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पंचायत चुनाव: मुड़गांव में 50 साल बाद बदली सरकार, एक ही परिवार का रहा दबदबा, राम नारायण ने तोड़ी परंपरा
Mon, 03 May 2021 10:12 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 03 May 2021 10:12 PM IST
सार
50 वर्ष बाद मुड़गांव में गांव की सरकार दूसरे खेमे में पहुंच गई। एक ही परिवार के प्रधानी पर कब्जे की परंपरा को रामनारायण ने तोड़ दिया और लगभग एक हजार वोटों से जीत हासिल की।
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प्रधानी जीतने के बाद रामनारायण
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में फर्रुखाबाद में 50 वर्ष बाद मुड़गांव में गांव की सरकार दूसरे खेमे में पहुंच गई। एक ही परिवार के प्रधानी पर कब्जे की परंपरा को रामनारायण ने तोड़ दिया और लगभग एक हजार वोटों से जीत हासिल की।
ब्लॉक मोहम्मदाबाद की ग्राम पंचायत मुड़गांव की प्रधानी पर छविनाथ सिंह के परिवार का 50 साल से अधिक समय से कब्जा था। सबसे पहले उनके परिवार के हरनाथ सिंह दो बार प्रधान रहे। इसके बाद उनके चाचा नंदन सिंह तीन बार प्रधान रहे।
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ब्लॉक मोहम्मदाबाद की ग्राम पंचायत मुड़गांव की प्रधानी पर छविनाथ सिंह के परिवार का 50 साल से अधिक समय से कब्जा था। सबसे पहले उनके परिवार के हरनाथ सिंह दो बार प्रधान रहे। इसके बाद उनके चाचा नंदन सिंह तीन बार प्रधान रहे।
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उनके बाद चाचा भगवान सिंह दो बार प्रधान बनकर गांव में विकास कार्य करवाते रहे। इसके बाद भतीजे छविनाथ सिंह उर्फ छन्नू ने प्रधानी की। इसके बाद महिला सीट होने पर उनकी पत्नी प्रधान बन गई। इसी बीच एक बार पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गया।
इस पर छविनाथ सिंह छन्नू ने अपने ड्राइवर रामजीत को चुनाव लड़ाया और जीत कर प्रधानी अपने पक्ष में रखने में कामयाब हो गए। पिछला चुनाव भी छविनाथ उर्फ छन्नू ने भारी बहुमत से जीत लिया था।
वह आस पास के क्षेत्र में सबसे कामयाब प्रधान कहे जाते हैं जो जनता की नब्ज जानते थे। इस बार उनकी बादशाहत को गांव के ही राम नारायण सिंह ने खत्म कर दिया। राम नारायण ने छविनाथ सिंह को लगभग एक हजार वोटों से हराकर गांव की सरकार अपने नाम कर ली।
इस पर छविनाथ सिंह छन्नू ने अपने ड्राइवर रामजीत को चुनाव लड़ाया और जीत कर प्रधानी अपने पक्ष में रखने में कामयाब हो गए। पिछला चुनाव भी छविनाथ उर्फ छन्नू ने भारी बहुमत से जीत लिया था।
वह आस पास के क्षेत्र में सबसे कामयाब प्रधान कहे जाते हैं जो जनता की नब्ज जानते थे। इस बार उनकी बादशाहत को गांव के ही राम नारायण सिंह ने खत्म कर दिया। राम नारायण ने छविनाथ सिंह को लगभग एक हजार वोटों से हराकर गांव की सरकार अपने नाम कर ली।