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Firozabad News: प्राचीन सर्वेश्वर हनुमान मंदिर की 103 बीघा भूमि पर कब्जे का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 17 Feb 2026 01:22 AM IST
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-प्रेसवार्ता कर मंदिर भूमि प्रकरण की जानकारी देते संरक्षक राजीव नारायण शर्मा। स्रोत संवाद
- फोटो : -प्रेसवार्ता कर मंदिर भूमि प्रकरण की जानकारी देते संरक्षक राजीव नारायण शर्मा। स्रोत संवाद
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शिकोहाबाद। नगर के प्राचीन सर्वेश्वर हनुमान मंदिर की अरबों रुपये की संपत्ति पर अवैध कब्जे और तोड़फोड़ का मामला गर्मा गया है। सोमवार देर शाम मंदिर परिसर में प्रेसवार्ता कर संपत्ति के संरक्षक राजीव नारायण शर्मा ने भू-माफिया पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इस प्रकरण की जांच के लिए जिलाधिकारी से दो सदस्यीय समिति गठित करने की मांग की है।
संरक्षक राजीव नारायण शर्मा ने दस्तावेज का हवाला देते हुए बताया कि मंदिर के नाम से करीब 103 बीघा भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इस भूमि पर वर्तमान में मंदिर, जैन धर्मशाला, कई दुकानें और स्टेट बैंक का परिसर स्थित है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़ी प्राचीन जैन धर्मशाला में अवैध रूप से तोड़फोड़ की जा रही है। राजीव नारायण ने संपत्ति का इतिहास बताते हुए कहा कि इसके असली मालिक स्व. शिवनारायण सारस्वत थे। 1959 में धर्मशाला का एक हिस्सा मुरारीलाल जैन को पट्टे पर दिया गया था। आरोप है कि मुरारीलाल जैन के प्रपौत्रों ने अब इस संपत्ति को तीसरे पक्ष को किराए पर दे दिया है और वर्ष 1995 से मंदिर को कोई किराया भी नहीं दिया गया। अब इस भूमि को अवैध रूप से बेचने और असली वारिसों पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
हनुमान चालीसा का पाठ कर लिया संकल्प
प्रेसवार्ता के दौरान शिवनारायण सारस्वत के परिवार से जुड़े मनीष सारस्वत ने स्पष्ट किया कि यह भूमि उनके पूर्वजों द्वारा मंदिर को दान की गई थी, जिसे कुछ लोग खुर्द-बुर्द करना चाहते हैं। इस दौरान मंदिर की रक्षा के लिए संघर्ष करने का संकल्प लेते हुए हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। संरक्षकों ने बताया कि 27 अक्तूबर 1959 को हुए पट्टे के अनुसार, कुछ भूमि मुरारीलाल जैन और शेष दुर्गविजय सिंह को दी गई थी। मुरारीलाल के पुत्र अशोक जैन के पास बाहरी हिस्से की दुकानों और स्टेट बैंक परिसर का किराया आता था। संरक्षकों ने पत्रकारों को वे अभिलेख भी दिखाए जिनमें भूमि स्पष्ट रूप से सर्वेश्वर हनुमान महाराज के नाम दर्ज है।
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संरक्षक राजीव नारायण शर्मा ने दस्तावेज का हवाला देते हुए बताया कि मंदिर के नाम से करीब 103 बीघा भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इस भूमि पर वर्तमान में मंदिर, जैन धर्मशाला, कई दुकानें और स्टेट बैंक का परिसर स्थित है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़ी प्राचीन जैन धर्मशाला में अवैध रूप से तोड़फोड़ की जा रही है। राजीव नारायण ने संपत्ति का इतिहास बताते हुए कहा कि इसके असली मालिक स्व. शिवनारायण सारस्वत थे। 1959 में धर्मशाला का एक हिस्सा मुरारीलाल जैन को पट्टे पर दिया गया था। आरोप है कि मुरारीलाल जैन के प्रपौत्रों ने अब इस संपत्ति को तीसरे पक्ष को किराए पर दे दिया है और वर्ष 1995 से मंदिर को कोई किराया भी नहीं दिया गया। अब इस भूमि को अवैध रूप से बेचने और असली वारिसों पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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हनुमान चालीसा का पाठ कर लिया संकल्प
प्रेसवार्ता के दौरान शिवनारायण सारस्वत के परिवार से जुड़े मनीष सारस्वत ने स्पष्ट किया कि यह भूमि उनके पूर्वजों द्वारा मंदिर को दान की गई थी, जिसे कुछ लोग खुर्द-बुर्द करना चाहते हैं। इस दौरान मंदिर की रक्षा के लिए संघर्ष करने का संकल्प लेते हुए हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। संरक्षकों ने बताया कि 27 अक्तूबर 1959 को हुए पट्टे के अनुसार, कुछ भूमि मुरारीलाल जैन और शेष दुर्गविजय सिंह को दी गई थी। मुरारीलाल के पुत्र अशोक जैन के पास बाहरी हिस्से की दुकानों और स्टेट बैंक परिसर का किराया आता था। संरक्षकों ने पत्रकारों को वे अभिलेख भी दिखाए जिनमें भूमि स्पष्ट रूप से सर्वेश्वर हनुमान महाराज के नाम दर्ज है।