुर क्षेत्र में जाता है।
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पहले आधे दामों में बिकती थी कटपीस
- किसान व व्यापारी मेराज ने बताया कि पिछले सालों में शीतगृहों में छंटाई के बाद आलू की जो कटपीस निकलती थी, वह फ्रेश आलू की तुलना में आधे दामों में बिक जाती थी लेकिन इस साल ख्याती व पुखराज की कटपीस केवल 20 से 30 रुपये क्विंटल के हिसाब से बड़ी मुश्किल से बिक पा रही है। चिप्सोना की कटपीस 80 रुपये क्विंटल तक बिक रही है। दूसरे जिले में जाने पर कटपीस आलू पर भी 600 रुपये के भाव से नौ रुपये क्विंटल का मंडी शुल्क गेटपास कट रहा है। व्यापारी नरेश का कहना है कि इस साल गेटपास पर मंडी शुल्क माफ कर दिया जाए तो कुछ राहत हो सकती है।
- कमालगंज मंडी के सचिव अनूप कुमार दीक्षित ने बताया कि कुछ दिन पहले न्यूनतम भाव 450 रुपये तय किया गया था लेकिन सभी व्यापारियों ने अधिक भाव वाले चिप्सोना व हालैंड आलू का गेटपास भी 450 रुपये लगाकर निकाला। इसलिए फिर से न्यूनतम भाव 600 रुपये कर दिया गया।
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दूसरे जिलों में बिकने के लिए जाने वाले आलू पर 1.5 प्रतिशत मंडी शुल्क लगता है। आलू कारोबार इन दिनों घाटे से घिरा है। इसके बाद भी न्यूनतम 600 रुपये क्विंटल के भाव पर मंडी शुल्क लिया जा रहा है। इस हिसाब से प्रति क्विंटल नौ रुपये शुल्क बैठता है। शीतगृहों में सबसे ज्यादा आलू ख्याती व पुखराज है। इसका भाव इस समय 300 रुपये क्विंटल चल रहा है, जबकि मंडी शुल्क दो गुने भाव का जमा हो रहा है।
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शाहजहांपुर क्षेत्र में जाता है कटपीस आलू
- नगला दाऊद के किसान इशरत हुसैन का कहना है कि शीतगृहों में बिकने वाले आलू को सुखाकर सड़ा एवं कटपीस (कटा, फटा, चटका व दागी) आलू निकालकर साफ-सुथरा अच्छा आलू ट्रकों से बाहर भेजा जाता है। वहीं, छंटाई में जो कटपीस आलू निकलता है, वह भी बेच दिया जाता है। कटपीस आलू पर भी मंडी टैक्स 600 रुपये क्विंटल की दर से लग रहा है। कटपीस आलू अधिक मात्रा में शाहजहांपुर क्षेत्र में जाता है।
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पहले आधे दामों में बिकती थी कटपीस
- किसान व व्यापारी मेराज ने बताया कि पिछले सालों में शीतगृहों में छंटाई के बाद आलू की जो कटपीस निकलती थी, वह फ्रेश आलू की तुलना में आधे दामों में बिक जाती थी लेकिन इस साल ख्याती व पुखराज की कटपीस केवल 20 से 30 रुपये क्विंटल के हिसाब से बड़ी मुश्किल से बिक पा रही है। चिप्सोना की कटपीस 80 रुपये क्विंटल तक बिक रही है। दूसरे जिले में जाने पर कटपीस आलू पर भी 600 रुपये के भाव से नौ रुपये क्विंटल का मंडी शुल्क गेटपास कट रहा है। व्यापारी नरेश का कहना है कि इस साल गेटपास पर मंडी शुल्क माफ कर दिया जाए तो कुछ राहत हो सकती है।
- कमालगंज मंडी के सचिव अनूप कुमार दीक्षित ने बताया कि कुछ दिन पहले न्यूनतम भाव 450 रुपये तय किया गया था लेकिन सभी व्यापारियों ने अधिक भाव वाले चिप्सोना व हालैंड आलू का गेटपास भी 450 रुपये लगाकर निकाला। इसलिए फिर से न्यूनतम भाव 600 रुपये कर दिया गया।