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Gonda News: कटान के दायरे में कई मकान

Mon, 03 Aug 2026 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 03 Aug 2026 11:41 PM IST
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Several houses at risk of erosion
दत्तनगर गांव में कटान की जद में आए आशियाने को उजाड़ते लोग व खेत में कटान करती नदी। संवाद
करनैलगंज/विश्नोहरपुर। सरयू नदी का जलस्तर भले ही खतरे के निशान से नीचे हो गया हो, लेकिन तटवर्ती गांवों में कटान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तरबगंज तहसील के माझा इलाके में दत्तनगर के बाड़ी माझा के कई मकान कटान की जद में आ गए हैं। ऐसे में ये परिवार पलायन की तैयारी में जुट गए हैं। ग्रामीण अपने छप्पर हटाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। क्षेत्र के किसानों की उपजाऊ जमीन और फसलें लगातार नदी में समा रही हैं। बाड़ी माझा में सोमवार को फूलचंद, संजय समेत कई ग्रामीण अपने छप्पर हटाते नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि नदी उनके घरों के बिल्कुल करीब पहुंच गई है और मकान कभी भी चपेट में मकान आ सकते हैं।
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दिनेश, फतेहबहादुर, सती चंद, सुरेश आदि ग्रामीणों के परिवार पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर चुके हैं। ग्रामीण पवन कुमार, रामू और भलरू ने बताया कि हर वर्ष बरसात के दौरान उन्हें इसी त्रासदी का सामना करना पड़ता है। कटान के कारण खेती और आवास पर संकट खड़ा हो जाता है। माझाराठ क्षेत्र में कटान से रमेश, रामबक्श, वासुदेव और श्याम बाबू की करीब 40 बीघा गन्ने की फसल नदी में समा चुकी है। दुर्गागंज माझा में भी सरयू नदी खेतों और परती भूमि को लगातार काट रही है। कई मजरों के मुहाने तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कटान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।
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केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर सरयू नदी का जलस्तर 105.960 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.070 मीटर से 11 सेंटीमीटर नीचे है। गिरिजा बैराज से 1,37,234 क्यूसेक, शारदा से 1,09,035 क्यूसेक और सरयू बैराज से 5,407 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया है। इस तरह कुल 2,51,676 क्यूसेक पानी नदी में आ रहा है।
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अयोध्या में नदी का जलस्तर 92.360 मीटर दर्ज किया गया, जहां जलस्तर बढ़ने का रुख बना हुआ है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज कुमार आर्य ने बताया कि बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी में कमी आने के कारण सरयू का जलस्तर घटा है, लेकिन जलस्तर घटने के साथ नदी का बहाव मैदानी क्षेत्रों में कटान और तेज कर देता है। इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

दत्तनगर गांव में कटान की जद में आए आशियाने को उजाड़ते लोग व खेत में कटान करती नदी। संवाद

दत्तनगर गांव में कटान की जद में आए आशियाने को उजाड़ते लोग व खेत में कटान करती नदी। संवाद

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