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Fatehpur News: गैरइरादतन हत्या के मामले में पिता व दो पुत्रों पर आरोप साबित
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फर्रुखाबाद। मोबाइल फोन के लेन-देन को लेकर हुई मारपीट में युवक की मौत के करीब 14 वर्ष पुराने मामले में अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश शैली रॉय ने पिता व दो पुत्रों को दोषी ठहराया। गैर इरादतन हत्या के मामले में अभियुक्तों की जमानत निरस्त करते हुए अभिरक्षा में लेने के आदेश दिए। सजा के बिंदु पर 31 जनवरी को सुनवाई की तारीख तय की।
थाना मेरापुर क्षेत्र के ग्राम पुनपालपुर निवासी श्रीकृष्ण ने पुलिस को दी गई सूचना में बताया था कि मोबाइल फोन के लेन-देन को लेकर पातीराम, उसके पुत्र अनूप कुमार उर्फ अमित कुमार और रोहिताश ने गाली-गलौज की। विरोध करने पर लात-घूंसों व डंडों से बेरहमी से मारपीट की। गंभीर रूप से घायल श्रीकृष्ण को पुलिस ने लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान तीसरे दिन 27 मई 2011 को उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने मामले में पहले एनसीआर दर्ज की थी। वादी श्रीकृष्ण की मृत्यु के बाद मामला गैरइरादतन हत्या के मामले में तरमीम कर विवेचना की गई। विवेचक ने अनूप कुमार उर्फ अमित कुमार और रोहिताश के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में अभियोजन के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने धारा 319 दंप्रसं के तहत 28 नवंबर 2018 को पातीराम को भी तलब किया। एक ही अपराध संख्या से संबंधित होने से एक साथ मामले सुने गए। न्यायालय ने उपलब्ध मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
गवाहों की गवाही पर भी अदालत सख्त
मुकदमे के दौरान अभियोजन की ओर से कुल नौ गवाहों को पेश किया गया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि कुछ प्रमुख गवाहों ने अपने पूर्व बयानों से पलटकर अभियोजन कथानक के विपरीत बयान दिए। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने गवाह व वादी के भाई रामकिशन, सुदामा और सुरबाला के विरुद्ध धारा 344 दंप्रसं के तहत झूठी गवाही देने के मामले में कार्रवाई करने के आदेश दिए।
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थाना मेरापुर क्षेत्र के ग्राम पुनपालपुर निवासी श्रीकृष्ण ने पुलिस को दी गई सूचना में बताया था कि मोबाइल फोन के लेन-देन को लेकर पातीराम, उसके पुत्र अनूप कुमार उर्फ अमित कुमार और रोहिताश ने गाली-गलौज की। विरोध करने पर लात-घूंसों व डंडों से बेरहमी से मारपीट की। गंभीर रूप से घायल श्रीकृष्ण को पुलिस ने लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान तीसरे दिन 27 मई 2011 को उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने मामले में पहले एनसीआर दर्ज की थी। वादी श्रीकृष्ण की मृत्यु के बाद मामला गैरइरादतन हत्या के मामले में तरमीम कर विवेचना की गई। विवेचक ने अनूप कुमार उर्फ अमित कुमार और रोहिताश के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में अभियोजन के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने धारा 319 दंप्रसं के तहत 28 नवंबर 2018 को पातीराम को भी तलब किया। एक ही अपराध संख्या से संबंधित होने से एक साथ मामले सुने गए। न्यायालय ने उपलब्ध मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
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गवाहों की गवाही पर भी अदालत सख्त
मुकदमे के दौरान अभियोजन की ओर से कुल नौ गवाहों को पेश किया गया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि कुछ प्रमुख गवाहों ने अपने पूर्व बयानों से पलटकर अभियोजन कथानक के विपरीत बयान दिए। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने गवाह व वादी के भाई रामकिशन, सुदामा और सुरबाला के विरुद्ध धारा 344 दंप्रसं के तहत झूठी गवाही देने के मामले में कार्रवाई करने के आदेश दिए।
