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पड़ गए जान के लाले: न मुंह से अन्न का दाना उतरा और न पानी की बूंद, 24 घंटे तक तड़पी मासूम; कर बैठी थी ये गलती
Mon, 03 Aug 2026 08:06 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: Arun Parashar
Updated Mon, 03 Aug 2026 08:06 PM IST
सार
यूपी के फिरोजाबाद जिले में एक नाै साल की मासूम की गलती ने उसकी जान खतरे में डाल दी। हालात ये हो गए कि 24 घंटे तक मासूम तड़पती रही। सांस लेने तक में बच्ची को असहनीय दर्द होने लगा।
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बच्ची के गले में अटका सिक्का।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
एक छोटी सी लापरवाही और 24 घंटे तक सांस रोक देने वाला भयानक मंजर...। शहर के कोहिनूर रोड इलाके की नौ साल की मासूम बच्ची के गले में सिक्का अटक गया। न मुंह से अन्न का दाना उतरा और न पानी की एक बूंद। हर बीतते मिनट के साथ मासूम दर्द से तड़पती रही और बदहवास परिजन की सांसें अटकी रहीं। रविवार देर शाम आखिरकार स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टरों ने जोखिम भरे ऑपरेशन के जरिए गले से सिक्का निकाला।
कोहिनूर रोड निवासी आरिफ की नौ वर्षीया पुत्री इकरा खेल-खेल में सिक्का निगल बैठी। सिक्का सीधे जाकर उसकी भोजन नली के ऊपरी हिस्से में फंस गया। सिक्के के कारण बच्ची का गला अवरुद्ध हो गया, जिससे उसे थूक निगलने और सांस लेने तक में असहनीय दर्द होने लगा। परिजन स्थानीय स्तर पर अपने तरीकों से सिक्का निकालने का प्रयास करते रहे, लेकिन जब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी मासूम की तड़प कम नहीं हुई तो उनके हाथ-पांव फूल गए। रविवार शाम करीब छह बजे जब परिजन बच्ची को लेकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंचे, तो मासूम दर्द से बेहाल और निढाल हो चुकी थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ईएनटी (नाक, कान, गला) विभाग के डॉक्टर हरकत में आए। जांच में गले के अंदर सिक्का फंसे होने की पुष्टि होते ही ऑपरेशन थियेटर ले जाकर बच्ची को बेहोश कर दूरबीन तकनीक से सिक्का सुरक्षित निकाला।
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कोहिनूर रोड निवासी आरिफ की नौ वर्षीया पुत्री इकरा खेल-खेल में सिक्का निगल बैठी। सिक्का सीधे जाकर उसकी भोजन नली के ऊपरी हिस्से में फंस गया। सिक्के के कारण बच्ची का गला अवरुद्ध हो गया, जिससे उसे थूक निगलने और सांस लेने तक में असहनीय दर्द होने लगा। परिजन स्थानीय स्तर पर अपने तरीकों से सिक्का निकालने का प्रयास करते रहे, लेकिन जब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी मासूम की तड़प कम नहीं हुई तो उनके हाथ-पांव फूल गए। रविवार शाम करीब छह बजे जब परिजन बच्ची को लेकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंचे, तो मासूम दर्द से बेहाल और निढाल हो चुकी थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ईएनटी (नाक, कान, गला) विभाग के डॉक्टर हरकत में आए। जांच में गले के अंदर सिक्का फंसे होने की पुष्टि होते ही ऑपरेशन थियेटर ले जाकर बच्ची को बेहोश कर दूरबीन तकनीक से सिक्का सुरक्षित निकाला।
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इस सफल ऑपरेशन को ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार निषाद, डॉ. अनिल पांडेय और डॉ. श्रीश शर्मा तथा एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. रितु वर्मा, डॉ. शिवानी सिंह एवं डॉ. अनुभव की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। सिक्का बाहर निकलते ही मासूम की हालत स्थिर हो गई, जिसके बाद रोते-बिलखते परिजनों ने डॉक्टरों की टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।
प्राचार्य बोले डॉक्टरों की सजगता से बची जान
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योगेश कुमार गोयल ने सफल उपचार के लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि 24 घंटे तक गले में सिक्का फंसा रहना बेहद घातक हो सकता था। डॉक्टरों की त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतरीन तालमेल से मासूम को नया जीवन मिला है। इमरजेंसी में हर मरीज को तत्काल बेहतर इलाज देना हमारी पहली प्राथमिकता है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योगेश कुमार गोयल ने सफल उपचार के लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि 24 घंटे तक गले में सिक्का फंसा रहना बेहद घातक हो सकता था। डॉक्टरों की त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतरीन तालमेल से मासूम को नया जीवन मिला है। इमरजेंसी में हर मरीज को तत्काल बेहतर इलाज देना हमारी पहली प्राथमिकता है।
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