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Farrukhabad News: गंगा में दोगुने से अधिक पानी, 600 बीघा तरबूज फसल जलमग्न
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Fri, 27 Mar 2026 02:00 AM IST
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फोटो-10 तरबूज की फसल में पानी भरने से रोकने के लिए मेड़ बांधने का प्रयास करता किसान परिवार। स्र
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फर्रुखाबाद/कमालगंज। गंगा नदी में पानी दोगुने से अधिक बढ़ गया है, जिससे कई किसानों की तरबूज की फसल जलमग्न हो गई है। पिछले एक सप्ताह में जलस्तर में भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके कारण किसानों को 50 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। फतेहगढ़ से कन्नौज सीमा तक करीब 600 बीघा तरबूज की फसल पानी में डूब गई है।
पिछले 15 घंटे में गंगा का जलस्तर डेढ़ फीट बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को पानी में और वृद्धि होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। आजादनगर के किसान जमालुद्दीन ने बताया कि उनकी 30 बीघा रेती में से 10 बीघा फसल जलमग्न हो चुकी है। नन्हें की आठ बीघा, इरफान की चार बीघा और सियाराम बाथम की 12 बीघा फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। नथुआपुर के रामपाल, लक्ष्मण, पप्पू, महेश और सूरजपाल की फसलें भी पानी से भर गई हैं। किसान अपनी बची हुई फसल को बचाने के लिए फावड़े से मेड़ बांधने का प्रयास कर रहे हैं। युवा किसान इस्लामुद्दीन ने बताया कि नौ हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से लागत आई थी, जो अब डूब चुकी है। उन्होंने कहा कि धान और आलू में पहले ही घाटा झेल चुके किसानों के लिए यह एक और बड़ा झटका है। किसानों का कहना है कि इस नुकसान से उनका सुख-चैन छिन गया है।
50 लाख से ज्यादा की लागत डूब चुकी
युवा किसान इस्लामुद्दीन के अनुसार, फतेहगढ़ से कन्नौज सीमा तक लगभग 600 बीघा तरबूज की फसल पानी में डूब गई है। किसानों की 50 लाख रुपये से अधिक की लागत डूब चुकी है। उन्होंने बताया कि कई किसानों ने उधार लेकर फसल में पैसा लगाया था। जिस हिसाब से पानी बढ़ रहा है, उससे नुकसान और बढ़ने की आशंका है।
वर्जन
पहाड़ों पर हुई बारिश के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ा है। नरौरा बांध के पास जलस्तर मापन के अनुसार, कुछ दिन पहले गंगा में पांच हजार क्यूसेक पानी चल रहा था। अब यह बढ़कर करीब 12 हजार क्यूसेक हो गया है। इस वृद्धि से गंगा की गहराई के साथ-साथ उसका फैलाव भी बढ़ा है। -दुर्ग कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
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पिछले 15 घंटे में गंगा का जलस्तर डेढ़ फीट बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को पानी में और वृद्धि होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। आजादनगर के किसान जमालुद्दीन ने बताया कि उनकी 30 बीघा रेती में से 10 बीघा फसल जलमग्न हो चुकी है। नन्हें की आठ बीघा, इरफान की चार बीघा और सियाराम बाथम की 12 बीघा फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। नथुआपुर के रामपाल, लक्ष्मण, पप्पू, महेश और सूरजपाल की फसलें भी पानी से भर गई हैं। किसान अपनी बची हुई फसल को बचाने के लिए फावड़े से मेड़ बांधने का प्रयास कर रहे हैं। युवा किसान इस्लामुद्दीन ने बताया कि नौ हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से लागत आई थी, जो अब डूब चुकी है। उन्होंने कहा कि धान और आलू में पहले ही घाटा झेल चुके किसानों के लिए यह एक और बड़ा झटका है। किसानों का कहना है कि इस नुकसान से उनका सुख-चैन छिन गया है।
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50 लाख से ज्यादा की लागत डूब चुकी
युवा किसान इस्लामुद्दीन के अनुसार, फतेहगढ़ से कन्नौज सीमा तक लगभग 600 बीघा तरबूज की फसल पानी में डूब गई है। किसानों की 50 लाख रुपये से अधिक की लागत डूब चुकी है। उन्होंने बताया कि कई किसानों ने उधार लेकर फसल में पैसा लगाया था। जिस हिसाब से पानी बढ़ रहा है, उससे नुकसान और बढ़ने की आशंका है।
वर्जन
पहाड़ों पर हुई बारिश के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ा है। नरौरा बांध के पास जलस्तर मापन के अनुसार, कुछ दिन पहले गंगा में पांच हजार क्यूसेक पानी चल रहा था। अब यह बढ़कर करीब 12 हजार क्यूसेक हो गया है। इस वृद्धि से गंगा की गहराई के साथ-साथ उसका फैलाव भी बढ़ा है। -दुर्ग कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग

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