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Hamirpur News: डेढ़ किमी कच्चे रास्ते से बचने के लिए 22 किमी का चक्कर
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फोटो12एचएएमपी 28- रास्ते में भरा पानी व कीचड़। संवाद
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हमीरपुर। चंदूपुर ग्राम पंचायत के मजरा समेत 10 गांवों के बच्चों और ग्रामीणों की परेशानी का कारण महज डेढ़ किलोमीटर का कच्चा रास्ता है। यह मार्ग बरसात में कीचड़ से पूरी तरह बदहाल हो जाता है। ऐसे में स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों के सामने 22 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाने या घर बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। कई बार बच्चे कीचड़ में फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं।
हमीरपुर से चंदूपुर की दूरी महज पांच किलोमीटर है। चंदूपुर ग्राम पंचायत के मजरा गुसाईंबाबा का डेरा, पचुआ का डेरा, बच्ची का डेरा, चिनकू का डेरा और भिखुआ का डेरा के अलावा नगर पालिका परिषद हमीरपुर क्षेत्र में आने वाले वनवासी का डेरा और ब्रह्मा का डेरा की दूरी दो से तीन किलोमीटर के बीच है। इसके अलावा सिकरौढ़ी, जलाला समेत अन्य गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग हमीरपुर आते-जाते हैं। इन गांवों से करीब 170 बच्चे हमीरपुर के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने आते हैं।
ग्रामीणों के लिए भी हमीरपुर ही बाजार और अन्य जरूरी कामों का प्रमुख केंद्र है लेकिन डेढ़ किलोमीटर का कच्चा रास्ता सभी के लिए बड़ी बाधा बना हुआ है। चंदूपुर समेत आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर विद्यार्थियों की पढ़ाई बरसात के मौसम में बाधित नहीं होगी। ग्रामीण लंबे समय से मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी से लेकर अब तक डेढ़ किलोमीटर कच्चे मार्ग को कोई भी सरकार, कोई अफसर पक्का नहीं करा पाया। बच्चों को कच्ची सड़क की वजह से स्कूल जाने में परेशानी होती है।
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बरसात में रास्ते में कीचड़ हो जाता
चंदूपुर गांव निवासी 12वीं के छात्र दीनदयाल का कहना है कि गांव से हमीरपुर की दूरी पांच से छह किमी है। बरसात में रास्ते में कीचड़ हो जाता है इसलिए स्कूल जाना बंद करना पड़ता है। दूसरा जो रास्ता है वह तकरीबन 22 किमी लंबा है। ऐसे में समय के साथ पैसा भी अधिक खर्च होगा।
12वीं के छात्र विकास का कहना है कि बरसात के दिनों में तो परेशानी होती ही है। अन्य दिनों में धूल की वजह से कई बार साइकिल चलाना मुश्किल हो जाता है। कच्ची सड़क का एक ही समाधान है पक्की हो जाए। आज अधिकारी आए हैं अब देखना है क्या करते हैं। दूसरा रास्ता 20 से 22 किमी लंबा है।
बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
भिखुआ डेरा निवासी सुदामा, रामकली और पचुआ का डेरा निवासी बिजरानी का कहना है कि सामान्य दिनों में किसी तरह इस कच्चे रास्ते से आवागमन हो जाता है लेकिन बरसात शुरू होते ही रास्ते पर कीचड़ भर जाता है। पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होती है। स्कूल जाने के लिए उन्हें या तो जोखिम उठाकर कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है या फिर करीब 22 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। मेरे बच्चे कई बार फिसल गए और उनका बस्ता और किताबें गीली हो गई।
सड़क बने तो खत्म हो जाएगी समस्या
गंगवा का डेरा निवासी ममता, भिखुआ का डेरा निवासी मलखान का कहना है कि कच्ची सड़क को देखते हुए बुढ़ापा आ गया लेकिन सड़क पक्की नहीं हो पाई। डेढ़ किलोमीटर कच्चे मार्ग का निर्माण हो जाए तो चंदूपुर समेत आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर विद्यार्थियों की पढ़ाई बरसात के मौसम में बाधित नहीं होगी।
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हमीरपुर से चंदूपुर की दूरी महज पांच किलोमीटर है। चंदूपुर ग्राम पंचायत के मजरा गुसाईंबाबा का डेरा, पचुआ का डेरा, बच्ची का डेरा, चिनकू का डेरा और भिखुआ का डेरा के अलावा नगर पालिका परिषद हमीरपुर क्षेत्र में आने वाले वनवासी का डेरा और ब्रह्मा का डेरा की दूरी दो से तीन किलोमीटर के बीच है। इसके अलावा सिकरौढ़ी, जलाला समेत अन्य गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग हमीरपुर आते-जाते हैं। इन गांवों से करीब 170 बच्चे हमीरपुर के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने आते हैं।
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ग्रामीणों के लिए भी हमीरपुर ही बाजार और अन्य जरूरी कामों का प्रमुख केंद्र है लेकिन डेढ़ किलोमीटर का कच्चा रास्ता सभी के लिए बड़ी बाधा बना हुआ है। चंदूपुर समेत आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर विद्यार्थियों की पढ़ाई बरसात के मौसम में बाधित नहीं होगी। ग्रामीण लंबे समय से मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी से लेकर अब तक डेढ़ किलोमीटर कच्चे मार्ग को कोई भी सरकार, कोई अफसर पक्का नहीं करा पाया। बच्चों को कच्ची सड़क की वजह से स्कूल जाने में परेशानी होती है।
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बरसात में रास्ते में कीचड़ हो जाता
चंदूपुर गांव निवासी 12वीं के छात्र दीनदयाल का कहना है कि गांव से हमीरपुर की दूरी पांच से छह किमी है। बरसात में रास्ते में कीचड़ हो जाता है इसलिए स्कूल जाना बंद करना पड़ता है। दूसरा जो रास्ता है वह तकरीबन 22 किमी लंबा है। ऐसे में समय के साथ पैसा भी अधिक खर्च होगा।
12वीं के छात्र विकास का कहना है कि बरसात के दिनों में तो परेशानी होती ही है। अन्य दिनों में धूल की वजह से कई बार साइकिल चलाना मुश्किल हो जाता है। कच्ची सड़क का एक ही समाधान है पक्की हो जाए। आज अधिकारी आए हैं अब देखना है क्या करते हैं। दूसरा रास्ता 20 से 22 किमी लंबा है।
बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
भिखुआ डेरा निवासी सुदामा, रामकली और पचुआ का डेरा निवासी बिजरानी का कहना है कि सामान्य दिनों में किसी तरह इस कच्चे रास्ते से आवागमन हो जाता है लेकिन बरसात शुरू होते ही रास्ते पर कीचड़ भर जाता है। पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होती है। स्कूल जाने के लिए उन्हें या तो जोखिम उठाकर कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है या फिर करीब 22 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। मेरे बच्चे कई बार फिसल गए और उनका बस्ता और किताबें गीली हो गई।
सड़क बने तो खत्म हो जाएगी समस्या
गंगवा का डेरा निवासी ममता, भिखुआ का डेरा निवासी मलखान का कहना है कि कच्ची सड़क को देखते हुए बुढ़ापा आ गया लेकिन सड़क पक्की नहीं हो पाई। डेढ़ किलोमीटर कच्चे मार्ग का निर्माण हो जाए तो चंदूपुर समेत आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर विद्यार्थियों की पढ़ाई बरसात के मौसम में बाधित नहीं होगी।

फोटो12एचएएमपी 28- रास्ते में भरा पानी व कीचड़। संवाद

फोटो12एचएएमपी 28- रास्ते में भरा पानी व कीचड़। संवाद