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Fatehpur News: जमीन की कीमत के हिसाब से तय होता कमीशन
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फोटो-41-राहुल कुमार बौद्ध। स्रोत
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फतेहपुर। जिले में सदर, बिंदकी और खागा तहसील में उपनिबंधक कार्यालय हैं। यहां हर बैनामे में जमीन की मालियत के हिसाब से वसूली होती है। सरकारी खजाने के साथ प्रतिदिन कर्मचारी अपनी जेब भरते हैं। इसके अलावा भी स्टांप चोरी की धौंस दिखाकर लोगों से वसूली की जाती है।
उपनिबंधक कार्यालयों में रजिस्ट्री कराने में बैनामा लेखक माध्यम होते हैं। बैनामा लिखने के समय ही वह कार्यालय का खर्च अपने पास जमा करा लेते हैं। करीब एक से पांच लाख कीमत की भूमि का बैनामा कराने में दो से तीन प्रतिशत अतिरिक्त रुपया लिया जाता है। जबकि 10 लाख से अधिक की कीमत के बैनामों में एक से दो प्रतिशत अतिरिक्त रकम वसूल ली जाती है।
प्रतिदिन जिले में करीब 10 से 20 करोड़ के बीच बैनामे होते हैं। इन बैनामों में वसूली की रकम लाखों में इकट्ठा होती है, जिसका बंदरबांट किया जाता है। इस तरह से सामान्य कम कीमत प्लॉट के बैनामे में पांच हजार रुपये और 10 लाख से अधिक मालियत की भूमि के बैनामों में 10 से 20 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। खागा में बाबू के पकड़े जाने के बाद बाकी कार्यालयों में तैनात कर्मियों की धड़कनें बढ़ी हैं। वसूली के इस खेल से जुड़े कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
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एक माह में पकड़ा तीसरी बार धरपकड़
3 अगस्त 2026 हथगाम विकास खंड कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर हफीजुर्रहमान को एंटी करप्शन प्रयागराज की टीम ने बकाया भुगतान पास करने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
27 जुलाई 2026 शहर के डीआईओएस कार्यालय के सामने स्थित एक चाय की दुकान से स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के वरिष्ठ लेखा परीक्षक रविंद्र प्रताप सिंह को ऑडिट रिपोर्ट के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
अक्तूबर 2025 में खजुहा ब्लॉक में सीडीपीओ का कंप्यूटर ऑपरेटर रिश्वत लेते पकड़ा गया था। सीडीपीओ भाग निकली थीं।
अक्तूबर 2025 में एंटी करप्शन टीम ने फतेहपुर में विद्युत विभाग के उपखंड अधिकारी प्रेमचंद्र और उनके निजी मुंशी अतुल सिंह को आवासीय विद्युत कनेक्शन के बिल संशोधन के नाम पर 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था
17 जून 2025 को बिंदकी तहसील लेखपाल (सीताराम): एंटी करप्शन टीम ने नक्शा बनाने के एवज में 5,000 रुपये की घूस लेते गिरफ्तार किया था।
13 सदस्यीय टीम ने संभाली ट्रैप की कमान
भ्रष्टाचार निवारण संगठन प्रयागराज इकाई की ओर से राहुल को ट्रैप कार्रवाई के लिए 13 सदस्यीय टीम पहुंची। टीम में निरीक्षक रविंद्र सिंह, निरीक्षक अंजली यादव, निरीक्षक राकेश बहादुर सिंह, निरीक्षक अलाउद्दीन अंसारी, उपनिरीक्षक अर्जुन सिंह, हेड कांस्टेबल शशिकांत शर्मा, दीपक शुक्ला समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए आरक्षी सुनील यादव को भी टीम में शामिल किया गया।
टीम के जाते ही कार्यालय में मची खलबली
ट्रैप कार्रवाई के लिए भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम के कार्यालय पहुंचने और कार्रवाई के बाद वहां से रवाना होने पर कुछ समय तक कार्यालय में खलबली का माहौल रहा। टीम की कार्रवाई को लेकर कर्मचारी और कार्यालय में मौजूद लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। कार्रवाई के बाद कार्यालय में कामकाज प्रभावित नजर आया।
आरोप निराधार, मीटिंग में थीं
उप निबंधक अधिकारी उर्वरा शक्ति ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ट्रैप कार्रवाई के दौरान वह कार्यालय में मौजूद नहीं थीं, बल्कि फतेहपुर में विभागीय मीटिंग में शामिल होने गई थीं। उन्होंने कार्यालय में किसी तरह की अनियमितता या वसूली से अपने संबंध से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित किसान से उनकी कभी भी बातचीत ही नहीं हुई।
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उपनिबंधक कार्यालयों में रजिस्ट्री कराने में बैनामा लेखक माध्यम होते हैं। बैनामा लिखने के समय ही वह कार्यालय का खर्च अपने पास जमा करा लेते हैं। करीब एक से पांच लाख कीमत की भूमि का बैनामा कराने में दो से तीन प्रतिशत अतिरिक्त रुपया लिया जाता है। जबकि 10 लाख से अधिक की कीमत के बैनामों में एक से दो प्रतिशत अतिरिक्त रकम वसूल ली जाती है।
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प्रतिदिन जिले में करीब 10 से 20 करोड़ के बीच बैनामे होते हैं। इन बैनामों में वसूली की रकम लाखों में इकट्ठा होती है, जिसका बंदरबांट किया जाता है। इस तरह से सामान्य कम कीमत प्लॉट के बैनामे में पांच हजार रुपये और 10 लाख से अधिक मालियत की भूमि के बैनामों में 10 से 20 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। खागा में बाबू के पकड़े जाने के बाद बाकी कार्यालयों में तैनात कर्मियों की धड़कनें बढ़ी हैं। वसूली के इस खेल से जुड़े कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
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एक माह में पकड़ा तीसरी बार धरपकड़
3 अगस्त 2026 हथगाम विकास खंड कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर हफीजुर्रहमान को एंटी करप्शन प्रयागराज की टीम ने बकाया भुगतान पास करने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
27 जुलाई 2026 शहर के डीआईओएस कार्यालय के सामने स्थित एक चाय की दुकान से स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के वरिष्ठ लेखा परीक्षक रविंद्र प्रताप सिंह को ऑडिट रिपोर्ट के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
अक्तूबर 2025 में खजुहा ब्लॉक में सीडीपीओ का कंप्यूटर ऑपरेटर रिश्वत लेते पकड़ा गया था। सीडीपीओ भाग निकली थीं।
अक्तूबर 2025 में एंटी करप्शन टीम ने फतेहपुर में विद्युत विभाग के उपखंड अधिकारी प्रेमचंद्र और उनके निजी मुंशी अतुल सिंह को आवासीय विद्युत कनेक्शन के बिल संशोधन के नाम पर 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था
17 जून 2025 को बिंदकी तहसील लेखपाल (सीताराम): एंटी करप्शन टीम ने नक्शा बनाने के एवज में 5,000 रुपये की घूस लेते गिरफ्तार किया था।
13 सदस्यीय टीम ने संभाली ट्रैप की कमान
भ्रष्टाचार निवारण संगठन प्रयागराज इकाई की ओर से राहुल को ट्रैप कार्रवाई के लिए 13 सदस्यीय टीम पहुंची। टीम में निरीक्षक रविंद्र सिंह, निरीक्षक अंजली यादव, निरीक्षक राकेश बहादुर सिंह, निरीक्षक अलाउद्दीन अंसारी, उपनिरीक्षक अर्जुन सिंह, हेड कांस्टेबल शशिकांत शर्मा, दीपक शुक्ला समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए आरक्षी सुनील यादव को भी टीम में शामिल किया गया।
टीम के जाते ही कार्यालय में मची खलबली
ट्रैप कार्रवाई के लिए भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम के कार्यालय पहुंचने और कार्रवाई के बाद वहां से रवाना होने पर कुछ समय तक कार्यालय में खलबली का माहौल रहा। टीम की कार्रवाई को लेकर कर्मचारी और कार्यालय में मौजूद लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। कार्रवाई के बाद कार्यालय में कामकाज प्रभावित नजर आया।
आरोप निराधार, मीटिंग में थीं
उप निबंधक अधिकारी उर्वरा शक्ति ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ट्रैप कार्रवाई के दौरान वह कार्यालय में मौजूद नहीं थीं, बल्कि फतेहपुर में विभागीय मीटिंग में शामिल होने गई थीं। उन्होंने कार्यालय में किसी तरह की अनियमितता या वसूली से अपने संबंध से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित किसान से उनकी कभी भी बातचीत ही नहीं हुई।

फोटो-41-राहुल कुमार बौद्ध। स्रोत

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