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Farrukhabad News: उलटि पलटि लंका सब जारी, कूदि परा पुनि सिंधु मझारी...
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कमालगंज। उलटि पलटि लंका सब जारी, कूदि परा पुनि सिंधु मझारी... शिवजी मां पार्वती से कहते हैं, जिन्होंने अग्नि को बनाया, हनुमान जी उन्हीं के दूत हैं। इसी कारण वे अग्नि से नहीं जले। हनुमान जी ने उलट-पलटकर (एक ओर से दूसरी ओर तक) सारी लंका जला दी। फिर वे समुद्र में कूद पड़े।
कमालगंज की रामलीला में नौवें दिन रामलीला के विशाल मैदान में सुग्रीव मित्रता, बालि वध व लंका दहन लीला खेली गई। लीला में हनुमान के लंका प्रवेश, माता सीता की खोज, अक्षय कुमार वध और लंका दहन के दृश्यों का मंचन किया गया। प्रसंग अनुसार, प्रभु श्रीराम का कार्य सिद्ध करने निकले हनुमान सौ योजन का समुद्र लांघते हुए लंका पहुंचे।
लंकिनी का मान-मर्दन कर और विभीषण से भेंट के बाद उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को श्रीराम की मुद्रिका सौंपकर उनका संताप दूर किया। उन्होंने रावण के पुत्र अक्षय कुमार का संहार किया। मेघनाद द्वारा ब्रह्मास्त्र से बांधकर दरबार में लाए जाने पर अभिमानी लंकेश ने हनुमान की पूंछ में आग लगवा दी।
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बजरंगबली ने देखते ही देखते सोने की लंका को आग लगाकर जला दिया। सुंदरम ने हनुमान की भूमिका में छाप छोड़ी। मोहित दुबे ने अंगद, प्रांशु पाठक ने राम, अंश दवे ने लक्ष्मण का अभिनय किया। लकी शुक्ला, बृजेश दवे, प्रखर पालीवाल, अमर सिंह कश्यप, राघव शुक्ला ने भी अभिनय किया।
वहीं, रात दस बजे चौराहे पर आरती के दौरान उमड़ी भारी भीड़ के बीच पदाधिकारी केशव गुप्ता, अजय माहेश्वरी, पंकज अग्रवाल, संजय गुप्ता, प्रभाशंकर औदीच्य, विल्लू श्रीवास्तव, राज चौरसिया, अंकित गुप्ता, सानू चौरसिया, अरविंद गुप्ता, रवी वर्मा, प्रियांशु चौरसिया, अनूप गुप्ता जैकी, अंकुश रावत, विक्की चौरसिया, मोनू गुप्ता ने भी आरती गायन में भाग लिया। (संवाद)
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हनुमान-रावण संवाद ने मोह लिया श्रद्धालुओं का मन
-अशोक वाटिका से लंका दहन तक के प्रसंगों का मंचन
फोटो-41 सीपी ग्राउंड पर रामलीला के मंचन में हनुमान-रावण संवाद। पाठक
कायमगंज। सीपी ग्राउंड में शनिवार रात श्रीरामलीला में हनुमान-रावण संवाद, अशोक वाटिका और लंका दहन सहित रामायण के कई प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
लीला में रावण ने माता सीता को डराने के लिए तलवार उठाई तो सीता जी ने घास के तिनके के माध्यम से उसे जवाब दिया। इसके बाद अशोक वाटिका पहुंचे हनुमान जी ने माता सीता को भगवान राम की अंगूठी सौंपी। हनुमान-रावण संवाद के साथ लंका दहन का मंचन भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा बाली वध और राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में सत्य प्रकाश अग्रवाल, संजय बंसल, पीयूष गंगवार, संजीव शाक्य, संजय गुप्ता, रोहित अग्रवाल, दीपक अरोड़ा, अंकित अग्रवाल और अमित सेठ सहित रामलीला समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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राम-सुग्रीव मित्रता की लीला का मंचन, गूंजे श्रीराम के जयकारे
फोटो-42 सीता हरण के बाद रामलीला मैदान में जाते राम और लक्ष्मण। संवाद
शमसाबाद। रामलीला महोत्सव में रविवार को भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने शानदार अभिनय के माध्यम से राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग को जीवंत कर दिया। लीला का मंचन देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और रामलीला मैदान भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
मंचन के दौरान भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग दिखाया गया। माता सीता की खोज में निकले भगवान श्रीराम की सुग्रीव से मुलाकात होती है। दोनों एक-दूसरे की सहायता करने का संकल्प लेते हैं। सुग्रीव भगवान श्रीराम को माता सीता की खोज में सहयोग देने का वचन देते हैं। वहीं भगवान श्रीराम सुग्रीव को उनके संकट से मुक्ति दिलाने का भरोसा देते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से मित्रता, विश्वास और सहयोग का संदेश दिया गया।
रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जैसे ही भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग मंचित हुआ, दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा।
इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष श्याम मिश्रा, महामंत्री नवनीत रस्तोगी, आलोक कुमार, जितेंद्र कुमार, योगराज राजपूत, रामकुमार गुप्ता, अवधेश पांडे, रवि पांडेय और शीतल चौबे, दीपक चौबे सहित रामलीला कमेटी के पदाधिकारी एवं सहयोगी मौजूद रहे।
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सुग्रीव मित्रता और बाली वध की लीला देखने को डटे रहे श्रद्धालु
कंपिल। कस्बा में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में शनिवार रात रामलीला मैदान में सुग्रीव मित्रता और बाली वध की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली संवाद और सजीव अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। लीला देखने के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।
मंचन में दिखाया गया कि बाली के भय से सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर रहने को विवश थे। इसी दौरान हनुमान जी की सहायता से भगवान श्रीराम और सुग्रीव की भेंट हुई। सुग्रीव ने अपनी पीड़ा भगवान श्रीराम को बताई। श्रीराम और सुग्रीव के बीच मित्रता हुई। दोनों ने एक-दूसरे का साथ देने का संकल्प लिया।
सुग्रीव और बाली के बीच युद्ध हुआ। उचित अवसर देखकर भगवान श्रीराम ने बाली का वध कर दिया। बाली वध के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। बाद में सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाए जाने का मंचन हुआ।
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कमालगंज की रामलीला में नौवें दिन रामलीला के विशाल मैदान में सुग्रीव मित्रता, बालि वध व लंका दहन लीला खेली गई। लीला में हनुमान के लंका प्रवेश, माता सीता की खोज, अक्षय कुमार वध और लंका दहन के दृश्यों का मंचन किया गया। प्रसंग अनुसार, प्रभु श्रीराम का कार्य सिद्ध करने निकले हनुमान सौ योजन का समुद्र लांघते हुए लंका पहुंचे।
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लंकिनी का मान-मर्दन कर और विभीषण से भेंट के बाद उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को श्रीराम की मुद्रिका सौंपकर उनका संताप दूर किया। उन्होंने रावण के पुत्र अक्षय कुमार का संहार किया। मेघनाद द्वारा ब्रह्मास्त्र से बांधकर दरबार में लाए जाने पर अभिमानी लंकेश ने हनुमान की पूंछ में आग लगवा दी।
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बजरंगबली ने देखते ही देखते सोने की लंका को आग लगाकर जला दिया। सुंदरम ने हनुमान की भूमिका में छाप छोड़ी। मोहित दुबे ने अंगद, प्रांशु पाठक ने राम, अंश दवे ने लक्ष्मण का अभिनय किया। लकी शुक्ला, बृजेश दवे, प्रखर पालीवाल, अमर सिंह कश्यप, राघव शुक्ला ने भी अभिनय किया।
वहीं, रात दस बजे चौराहे पर आरती के दौरान उमड़ी भारी भीड़ के बीच पदाधिकारी केशव गुप्ता, अजय माहेश्वरी, पंकज अग्रवाल, संजय गुप्ता, प्रभाशंकर औदीच्य, विल्लू श्रीवास्तव, राज चौरसिया, अंकित गुप्ता, सानू चौरसिया, अरविंद गुप्ता, रवी वर्मा, प्रियांशु चौरसिया, अनूप गुप्ता जैकी, अंकुश रावत, विक्की चौरसिया, मोनू गुप्ता ने भी आरती गायन में भाग लिया। (संवाद)
हनुमान-रावण संवाद ने मोह लिया श्रद्धालुओं का मन
-अशोक वाटिका से लंका दहन तक के प्रसंगों का मंचन
फोटो-41 सीपी ग्राउंड पर रामलीला के मंचन में हनुमान-रावण संवाद। पाठक
कायमगंज। सीपी ग्राउंड में शनिवार रात श्रीरामलीला में हनुमान-रावण संवाद, अशोक वाटिका और लंका दहन सहित रामायण के कई प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
लीला में रावण ने माता सीता को डराने के लिए तलवार उठाई तो सीता जी ने घास के तिनके के माध्यम से उसे जवाब दिया। इसके बाद अशोक वाटिका पहुंचे हनुमान जी ने माता सीता को भगवान राम की अंगूठी सौंपी। हनुमान-रावण संवाद के साथ लंका दहन का मंचन भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा बाली वध और राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में सत्य प्रकाश अग्रवाल, संजय बंसल, पीयूष गंगवार, संजीव शाक्य, संजय गुप्ता, रोहित अग्रवाल, दीपक अरोड़ा, अंकित अग्रवाल और अमित सेठ सहित रामलीला समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे।
राम-सुग्रीव मित्रता की लीला का मंचन, गूंजे श्रीराम के जयकारे
फोटो-42 सीता हरण के बाद रामलीला मैदान में जाते राम और लक्ष्मण। संवाद
शमसाबाद। रामलीला महोत्सव में रविवार को भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने शानदार अभिनय के माध्यम से राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग को जीवंत कर दिया। लीला का मंचन देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और रामलीला मैदान भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
मंचन के दौरान भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग दिखाया गया। माता सीता की खोज में निकले भगवान श्रीराम की सुग्रीव से मुलाकात होती है। दोनों एक-दूसरे की सहायता करने का संकल्प लेते हैं। सुग्रीव भगवान श्रीराम को माता सीता की खोज में सहयोग देने का वचन देते हैं। वहीं भगवान श्रीराम सुग्रीव को उनके संकट से मुक्ति दिलाने का भरोसा देते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से मित्रता, विश्वास और सहयोग का संदेश दिया गया।
रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जैसे ही भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग मंचित हुआ, दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा।
इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष श्याम मिश्रा, महामंत्री नवनीत रस्तोगी, आलोक कुमार, जितेंद्र कुमार, योगराज राजपूत, रामकुमार गुप्ता, अवधेश पांडे, रवि पांडेय और शीतल चौबे, दीपक चौबे सहित रामलीला कमेटी के पदाधिकारी एवं सहयोगी मौजूद रहे।
सुग्रीव मित्रता और बाली वध की लीला देखने को डटे रहे श्रद्धालु
कंपिल। कस्बा में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में शनिवार रात रामलीला मैदान में सुग्रीव मित्रता और बाली वध की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली संवाद और सजीव अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। लीला देखने के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।
मंचन में दिखाया गया कि बाली के भय से सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर रहने को विवश थे। इसी दौरान हनुमान जी की सहायता से भगवान श्रीराम और सुग्रीव की भेंट हुई। सुग्रीव ने अपनी पीड़ा भगवान श्रीराम को बताई। श्रीराम और सुग्रीव के बीच मित्रता हुई। दोनों ने एक-दूसरे का साथ देने का संकल्प लिया।
सुग्रीव और बाली के बीच युद्ध हुआ। उचित अवसर देखकर भगवान श्रीराम ने बाली का वध कर दिया। बाली वध के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। बाद में सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाए जाने का मंचन हुआ।