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Farrukhabad News: घोटाले के मामले में पुलिस बरत रही लापरवाही
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फर्रुखाबाद। सरकारी योजनाओं में बड़े घोटालों के बावजूद पुलिस की कार्रवाई में शिथिलता देखी जा रही है। फसल बीमा योजना में 68 लाख रुपये के गबन के मामले में 44 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि डिजीशक्ति योजना के मोबाइल घोटाले का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत, भूमि का फर्जी ब्योरा भरकर किसानों को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। जांच में 68 लाख रुपये के गबन का खुलासा होने पर उपकृषि निदेशक ने तीन बीमा कंपनी कर्मचारियों, नौ बैंक प्रबंधकों और 32 किसानों के खिलाफ जहानगंज व अमृतपुर थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी या पूछताछ नहीं की है, जिससे यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।
डिजीशक्ति योजना के तहत छात्रों को बांटे जाने वाले 802 मोबाइल और पांच टैबलेट गायब हो गए थे। इस घोटाले में भी कार्रवाई के नाम पर शुरू से ही लापरवाही बरती गई। एएसडीएम की जांच रिपोर्ट के बाद, संविदा पर तैनात ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर ने तत्कालीन ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर के खिलाफ फतेहगढ़ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने आईएमईआई नंबर के आधार पर जांच कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर 131 मोबाइल बरामद किए, लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। इस घोटाले में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को शक के आधार पर भी जांच में शामिल नहीं किया गया है, और यह जांच भी फिलहाल ठंडे बस्ते में है।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत, भूमि का फर्जी ब्योरा भरकर किसानों को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। जांच में 68 लाख रुपये के गबन का खुलासा होने पर उपकृषि निदेशक ने तीन बीमा कंपनी कर्मचारियों, नौ बैंक प्रबंधकों और 32 किसानों के खिलाफ जहानगंज व अमृतपुर थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी या पूछताछ नहीं की है, जिससे यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।
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डिजीशक्ति योजना के तहत छात्रों को बांटे जाने वाले 802 मोबाइल और पांच टैबलेट गायब हो गए थे। इस घोटाले में भी कार्रवाई के नाम पर शुरू से ही लापरवाही बरती गई। एएसडीएम की जांच रिपोर्ट के बाद, संविदा पर तैनात ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर ने तत्कालीन ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर के खिलाफ फतेहगढ़ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने आईएमईआई नंबर के आधार पर जांच कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर 131 मोबाइल बरामद किए, लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। इस घोटाले में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को शक के आधार पर भी जांच में शामिल नहीं किया गया है, और यह जांच भी फिलहाल ठंडे बस्ते में है।
