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Farrukhabad News: राजनीतिक पहुंच से विभाग में मनमानी करता रहा जेई

Thu, 20 Aug 2026 12:34 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 12:34 AM IST
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The Junior Engineer continued to act arbitrarily within the department, leveraging his political connections.
फर्रुखाबाद। 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किए गए बिजली विभाग के जेई की राजनीतिक पहुंच के चलते विभागीय अधिकारी उस पर कार्रवाई करने से कतराते थे। इससे वह मनमानी करता रहा। बिना एस्टीमेट ट्रांसफार्मर लगाने व लाइन शिफ्टिंग में माहिर जेई बिना रिश्वत के घरेलू कनेक्शन भी नहीं देता था। टीजी-2 भी जेई के खिलाफ कई बार शिकायत कर चुका था।
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कानपुर नगर निवासी अवर अभियंता अजीत राजपूत कर्मचारियों से व्यवहार के नाम पर काफी विवादित रहा। शहर में तैनाती के दौरान करीब तीन वर्ष पूर्व प्लाटिंग वाले क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए 40 लाख रुपये का बना एस्टीमेट दरकिनार कर नियम विरुद्ध तीन कनेक्शन दे दिए। मामले का खुलासा होने पर जांच हुई। इसके बाद अवर अभियंता व उपभोक्ता पर विभाग से एस्टीमेट की धनराशि रिकवरी करने के आदेश दिए गए। हालांकि यह आदेश दबा दिया गया।
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पिछले कुछ महीनों में गांव गुगौरा में 25केवीए व गांव सितौली में 16केवीए के रखे ट्रांसफार्मर उतारकर बिना एस्टीमेट दूसरे स्थानों पर लगा दिए गए। एक ट्रांसफार्मर तो बिना एस्टीमेट के आरा मशीन पर लगाने की शिकायत भी हुई। इसके अलावा हाल ही में गांव याकूतगंज में दो पोल व लाइन बिना एस्टीमेट के शिफ्ट कर दी गई। इन तीनों मामलों की अधीक्षण अभियंता ने अधिशासी अभियंता परीक्षण खंड को जांच सौंपी थी।
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जिले के एक जनप्रतिनिधि से अवर अभियंता के करीबी संबंध होने के चलते जांच में भी देरी होती रही। विभागीय कार्रवाई न होने से हौसले इतने बुलंद हुए कि रिश्वत लेना अधिकार बन गया। आखिरकार किसान की शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने उसे 10 हजार रुपये लेते दबोच ही लिया। अधीक्षण अभियंता यादवेंद्र सिंह ने बताया कि तीन जेई के खिलाफ तीन जांचें चल रही हैं। दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

90 हजार जमा करने के पांच माह बाद दिया था
फतेहगढ़ से सटी महरूपुर सहजू स्थित नई कॉलोनी में राजेश बाथम ने मकान बनवाया। उन्होंने कनेक्शन मांगा तो जेई ने 90 हजार रुपये का एस्टीमेट थमा दिया। फरवरी में उन्होंने धनराशि भी जमा कर दी, लेकिन जेब गर्म न होने से उन्हें कनेक्शन नहीं मिला। कई बार शिकायत होने पर चार माह बाद लंबी केबल डालकर कनेक्शन दिया गया। जबकि एस्टीमेट में बंच केबल की भी धनराशि जोड़ने की बात कही जा रही है।

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जीरो टॉलरेंस के दावे के बीच बंद नहीं हो रही रिश्वतखोरी
- 19 जून को खनन अधिकारी संजय प्रताप को एंटी करप्शन टीम ने 24 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इससे पहले अधिवक्ता आजम जमा खां की शिकायत व 500 रुपये की रिश्वत लेते नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में संबद्ध चकबंदी विभाग के लिपिक शिवशंकर को जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने निलंबित कर दिया था। पुलिस विभाग में लेखाकार, डीपीआरओ कार्यालय के लेखाकार, जिला पंचायत कार्यालय के लिपिक, कानूनगो को भी पूर्व में एंटी करप्शन टीम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा कानूनगो व लेखपाल भी रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम के हत्थे चढ़ चुके हैं।
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