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UP: फर्जी लोन एप से देशभर में करोड़ों की ठगी, 800 से अधिक लोगों को बनाया निशाना; पांच आरोपी गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: अरुन पाराशर
Updated Mon, 02 Feb 2026 07:50 PM IST
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सार
गिरोह की ओर से पीड़ित के यूपीआई पर कुछ रुपये भेजकर उसे लोन का हिस्सा बताया जाता। फिर ऊंची ब्याज दरों पर वसूली शुरू होती। भुगतान न करने पर पीड़ित की तस्वीरों को एडिट (मॉर्फ) कर आपत्तिजनक बनाया जाता और उनके रिश्तेदारों को भेजकर बदनाम करने की धमकी दी जाती थी।
साइबर अपराधी।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
फर्जी लोन एप के जरिए देशभर के 800 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर साइबर क्राइम पुलिस व एसओजी टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह सरगना गुरुग्राम (हरियाणा) निवासी महेश है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। यह गिरोह फर्जी लोन एप के जरिए लोगों का डाटा चोरी कर उन्हें ब्लैकमेल करता था और अवैध सिम कार्डों की सप्लाई करता था। गिरोह से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद व सीओ साइबर चंचल त्यागी ने बताया कि राघव निवासी जहारवीर नगर, सिरसागंज (फिरोजाबाद), रजनीश निवासी कौरारा रोड बाईपास, सिरसागंज; सोनू निवासी जहारवीर नगर, सिरसागंज; नीलेश निवासी कुतुबपुर, नसीरपुर और पुष्पेंद्र निवासी नगला कन्ही, खैरगढ़ को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, 18 सिम कार्ड और एक थंब इंप्रेशन रीडिंग मशीन बरामद की है।
इस प्रकार करते थे ठगी
इंस्पेक्टर साइबर राजेश कुमार सिंह और एसओजी प्रभारी प्रेमशंकर पांडेय ने बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 'महान किट प्राइवेट लिमिटेड' नाम से एक फर्जी फर्म बनाई थी। इसके माध्यम से उन्होंने कई फर्जी लोन एप प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर पर डाले थे। जैसे ही कोई व्यक्ति इन एप को डाउनलोड करता, एप परमिशन के बहाने उसके मोबाइल का पूरा डाटा (कॉन्टेक्ट्स और गैलरी) एक्सेस कर लेता था। पीड़ित के यूपीआई पर कुछ रुपये भेजकर उसे लोन का हिस्सा बताया जाता और फिर ऊंची ब्याज दरों पर वसूली शुरू होती। भुगतान न करने पर पीड़ित की तस्वीरों को एडिट (मॉर्फ) कर आपत्तिजनक बनाया जाता और उनके रिश्तेदारों को भेजकर बदनाम करने की धमकी दी जाती थी। यह गिरोह अब तक करीब 800 लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना चुका है।
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एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद व सीओ साइबर चंचल त्यागी ने बताया कि राघव निवासी जहारवीर नगर, सिरसागंज (फिरोजाबाद), रजनीश निवासी कौरारा रोड बाईपास, सिरसागंज; सोनू निवासी जहारवीर नगर, सिरसागंज; नीलेश निवासी कुतुबपुर, नसीरपुर और पुष्पेंद्र निवासी नगला कन्ही, खैरगढ़ को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, 18 सिम कार्ड और एक थंब इंप्रेशन रीडिंग मशीन बरामद की है।
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इस प्रकार करते थे ठगी
इंस्पेक्टर साइबर राजेश कुमार सिंह और एसओजी प्रभारी प्रेमशंकर पांडेय ने बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 'महान किट प्राइवेट लिमिटेड' नाम से एक फर्जी फर्म बनाई थी। इसके माध्यम से उन्होंने कई फर्जी लोन एप प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर पर डाले थे। जैसे ही कोई व्यक्ति इन एप को डाउनलोड करता, एप परमिशन के बहाने उसके मोबाइल का पूरा डाटा (कॉन्टेक्ट्स और गैलरी) एक्सेस कर लेता था। पीड़ित के यूपीआई पर कुछ रुपये भेजकर उसे लोन का हिस्सा बताया जाता और फिर ऊंची ब्याज दरों पर वसूली शुरू होती। भुगतान न करने पर पीड़ित की तस्वीरों को एडिट (मॉर्फ) कर आपत्तिजनक बनाया जाता और उनके रिश्तेदारों को भेजकर बदनाम करने की धमकी दी जाती थी। यह गिरोह अब तक करीब 800 लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना चुका है।
अवैध सिम कार्ड का कारोबार
गिरोह के सदस्य मजदूरों और अशिक्षित लोगों को रुपयों का लालच देकर उनका आधार कार्ड ले लेते थे और उनसे अंगूठे लगवाकर उनके नाम पर सिम कार्ड एक्टिवेट करते थे। इन सिमों को संबंधित व्यक्ति को देने के बजाय महंगे दामों पर साइबर अपराधियों और रिकवरी एजेंटों को बेच दिया जाता था ताकि अपराध के समय उनकी पहचान छिपी रहे। पुलिस टीम ने भारत सरकार के 'प्रतिबिंब' पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर घेराबंदी कर इस गिरोह की गिरफ्तारी की है।
रजनीश के जरिये महेश ने खड़ा किया ठगी का नेटवर्क
रजनीश गुरुग्राम में नौकरी करने गया था। वहीं उसकी मुलाकात महेश से हुई। महेश के गिरोह से जुड़ने के बाद रजनीश ने ही अन्य युवाओं को इस गिरोह से जोड़ा था। सभी को ठगी की रकम में से बराबरी का हिस्सा मिलता था। बीएससी तक पढ़ाई करने वाले राघव और रजनीश का काम गिरोह के लिए अवैध सिम कार्ड जुटाने का था।
जनता से अपील है कि वे किसी भी अनजान लोन एप को डाउनलोड न करें और अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें। यदि इस प्रकार का कोई गिरोह सक्रिय दिखे तो जनता उसकी शिकायत पुलिस से करें। -सौरभ दीक्षित, एसएसपी
ये भी पढ़ें-UP: शब-ए-बारात को लेकर आगरा में डायवर्जन, इन मार्गों पर 16 घंटे तक नो एंट्री; ये रहेगी यातायात व्यवस्था
गिरोह के सदस्य मजदूरों और अशिक्षित लोगों को रुपयों का लालच देकर उनका आधार कार्ड ले लेते थे और उनसे अंगूठे लगवाकर उनके नाम पर सिम कार्ड एक्टिवेट करते थे। इन सिमों को संबंधित व्यक्ति को देने के बजाय महंगे दामों पर साइबर अपराधियों और रिकवरी एजेंटों को बेच दिया जाता था ताकि अपराध के समय उनकी पहचान छिपी रहे। पुलिस टीम ने भारत सरकार के 'प्रतिबिंब' पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर घेराबंदी कर इस गिरोह की गिरफ्तारी की है।
रजनीश के जरिये महेश ने खड़ा किया ठगी का नेटवर्क
रजनीश गुरुग्राम में नौकरी करने गया था। वहीं उसकी मुलाकात महेश से हुई। महेश के गिरोह से जुड़ने के बाद रजनीश ने ही अन्य युवाओं को इस गिरोह से जोड़ा था। सभी को ठगी की रकम में से बराबरी का हिस्सा मिलता था। बीएससी तक पढ़ाई करने वाले राघव और रजनीश का काम गिरोह के लिए अवैध सिम कार्ड जुटाने का था।
जनता से अपील है कि वे किसी भी अनजान लोन एप को डाउनलोड न करें और अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें। यदि इस प्रकार का कोई गिरोह सक्रिय दिखे तो जनता उसकी शिकायत पुलिस से करें। -सौरभ दीक्षित, एसएसपी
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