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UP: मोहन भागवत जिस ट्रेन में थे, उस पर किया पथराव, पुलिस ने खंगाले 50 से ज्यादा सीसीटीवी; दो नाबालिग पकड़े
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 12 Jun 2026 02:16 PM IST
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सार
शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन पर हुए पथराव के मामले में पुलिस ने दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है। यह घटना उस समय हुई जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत इस ट्रेन से यात्रा कर रहे थे।
पुलिस अधीक्षक फिरोजाबाद
- फोटो : ani
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विस्तार
लखनऊ से दिल्ली जा रही स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 12003) पर बृहस्पतिवार शाम करीब 7:16 बजे हुए पथराव के मामले में थाना रसूलपुर पुलिस ने शुक्रवार सुबह दो बाल अपचारियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए मुख्य अपचारी की उम्र 14 वर्ष निवासी सैलई, रामगढ़ और दूसरे की 12 वर्ष निवासी बंबा चौराहा, थाना उत्तर है। इनका तीसरा 12 वर्षीय साथी भागा हुआ है। पुलिस ने दोनों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में आगरा स्थित बाल आश्रय गृह भेज दिया गया।
एसएसपी आदित्य लांग्हे ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि जिला पुलिस, आरपीएफ और जीआरपी की 10 टीमों ने संयुक्त कार्रवाई कर देर रात ही घटना का अनावरण कर दिया। यह वारदात रेलवे ट्रैक किनारे कूड़ा बीन रहे तीन बच्चों ने अंजाम दी थी। मुख्य अपचारी का पुराना रिकॉर्ड भी खंगाला गया, उस पर पहले भी ट्रेन पर पथराव का एक मामला दर्ज है।
सीट नंबर 39 पर थे संघ प्रमुख, 54 का शीशा टूटा
इस घटना से रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मच गई थी, क्योंकि इसी ट्रेन के एग्जीक्यूटिव क्लास (ई-1 कोच) की सीट संख्या 39-40 पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत और पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी सवार थे। पथराव में ट्रेन के पिछले हिस्से (जनरेटर कार से ठीक पहले) लगे इसी ई-1 कोच की सीट संख्या 54 की खिड़की का कांच चकनाचूर हो गया। गनीमत यह रही कि संघ प्रमुख दूसरी तरफ की सीट पर बैठे होने के कारण पूरी तरह सुरक्षित रहे। सुरक्षा कारणों से ट्रेन को बीच में न रोककर सीधे टूंडला जंक्शन ले जाया गया था।
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आधी रात को पुलिस ने खटखटाए दरवाजे
शताब्दी एक्सप्रेस पर पत्थर लगने की शुरुआती खबर पर रेलवे कंट्रोल और स्थानीय पुलिस ने इसे आम शरारत माना था। लेकिन शाम 7:34 बजे जब ट्रेन टूंडला जंक्शन पहुंची और बोगी में संघ प्रमुख के होने की हकीकत खुली, तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। यह जानकारी सार्वजनिक होते ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एसटीएफ, डीजीपी मुख्यालय, आगरा जोन के एडीजी, रेंज डीआईजी और आरपीएफ कमांडेंट तुरंत सक्रिय हो गए। पूरे पेमेश्वर गेट इलाके को छावनी में बदल दिया गया।
वीवीआईपी सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण जिला पुलिस के पास गंवाने के लिए एक मिनट भी नहीं था। एसएसपी आदित्य लांग्हे के नेतृत्व में एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद, सीओ सिटी, सीओ टूंडला और रसूलपुर, दक्षिण, लाइनपार व रामगढ़ थाने की पुलिस फोर्स रात में ही मैदान में उतर गई। पेमेश्वर गेट और आसफाबाद रोड के आसपास सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ।
रेलवे ट्रैक के किनारे स्थित जिस भी घर, दुकान, फैक्टरी या स्कूल पर सीसीटीवी कैमरा लगा दिखा, पुलिस ने आधी रात को ही स्वामियों को जगाकर फुटेज खंगाले। 50 से अधिक कैमरे देखने के बाद रसूलपुर इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार की टीम को एक जिम का सीसीटीवी फुटेज मिला। इस 30 सेकंड के वीडियो में साफ दिख रहा है कि तीन बच्चे ट्रैक किनारे कूड़ा बीन रहे हैं। इनमें से एक के कंधे पर सफेद बोरा है। तेज रफ्तार शताब्दी एक्सप्रेस के गुजरते ही लाल टोपी पहने एक बच्चे ने नीचे झुककर भारी पत्थर उठाया और पूरी ताकत से बोगी पर दे मारा। इस फुटेज से बच्चों द्वारा घटना किए जाने का खुलासा होने पर अधिकारियों ने देर रात 12:15 बजे राहत की सांस ली।
पटरियों के पास रहने वाले 25 बच्चे बने पुलिस के खबरी
फिरोजाबाद। फुटेज में चेहरा साफ न होने के कारण लाल टोपी वाले पत्थरबाज को ढूंढना भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा था। इसके लिए दक्षिण थाना इंस्पेक्टर योगेंद्र पाल सिंह ने एक तरीका निकाला। उन्होंने अपनी टीम को भेजकर आधी रात करीब एक बजे रेलवे स्टेशन और पटरियों के आसपास भीख मांगने और कूड़ा बीनने वाले करीब 20 से 25 बच्चों को इकट्ठा किया।
मासूमों को जब मोबाइल पर वह 30 सेकंड का वीडियो दिखाया गया, तो उन्होंने तुरंत लाल टोपी और सफेद बोरे वाले लड़के को पहचान लिया और पुलिस को उसका नाम-पता बता दिया। इसी सुराग के दम पर सुबह 9:30 बजे घेराबंदी कर दो को पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पुलिस की भारी हलचल देखकर वे इतनी दहशत में आ गए थे कि घर नहीं गए और रात भर सड़कों पर छिपकर सोए। उनका तीसरा साथी शुक्रवार सुबह 9 बजे तक उनके साथ था, जो पुलिस के पहुंचने से कुछ समय पहले ही अलग हुआ था।
एसएसपी आदित्य लांग्हे ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि जिला पुलिस, आरपीएफ और जीआरपी की 10 टीमों ने संयुक्त कार्रवाई कर देर रात ही घटना का अनावरण कर दिया। यह वारदात रेलवे ट्रैक किनारे कूड़ा बीन रहे तीन बच्चों ने अंजाम दी थी। मुख्य अपचारी का पुराना रिकॉर्ड भी खंगाला गया, उस पर पहले भी ट्रेन पर पथराव का एक मामला दर्ज है।
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सीट नंबर 39 पर थे संघ प्रमुख, 54 का शीशा टूटा
इस घटना से रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मच गई थी, क्योंकि इसी ट्रेन के एग्जीक्यूटिव क्लास (ई-1 कोच) की सीट संख्या 39-40 पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत और पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी सवार थे। पथराव में ट्रेन के पिछले हिस्से (जनरेटर कार से ठीक पहले) लगे इसी ई-1 कोच की सीट संख्या 54 की खिड़की का कांच चकनाचूर हो गया। गनीमत यह रही कि संघ प्रमुख दूसरी तरफ की सीट पर बैठे होने के कारण पूरी तरह सुरक्षित रहे। सुरक्षा कारणों से ट्रेन को बीच में न रोककर सीधे टूंडला जंक्शन ले जाया गया था।
आधी रात को पुलिस ने खटखटाए दरवाजे
शताब्दी एक्सप्रेस पर पत्थर लगने की शुरुआती खबर पर रेलवे कंट्रोल और स्थानीय पुलिस ने इसे आम शरारत माना था। लेकिन शाम 7:34 बजे जब ट्रेन टूंडला जंक्शन पहुंची और बोगी में संघ प्रमुख के होने की हकीकत खुली, तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। यह जानकारी सार्वजनिक होते ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एसटीएफ, डीजीपी मुख्यालय, आगरा जोन के एडीजी, रेंज डीआईजी और आरपीएफ कमांडेंट तुरंत सक्रिय हो गए। पूरे पेमेश्वर गेट इलाके को छावनी में बदल दिया गया।
वीवीआईपी सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण जिला पुलिस के पास गंवाने के लिए एक मिनट भी नहीं था। एसएसपी आदित्य लांग्हे के नेतृत्व में एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद, सीओ सिटी, सीओ टूंडला और रसूलपुर, दक्षिण, लाइनपार व रामगढ़ थाने की पुलिस फोर्स रात में ही मैदान में उतर गई। पेमेश्वर गेट और आसफाबाद रोड के आसपास सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ।
रेलवे ट्रैक के किनारे स्थित जिस भी घर, दुकान, फैक्टरी या स्कूल पर सीसीटीवी कैमरा लगा दिखा, पुलिस ने आधी रात को ही स्वामियों को जगाकर फुटेज खंगाले। 50 से अधिक कैमरे देखने के बाद रसूलपुर इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार की टीम को एक जिम का सीसीटीवी फुटेज मिला। इस 30 सेकंड के वीडियो में साफ दिख रहा है कि तीन बच्चे ट्रैक किनारे कूड़ा बीन रहे हैं। इनमें से एक के कंधे पर सफेद बोरा है। तेज रफ्तार शताब्दी एक्सप्रेस के गुजरते ही लाल टोपी पहने एक बच्चे ने नीचे झुककर भारी पत्थर उठाया और पूरी ताकत से बोगी पर दे मारा। इस फुटेज से बच्चों द्वारा घटना किए जाने का खुलासा होने पर अधिकारियों ने देर रात 12:15 बजे राहत की सांस ली।
पटरियों के पास रहने वाले 25 बच्चे बने पुलिस के खबरी
फिरोजाबाद। फुटेज में चेहरा साफ न होने के कारण लाल टोपी वाले पत्थरबाज को ढूंढना भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा था। इसके लिए दक्षिण थाना इंस्पेक्टर योगेंद्र पाल सिंह ने एक तरीका निकाला। उन्होंने अपनी टीम को भेजकर आधी रात करीब एक बजे रेलवे स्टेशन और पटरियों के आसपास भीख मांगने और कूड़ा बीनने वाले करीब 20 से 25 बच्चों को इकट्ठा किया।
मासूमों को जब मोबाइल पर वह 30 सेकंड का वीडियो दिखाया गया, तो उन्होंने तुरंत लाल टोपी और सफेद बोरे वाले लड़के को पहचान लिया और पुलिस को उसका नाम-पता बता दिया। इसी सुराग के दम पर सुबह 9:30 बजे घेराबंदी कर दो को पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पुलिस की भारी हलचल देखकर वे इतनी दहशत में आ गए थे कि घर नहीं गए और रात भर सड़कों पर छिपकर सोए। उनका तीसरा साथी शुक्रवार सुबह 9 बजे तक उनके साथ था, जो पुलिस के पहुंचने से कुछ समय पहले ही अलग हुआ था।