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Hamirpur: चकबंदी उप संचालक न्यायालय का पेशकार रिश्वत लेते गिरफ्तार, 25 हजार रुपये बरामद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 30 Apr 2026 05:55 PM IST
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सार
एंटीकरप्शन टीम बांदा ने चकबंदी उप संचालक न्यायालय के पेशकार को रंगेहाथों पकड़ा। शिकायतकर्ता के अनुसार नक्शा सुधार का मामला छह माह से अटका है।
आरोपी के हाथ धुलवाती एंटीकरप्शन टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चकबंदी विभाग में गोलमाल लंबे समय से चल रहा था। आरोप लग रहे थे कि किसानों का काम बगैर पैसा लिए नहीं किया जाता। बृहस्पतिवार को यह बात सही साबित हुई। बांदा से आई एंटीकरप्शन टीम ने न्यायालय उपसंचालक चकबंदी के पेशकार अल्ताफअली को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद टीम उसे स्थानीय कोतवाली ले गई, जहां पर आवश्यक कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से चकबंदी विभाग में हड़कंप मच गया।
हरियाणा प्रदेश के जिला फतेहाबाद के गांव विसला निवासी पूर्व फौजी धर्मवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने सरीला तहसील के कुपरा गांव जमीन खरीदी थी। जमीन के नक्शा दुरुस्ती का मामला न्यायालय उपसंचालक चकबंदी हमीरपुर में एक साल से चल रहा था। भूमि नक्शा दुरुस्तीकरण की फाइल को खारिज पर डालने की बात कही गई। बीते छह माह से उक्त मामले के लिए पेशकार अल्ताफ अली पैसे मांग रहा था। सबसे पहले डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई। इसके बाद मामला 25 हजार रुपये में तय हुआ।
कहा गया था कि 25 हजार रुपये लाओ काम हो जाएगा। पूर्व फौजी ने इसकी शिकायत तीन दिन पहले एंटी करप्शन टीम से की। इसी आधार पर करप्शन टीम बांदा के ट्रैप प्रभारी निरीक्षक मृत्युंजय कुमार मिश्र हमराहियों संग कलक्ट्रेट स्थित न्यायालय उपसंचालक चकबंदी के पास पहुंचे। यहां पर शिकायतकर्ता को कैमिकल युक्त पाउडर लगे पांच-पांच सौ के 25 हजार रुपये पेशकार को देने के लिए दिए गए। टीम के सदस्य इस दौरान किसान के भेष में आसपास खड़े रहे। शिकायकर्ता ने न्यायालय के अंदर जाकर पेशकार अल्ताफ अली को नोटों का बंडल दिया। बताया जा रहा है कि नोटों का बंडल लेकर उसने जैसे ही मेज की दराज में रखे, वहां मौजूद टीम ने उसे रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया।
करप्शन टीम ने तलाशी ली, इसके बाद आरोपी को कोतवाली ले गए, जहां पर कार्रवाई की गई। चकबंदी विभाग के अन्य पटलों पर जब इसकी जानकारी हुई तो हड़कंप मच गया। न्यायालय उप संचालक चंकबंदी प्रभारी रिजवाना शाहिद ने कहा कि मेरे किसी न्यायालय में कोई पैसा नहीं लिया जाता। यहां पर वकीलों के माध्यम से पैरवी होती है।
न्यायिक अधिकारी ने कई बार तारीखें नहीं दीं
शिकायतकर्ता धर्मवीर सिंह का कहना है कि कोई एक बाबू के वश की बात नहीं है। यहां पर बगैर न्यायिक अधिकारी के यह संभव नहीं था। नक्शा दुरस्ती कागज सरकार का होता है। इसे खारिज करने का प्रयास किया गया, लेकिन ऐसी कोई कमी नहीं मिली जिससे खारिज किया जा सके। कई बार तारीख न बताकर परेशान करना यह साबित करता है कि यहां पर सबकुछ ठीक नहीं है।
राष्ट्रपति से दो बार सम्मानित है शिकायतकर्ता
हरियाणा के धर्मवीर का कहना है कि वह सेना में रहे है और दो बार राष्टपति से पुरस्कार प्राप्त कर चुके है। यहां पर भ्रष्टाचार चरम पर है आम आदमी को इतना परेशान कर दिया जाता कि वह आगे नहीं बढ़ पाता। मुझे परेशान होते एक साल हो गया लेकिन मैने देश की सीमा पर सेवा की है पैसा देने वालों में नहीं था, लिहाजा इसकी शिकायत की। पेशकार पकड़े गए है लेकिन भ्रष्टाचार की जड़े बहुत गहरी हैं।
उमराहट के किसानों ने लगाया था आरोप
कुरारा ब्लाक के उमराहट गांव के किसानों ने दो दिन पूर्व ही चकंबदी विभाग के अधिकारियों पर पैसा लेकर दंबग किसानों को मनमाने तरीके से चकबंदी में चक देने का आरोप लगाया था। उक्त मामले में लिखित रूप से शिकायत की थी। छोटे किसानों को बेतवा के कछार में जमीन दे दी गई। इसके पहले जहां चकबंदी की जा रही है वहां से अधिकारियों के ऊपर पैसे लेकर चक देने के आरोप लगे है।
रिश्वत लेते 12 पहले भी पकड़े गए
भ्रष्टाचार के खिलाफ यूटा संगठन भी काम कर करता है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत शुक्ला ने बताया कि संगठन की ओर से पीड़ित पक्ष को शिकायत कराने में मदद की जाती है। वर्ष 2020 से जिले में 12 लोगों को एंटीकरप्शन टीम ने रंगेहाथों पकड़ा है। बेसिका शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी दीपक चंद्र, खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय राठ का बाबू मुन्ना बाबू, सरीला के पुत्तन बाबू, जलालपुर के दारोगा हरिश्चंद्र, कानून-गो राठ मनोज सिंह को पकड़ा गया। इसी तरह हमीरपुर के लेखपाल छत्रपाल, सुमेरपुर नगर पालिका के जेई रमेश गुप्ता, कानून-गो अशोक निगम, प्राचार्य वीएनएसडी रामप्रकाश, बदनपुर ग्राम सचिव शिवशंकर पाल, सीएमओ का बाबू पुष्पेंद्र सिंह, चकबंदी पेशकार प्रमोद कुमार।
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हरियाणा प्रदेश के जिला फतेहाबाद के गांव विसला निवासी पूर्व फौजी धर्मवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने सरीला तहसील के कुपरा गांव जमीन खरीदी थी। जमीन के नक्शा दुरुस्ती का मामला न्यायालय उपसंचालक चकबंदी हमीरपुर में एक साल से चल रहा था। भूमि नक्शा दुरुस्तीकरण की फाइल को खारिज पर डालने की बात कही गई। बीते छह माह से उक्त मामले के लिए पेशकार अल्ताफ अली पैसे मांग रहा था। सबसे पहले डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई। इसके बाद मामला 25 हजार रुपये में तय हुआ।
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कहा गया था कि 25 हजार रुपये लाओ काम हो जाएगा। पूर्व फौजी ने इसकी शिकायत तीन दिन पहले एंटी करप्शन टीम से की। इसी आधार पर करप्शन टीम बांदा के ट्रैप प्रभारी निरीक्षक मृत्युंजय कुमार मिश्र हमराहियों संग कलक्ट्रेट स्थित न्यायालय उपसंचालक चकबंदी के पास पहुंचे। यहां पर शिकायतकर्ता को कैमिकल युक्त पाउडर लगे पांच-पांच सौ के 25 हजार रुपये पेशकार को देने के लिए दिए गए। टीम के सदस्य इस दौरान किसान के भेष में आसपास खड़े रहे। शिकायकर्ता ने न्यायालय के अंदर जाकर पेशकार अल्ताफ अली को नोटों का बंडल दिया। बताया जा रहा है कि नोटों का बंडल लेकर उसने जैसे ही मेज की दराज में रखे, वहां मौजूद टीम ने उसे रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया।
करप्शन टीम ने तलाशी ली, इसके बाद आरोपी को कोतवाली ले गए, जहां पर कार्रवाई की गई। चकबंदी विभाग के अन्य पटलों पर जब इसकी जानकारी हुई तो हड़कंप मच गया। न्यायालय उप संचालक चंकबंदी प्रभारी रिजवाना शाहिद ने कहा कि मेरे किसी न्यायालय में कोई पैसा नहीं लिया जाता। यहां पर वकीलों के माध्यम से पैरवी होती है।
न्यायिक अधिकारी ने कई बार तारीखें नहीं दीं
शिकायतकर्ता धर्मवीर सिंह का कहना है कि कोई एक बाबू के वश की बात नहीं है। यहां पर बगैर न्यायिक अधिकारी के यह संभव नहीं था। नक्शा दुरस्ती कागज सरकार का होता है। इसे खारिज करने का प्रयास किया गया, लेकिन ऐसी कोई कमी नहीं मिली जिससे खारिज किया जा सके। कई बार तारीख न बताकर परेशान करना यह साबित करता है कि यहां पर सबकुछ ठीक नहीं है।
राष्ट्रपति से दो बार सम्मानित है शिकायतकर्ता
हरियाणा के धर्मवीर का कहना है कि वह सेना में रहे है और दो बार राष्टपति से पुरस्कार प्राप्त कर चुके है। यहां पर भ्रष्टाचार चरम पर है आम आदमी को इतना परेशान कर दिया जाता कि वह आगे नहीं बढ़ पाता। मुझे परेशान होते एक साल हो गया लेकिन मैने देश की सीमा पर सेवा की है पैसा देने वालों में नहीं था, लिहाजा इसकी शिकायत की। पेशकार पकड़े गए है लेकिन भ्रष्टाचार की जड़े बहुत गहरी हैं।
उमराहट के किसानों ने लगाया था आरोप
कुरारा ब्लाक के उमराहट गांव के किसानों ने दो दिन पूर्व ही चकंबदी विभाग के अधिकारियों पर पैसा लेकर दंबग किसानों को मनमाने तरीके से चकबंदी में चक देने का आरोप लगाया था। उक्त मामले में लिखित रूप से शिकायत की थी। छोटे किसानों को बेतवा के कछार में जमीन दे दी गई। इसके पहले जहां चकबंदी की जा रही है वहां से अधिकारियों के ऊपर पैसे लेकर चक देने के आरोप लगे है।
रिश्वत लेते 12 पहले भी पकड़े गए
भ्रष्टाचार के खिलाफ यूटा संगठन भी काम कर करता है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत शुक्ला ने बताया कि संगठन की ओर से पीड़ित पक्ष को शिकायत कराने में मदद की जाती है। वर्ष 2020 से जिले में 12 लोगों को एंटीकरप्शन टीम ने रंगेहाथों पकड़ा है। बेसिका शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी दीपक चंद्र, खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय राठ का बाबू मुन्ना बाबू, सरीला के पुत्तन बाबू, जलालपुर के दारोगा हरिश्चंद्र, कानून-गो राठ मनोज सिंह को पकड़ा गया। इसी तरह हमीरपुर के लेखपाल छत्रपाल, सुमेरपुर नगर पालिका के जेई रमेश गुप्ता, कानून-गो अशोक निगम, प्राचार्य वीएनएसडी रामप्रकाश, बदनपुर ग्राम सचिव शिवशंकर पाल, सीएमओ का बाबू पुष्पेंद्र सिंह, चकबंदी पेशकार प्रमोद कुमार।
