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UP: बचपन छीनने की कोशिश कर दी नाकाम, 48 बेटियां बालिका वधु बनने से बचीं; देहात क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 16 Jun 2026 12:56 PM IST
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सार
फिरोजाबाद में पिछले पांच वर्षों के दौरान चाइल्ड लाइन, बाल संरक्षण विभाग और पुलिस की सक्रियता से 48 नाबालिग लड़कियों की शादियां रुकवाई गईं। सबसे अधिक मामले ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आए, जहां अशिक्षा और सामाजिक दबाव के कारण परिजन बेटियों का कम उम्र में विवाह कराने का प्रयास कर रहे थे।
बाल विवाह
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विस्तार
बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म करने के लिए सरकार और सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद समाज की सोच में अपेक्षित बदलाव नहीं आ रहा है। सुहागनगरी में आज भी नाबालिग बेटियों को मंडप में धकेलने की कोशिशें जारी हैं। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में ऐसी 48 नाबालिग बेटियां चाइल्ड लाइन और जिला बाल संरक्षण विभाग की मुस्तैदी से बालिका वधु बनने से बच गईं।
विभाग ने पुलिस की मदद से ऐन वक्त पर शादियां रुकवाकर इन बेटियों का भविष्य संवारा है। चौंकाने वाली बात यह है कि सबसे अधिक बाल विवाह देहात (ग्रामीण) क्षेत्रों में रोके गए, जहां परिजन खुद अपनी मर्जी, अशिक्षा और सामाजिक डर के चलते यह शादियां कराने को मजबूर थे।
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हर साल आ रही हैं दर्जनों सूचनाएं, जागरूकता कैंप भी जारी
जिला बाल संरक्षण अधिकारी अपर्णा कुलश्रेष्ठ ने बताया कि विभाग को हर साल दर्जनों बाल विवाह कराए जाने की गोपनीय सूचनाएं मिलती हैं, जिन पर टीम तत्काल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करती है। कई बार सूचनाएं गलत भी निकलती हैं, लेकिन विभाग हर इनपुट को गंभीरता से लेता है। ग्रामीण अंचलों में लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार कैंप भी लगाए जा रहे हैं, ताकि वे बेटियों को बोझ न समझकर उनकी पढ़ाई पर ध्यान दें।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी अपर्णा कुलश्रेष्ठ ने बताया कि विभाग को हर साल दर्जनों बाल विवाह कराए जाने की गोपनीय सूचनाएं मिलती हैं, जिन पर टीम तत्काल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करती है। कई बार सूचनाएं गलत भी निकलती हैं, लेकिन विभाग हर इनपुट को गंभीरता से लेता है। ग्रामीण अंचलों में लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार कैंप भी लगाए जा रहे हैं, ताकि वे बेटियों को बोझ न समझकर उनकी पढ़ाई पर ध्यान दें।
बाल विवाह कराने पर 2 साल की सजा और 1 लाख जुर्मानाबाल विवाह पूरी तरह से कानूनन अपराध है। इसके खिलाफ सरकार ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 लागू कर रखा है। इस कानून के तहत यदि कोई भी व्यक्ति नाबालिग (लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम) का विवाह कराता है या उसमें सहयोग करता है, तो उसे दो वर्ष की कठोर कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा भुगतनी पड़ सकती है। इसमें विवाह कराने वाले माता-पिता, रिश्तेदार और पंडित/काजी भी दोषी माने जाते हैं।
जिला प्रोबेशन अधिकारी मिथिलेश कुमार सिंह ने बताया कि जिले में बाल विवाह को रोकने और बेटियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रभावी ढंग से अभियान चलाया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में चाइल्ड लाइन, बाल संरक्षण विभाग और इलाका पुलिस के संयुक्त प्रयासों से 48 बेटियों को इस कुप्रथा का शिकार होने से बचाया गया है। हमारी टीमें लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित कर रही हैं।
बाल विवाह की सूचना इन नंबरों पर दें, गुप्त रहेगा नाम
यदि जिले में कहीं भी 18 वर्ष से कम उम्र की बेटी का बाल विवाह कराया जा रहा हो, तो सजग नागरिक इसकी सूचना तत्काल निम्नलिखित नंबरों पर दे सकते हैं। सूचना देने वाले का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।
पुलिस हेल्पलाइन: 112
चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन: 1098
यदि जिले में कहीं भी 18 वर्ष से कम उम्र की बेटी का बाल विवाह कराया जा रहा हो, तो सजग नागरिक इसकी सूचना तत्काल निम्नलिखित नंबरों पर दे सकते हैं। सूचना देने वाले का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।
पुलिस हेल्पलाइन: 112
चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन: 1098
वर्षवार आंकड़े: कब कितनी बेटियां बचाई गईं
| वर्ष | प्राप्त कुल सूचनाएं | सही पाई गईं (विवाह रुकवाए) | गलत पाई गईं सूचनाएं |
|---|
| 2021 | 18 | 07 | 11 |
| 2022 | 16 | 11 | 05 |
| 2023 | 22 | 09 | 13 |
| 2024 | 19 | 12 | 07 |
| 2025 | 13 | 09 | 04 |
| कुल योग | 88 | 48 | 40 |