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Gonda News: 21.47 करोड़ के घोटाले में बैंक का पूर्व शाखा प्रबंधक गिरफ्तार

संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 18 Jan 2026 11:28 PM IST
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Former bank branch manager arrested in Rs 21.47 crore scam
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गोंडा। उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की गोंडा शाखा में 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के घोटाले में रविवार को पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। घोटाले के मुख्य आरोपी व निलंबित चल रहे पूर्व शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल निवासी कृष्णानगर काॅलोनी, नाका जनौरा, अयोध्या को पुलिस ने मनकापुर बस अड्डे से गिरफ्तार किया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगाई गई है। 12 जनवरी को नगर कोतवाली में इस मामले में तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा कराए गए स्पेशल ऑडिट और आंतरिक जांच रिपोर्ट में यह घोटाला उजागर हुआ था। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल ने बैंक के कुछ कर्मचारियों और खाताधारकों के साथ मिलकर सिंडिकेट बनाकर आरबीआई और बैंक की नीतियों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से ऋण स्वीकृत और वितरित किए। स्पेशल ऑडिट के मुताबिक, अधिकांश मामलों में न तो ऋण लेने वालों की पात्रता की जांच की गई और न ही आय प्रमाणपत्र, जमानत मूल्यांकन रिपोर्ट व अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। कई ऋण फर्जी व कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्वीकृत कर दिए गए। शाखा स्तर पर बैंक नीति व आरबीआई के दिशा-निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
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जांच में यह भी सामने आया कि बैंक के पांच आंतरिक खातों से 46.13 लाख रुपये अवैध रूप से डेबिट कर विभिन्न खातों में ट्रांसफर किए गए और बाद में निकालकर गबन कर लिया गया। इसके साथ ही 205 खाताधारकों के ऋण व बचत खातों से 21.01 करोड़ रुपये की रकम अलग-अलग बैंकिंग चैनलों के जरिए घुमाकर दुरुपयोग की गई। इस तरह 21.47 करोड़ के गबन की बात सामने आई।
नगर कोतवाली के निरीक्षक अपराध एवं विवेचक सभाजीत सिंह ने बताया कि आरोपी व तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल को रविवार को गिरफ्तार किया गया है।

परिजन भी कार्रवाई की जद में
तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल की गिरफ्तारी के बाद अब उनके परिजन भी कार्रवाई की जद में हैं। दरअसल, ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पवन ने अपने, अपनी मां, पत्नी और पुत्र के खातों का भी गबन में इस्तेमाल किया। ऋण के नाम पर निकाली गई रकम को इनके खातों में भेजा गया।
सवालों में निगरानी सिस्टम
बैंक की गोंडा शाखा में यह गड़बड़ी दिसंबर 2021 से जून 2025 के बीच अलग-अलग चरणों में हुईं। इस दौरान तैनात रहे शाखा प्रबंधकों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। इस घोटाले ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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