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Farrukhabad News: मानकों में फंसी आलू खरीद, सरकारी केंद्र की बोहनी नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद Updated Thu, 30 Apr 2026 12:49 AM IST
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Potato procurement stuck in standards, government centre fails to make any progress
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फर्रुखाबाद। सरकारी केंद्र पर आलू बेचने का किसानों का सपना मानकों के पेंच में फंसता नजर आ रहा है। इसी का नतीजा है कि सातनपुर मंडी में खुले सरकारी क्रय केंद्र की दूसरे दिन बोहनी तक नहीं हुई है। जबकि मंडी में आलू 150 रुपये प्रति क्विंटल तक बुधवार को बिका। जबकि सरकारी खरीद का भाव 650.09 रुपये प्रति क्विंटल है। वर्ष 2023 में भी सरकारी खरीद का यही हश्र हुआ था।
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आलू की मंदी से किसान इस बार बर्बाद हो गए हैं। बर्बादी की खबर को अमर उजाला ने 28 मार्च के अंक में आलू...मिट्टी में मिले अरमान शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद सरकार को आलू की खरीद पर विचार पड़ा। सरकार ने हाफेड () के माध्यम से आलू की सरकारी खरीद का फैसला लिया। आलू का भाव 650.09 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया। मंगलवार शाम सातनपुर मंडी में हाफेड का आलू क्रय केंद्र खोला गया।
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बुधवार से आलू खरीद के लिए क्रय केंद्र प्रभारी रामकेश भारती, उद्यान निरीक्षक श्याम सिंह व नोडल अधिकारी एसके सुमन मौजूद रहे। आलू का मानक निर्धारित होने से एक भी किसान का सरकारी केंद्र पर आलू नहीं खरीदा जा सका। जबकि सातनपुर मंडी में करीब 50 ट्रक आलू पहुंचा। किसानों ने मजबूरी में आढ़तों पर ही 150 रुपये से लेकर 425 रुपये प्रति क्विंटल आलू बेचा। एक ओर सस्ते भाव के बावजूद आढ़तों पर आलू की तौल के लिए किसानों को इंतजार करना पड़ा। जबकि हाफेड के क्रय केंद्र पर आलू खरीद की बोहनी तक नहीं हो सकी और सन्नाटा पसरा रहा।







सरकारी खरीद के यह हैं मानक



हाफेड से आलू की सरकारी खरीद के लिए मुख्य रूप से चार मानक निर्धारित हैं। इसमें आलू का साइज़ 45 से 85 एमएम व्यास का होना चाहिए। बिना मिट्टी लगा साफ आलू रोगमुक्त हो। कटा-फटा, हरा, डिशेप्ड व धूप-छाया का न हो। इसके अलावा छंटाई व ग्रेडिंग का ही आलू केंद्र पर खरीदने के आदेश हैं। इससे इन मानकों पर किसान का आलू खरा नहीं उतर पा रहा है। इससे आलू की सरकारी खरीद भले ही शुरू की गई हो लेकिन इसका लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद नहीं है।







तीन वर्ष पहले भी खुल चुका क्रय केंद्र, नहीं हुई थी खरीद



आलू को मंदी से उबारने के लिए जनपद में तीन वर्ष पूर्व भी हाफेड का क्रय केंद्र खोला गया था। मानकों के पेंच के चलते किसानों का आलू खरीदा नहीं जा सका और शून्य खरीद पर ही केंद्र बंद हो गया। निर्धारित साइज़ के हिसाब से यदि किसान आलू की छंटाई कराते हैं तो 30 फीसदी आलू ही मानक के अनुरूप निकलता है, शेष 70 फीसदी आलू का बाजार में भी कोई खरीदार नहीं मिलता और उसे बेहद सस्ते दामों पर बेचना पड़ता है।



क्या कहते हैं जिम्मेदार



हाफेड के क्रय केंद्र पर मौजूद उद्यान निरीक्षक श्याम सिंह व नोडल अधिकारी एसके सुमन ने बताया कि मानक के अनुरूप आलू न होने से कोई किसान क्रय पर नहीं आया। अधूरे मानक पर वह आलू की खरीद नहीं कर सकते। फिलहाल पहले दिन आलू की खरीद नहीं हो सकी। निर्धारित मानक के अनुसार ही आलू खरीदा जाएगा।
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