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Farrukhabad News: शहर में जर्जर इमारतों के साए में ‘खामोश दहशत’
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फोटो-15, लोहिया अस्पताल परिसर स्थित जर्जर आवास। संवाद
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फर्रुखाबाद। बारिश का मौसम शुरू होते ही शहर की जर्जर इमारतें लोगों की चिंता का कारण बन गई हैं। शहर में 100 से 150 वर्ष पुराने कई भवन ऐसे हैं, जिनकी हालत किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकती है। इसके बावजूद न तो इन भवनों का व्यापक सर्वे कराया गया और न ही उन्हें सुरक्षित बनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। हालात यह हैं कि लोग हर बारिश के साथ खतरे के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं। नगर पालिका और संबंधित विभागों की ओर से जर्जर भवनों को चिह्नित कर सुरक्षा के इंतजाम करने की प्रक्रिया भी सुस्त दिखाई दे रही है। बरसात के दौरान ऐसे भवनों का तत्काल तकनीकी सर्वे, मरम्मत, बैरिकेडिंग और जरूरत पड़ने पर उन्हें खाली कराना जरूरी है।
लोहिया अस्पताल परिसर में भी जर्जर आवास
सबसे गंभीर स्थिति डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल परिसर की है। यहां करीब 30 वर्ष पूर्व चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों के लिए बने 154 सरकारी आवासों में करीब 50 आवास अत्यंत जर्जर हो चुके हैं। कई मकानों के छज्जे टूट रहे हैं, दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और उन पर बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। बरसात के दौरान इन भवनों में रहना किसी जोखिम से कम नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने करीब दो वर्ष पहले इन आवासों की मरम्मत के लिए बजट का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन आज तक फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। नतीजा यह है कि कर्मचारी बदहाल भवनों में रहने को मजबूर हैं। हर बारिश के साथ दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
संस्कृत महाविद्यालय का भवन करीब 100 वर्ष से अधिक पुराना
शहर के रेलवे रोड स्थित संस्कृत महाविद्यालय का भवन करीब 100 वर्ष से अधिक पुराना है। यहां पर रहने वाले केयर टेकर पुष्पा कुमारी ने बताया कि बरसात होने के दौरान भवन के कमरों में लिंटर से पानी टपकता है, दीवारें कमजोर हो चुकी हैं।। पॉलीथीन आदि डालकर फर्नीचर व अन्य सामान को बचाते हैं। जर्जर हालत होने से हादसे का अंदेशा बना रहता है।
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शाह जी की हवेली समेत कई पुराने भवन भी जर्जर अवस्था में
शहर के मोहल्ला अढ़तियान स्थित शाह जी की हवेली समेत कई पुराने भवन भी जर्जर अवस्था में हैं। करीब 150 वर्ष से अधिक पुरानी इस हवेली में पहले एक परिवार रहा करता था। अब हवेली के दरवाजों में बाहर से ताले पड़े हैं। आसपास के मकानों से सटी इस बहुमंजिला हवेली की इमारत के बरसात के दौरान गिरने का अंदेशा बना रहता है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसका ध्वस्तीकरण नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
वर्जन
आवासों की मरम्मत के लिए विभागीय अवर अभियंता से एस्टीमेट बनवाकर करीब 15 दिन पहले भेजा है। बजट आने पर ही आवासों की मरम्मत कराई जा सकती है। जो लोग वहां पर रहते हैं, उन्हे भी थाेड़ी बहुत मरम्मत करा लेनी चाहिए। -डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस लोहिया अस्पताल के
वर्जन
उनके पास भवन की गुणवत्ता जांचने के लिए जर्जर भवनों की सूची आती है। वह अपनी रिपोर्ट लगाकर उसे संबंधित विभाग को वापस कर देते हैं। जर्जर भवन को गिराना या मरम्मत करवाना संबंधित विभाग का कार्य है। -मुरलीधर, अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी
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लोहिया अस्पताल परिसर में भी जर्जर आवास
सबसे गंभीर स्थिति डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल परिसर की है। यहां करीब 30 वर्ष पूर्व चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों के लिए बने 154 सरकारी आवासों में करीब 50 आवास अत्यंत जर्जर हो चुके हैं। कई मकानों के छज्जे टूट रहे हैं, दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और उन पर बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। बरसात के दौरान इन भवनों में रहना किसी जोखिम से कम नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने करीब दो वर्ष पहले इन आवासों की मरम्मत के लिए बजट का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन आज तक फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। नतीजा यह है कि कर्मचारी बदहाल भवनों में रहने को मजबूर हैं। हर बारिश के साथ दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
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संस्कृत महाविद्यालय का भवन करीब 100 वर्ष से अधिक पुराना
शहर के रेलवे रोड स्थित संस्कृत महाविद्यालय का भवन करीब 100 वर्ष से अधिक पुराना है। यहां पर रहने वाले केयर टेकर पुष्पा कुमारी ने बताया कि बरसात होने के दौरान भवन के कमरों में लिंटर से पानी टपकता है, दीवारें कमजोर हो चुकी हैं।। पॉलीथीन आदि डालकर फर्नीचर व अन्य सामान को बचाते हैं। जर्जर हालत होने से हादसे का अंदेशा बना रहता है।
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शाह जी की हवेली समेत कई पुराने भवन भी जर्जर अवस्था में
शहर के मोहल्ला अढ़तियान स्थित शाह जी की हवेली समेत कई पुराने भवन भी जर्जर अवस्था में हैं। करीब 150 वर्ष से अधिक पुरानी इस हवेली में पहले एक परिवार रहा करता था। अब हवेली के दरवाजों में बाहर से ताले पड़े हैं। आसपास के मकानों से सटी इस बहुमंजिला हवेली की इमारत के बरसात के दौरान गिरने का अंदेशा बना रहता है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसका ध्वस्तीकरण नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
वर्जन
आवासों की मरम्मत के लिए विभागीय अवर अभियंता से एस्टीमेट बनवाकर करीब 15 दिन पहले भेजा है। बजट आने पर ही आवासों की मरम्मत कराई जा सकती है। जो लोग वहां पर रहते हैं, उन्हे भी थाेड़ी बहुत मरम्मत करा लेनी चाहिए। -डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस लोहिया अस्पताल के
वर्जन
उनके पास भवन की गुणवत्ता जांचने के लिए जर्जर भवनों की सूची आती है। वह अपनी रिपोर्ट लगाकर उसे संबंधित विभाग को वापस कर देते हैं। जर्जर भवन को गिराना या मरम्मत करवाना संबंधित विभाग का कार्य है। -मुरलीधर, अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी

फोटो-15, लोहिया अस्पताल परिसर स्थित जर्जर आवास। संवाद

फोटो-15, लोहिया अस्पताल परिसर स्थित जर्जर आवास। संवाद