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Gonda News: जिस कोबरा को बचाने निकले, उसी के डसने से गई रामलखन की जान
Sun, 28 Jun 2026 08:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 28 Jun 2026 08:50 PM IST
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गोंडा। करीब चार दशक तक जहरीले सांपों का रेस्क्यू कर लोगों की जान बचाने वाले सपेरे की जिंदगी आखिर उसी कोबरा के जहर से हार गई, जिसे वह पकड़ने गए थे। धानेपुर बाजार में रविवार सुबह कोबरा का रेस्क्यू करते समय सांप ने उनकी अंगुली में डस लिया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, कोबरा को सुरक्षित बोरे में बंद किया और उसे साथ लेकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंच गए। चिकित्सकों ने तत्काल एंटी स्नेक वेनम समेत आवश्यक उपचार शुरू किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
धानेपुर क्षेत्र के श्री बनकट निवासी रामलखन रविवार सुबह धानेपुर बाजार निवासी चिंटू यादव के घर में निकले कोबरा को पकड़ने पहुंचे थे। रेस्क्यू के दौरान जैसे ही उन्होंने सांप को बोरे में डालने का प्रयास किया, कोबरा ने उनकी अंगुली में डस लिया। इसके बावजूद उन्होंने सांप को सुरक्षित पकड़कर बोरे में बंद किया। इसके बाद चिंटू यादव और अन्य ग्रामीण उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे।
रामलखन अपने साथ बोरे में बंद कोबरा भी अस्पताल ले गए, जिसे देखकर इमरजेंसी में मौजूद लोग कुछ देर के लिए हैरान रह गए। भर्ती किए जाने के बाद चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन करीब चार घंटे बाद उनकी मौत हो गई।
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चिंटू यादव ने बताया कि रामलखन पिछले लगभग 40 वर्षों से क्षेत्र में सांप पकड़ने का काम कर रहे थे और अब तक सैकड़ों जहरीले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर चुके थे।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. पी.एस. भदौरिया ने बताया कि मरीज को भर्ती कर तत्काल एंटी स्नेक वेनम सहित आवश्यक उपचार दिया गया, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
चिंटू यादव के परिवार की सदस्य मधु यादव ने बताया कि रामलखन की मौत के बाद उनके परिजनों ने कोबरा को मार दिया। उन्होंने दावा किया कि इसका वीडियो भी उनके पास मौजूद है।
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धानेपुर क्षेत्र के श्री बनकट निवासी रामलखन रविवार सुबह धानेपुर बाजार निवासी चिंटू यादव के घर में निकले कोबरा को पकड़ने पहुंचे थे। रेस्क्यू के दौरान जैसे ही उन्होंने सांप को बोरे में डालने का प्रयास किया, कोबरा ने उनकी अंगुली में डस लिया। इसके बावजूद उन्होंने सांप को सुरक्षित पकड़कर बोरे में बंद किया। इसके बाद चिंटू यादव और अन्य ग्रामीण उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे।
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रामलखन अपने साथ बोरे में बंद कोबरा भी अस्पताल ले गए, जिसे देखकर इमरजेंसी में मौजूद लोग कुछ देर के लिए हैरान रह गए। भर्ती किए जाने के बाद चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन करीब चार घंटे बाद उनकी मौत हो गई।
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चिंटू यादव ने बताया कि रामलखन पिछले लगभग 40 वर्षों से क्षेत्र में सांप पकड़ने का काम कर रहे थे और अब तक सैकड़ों जहरीले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर चुके थे।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. पी.एस. भदौरिया ने बताया कि मरीज को भर्ती कर तत्काल एंटी स्नेक वेनम सहित आवश्यक उपचार दिया गया, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
चिंटू यादव के परिवार की सदस्य मधु यादव ने बताया कि रामलखन की मौत के बाद उनके परिजनों ने कोबरा को मार दिया। उन्होंने दावा किया कि इसका वीडियो भी उनके पास मौजूद है।