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Hamirpur News: बच्चों की पुकार पर भरे सड़क के जख्म
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फोटो12एचएएमपी 19- कच्ची सड़क पर बजरा बिछाती जेसीबी मशीन। संवाद
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हमीरपुर। पक्की सड़क की मांग को लेकर मंगलवार को स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों का पांच घंटे का प्रदर्शन आखिरकार रंग लाया। बुधवार को अफसरों की टीम गांव पहुंची। जलभराव वाले हिस्सों में बजरा डलवाकर रास्ते को चलने लायक बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। अफसरों ने ग्रामीणों से संवाद भी किया। कहा कि शासन को कार्ययोजना भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही स्थायी काम कराया जाएगा।
चंदूपुर ग्राम पंचायत के मजरा गुसांईबाबा का डेरा, पचुआ का डेरा, बच्ची का डेरा, चिनकू का डेरा, भिखुआ का डेरा और नगर पालिका परिषद हमीरपुर में आने वाले वनवासी का डेरा व ब्रह्मा का डेरा के बाशिंदे करीब 1600 मीटर कच्चे रास्ते की दुश्वारियां झेल रहे हैं। बारिश में रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है जबकि गर्मी के मौसम में धूल उड़ती है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। बारिश के दिनों में पढ़ाई प्रभावित होती है। परेशान बच्चे और उनके अभिभावकों ने 40 दिन के अंदर दूसरी बार सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया।
मंगलवार को बच्चे अभिभावकों के साथ गांव से कलक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए अपनी पीड़ा को व्यक्त किया। कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी से मिलने के लिए पहुंचे तो बच्चों का रास्ता रोका गया। इस पर उनका आक्रोश फूट पड़ा और प्रदर्शन ने आंदोलन का रूप ले लिया। बच्चों की इस हुंकार ने प्रशासन को भी हरकत में ला दिया। बुधवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राकेश कुमार, एसडीएम अभिषेक कुमार, खान अधिकारी विकास परमार, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अरुण कुमार, बीएसए मुकेश खरवार समेत राजस्व विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
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अफसरों ने सड़क की स्थिति देखी और ग्रामीणों से बातचीत कर समस्या जानी। जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल बजरा डलवाया गया ताकि बच्चों और ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिल सके। अफसरों ने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि स्थायी समाधान की दिशा में भी कार्रवाई चल रही है। हालांकि इसके पहले भी तीन जुलाई को प्रदर्शन किया गया था जिसके बाद प्रशासन ने मिट्टी डलवाई थी लेकिन वह कारगर साबित नहीं हुई थी। इस बार बजरा का प्रयोग किया गया है।
अब शासन की मंजूरी का इंतजार
अधिकारियों ने बताया कि सड़क निर्माण में वन विभाग की ओर से आ रही अड़चन दूर हो गई है। विभाग ने एनओसी दे दी है। पक्की सड़क के लिए 1.81 करोड़ रुपये की कार्ययोजना शासन को भेजी गई है। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य कराया जाएगा। ग्रामीणों को शासन की मंजूरी मिलने तक इंतजार करना पड़ेगा।
अफसरों के सामने प्रधान को घेरा
बच्ची के डेरा के पास जब अधिकारी पहुंचे तो वहां ग्राम प्रधान शिवकुमार को भी बुलाया गया। ग्राम प्रधान से काम देखने के लिए कहा गया। इस पर बच्ची के डेरा की महिलाएं और पुरुष आक्रोशित हो गए। कहा कि जब कल बच्चे पैदल जा रहे थे तब प्रधान जी कहां थे। कहा कि यह अधिकारियों की हां में हां मिलाते हैं। यही वजह है कि यहां पर काम नहीं हो पाया। इन्हें अपनी जांच की चिंता रहती है। कहीं अधिकारी इनके कामों की जांच न करने आ जाएं। गांव के लोगों का दर्द नहीं समझा। हालांकि कुछ लोगों ने आक्रोशित लोगों को समझाया, तब जाकर वह शांत हुए।
मंगलवार को समस्या लेकर गांव के लोग बच्चों के साथ आए थे। उनकी मांग पर कच्ची सड़क पर बजरा डलवाया गया है। जहां और जरूरत होगी वहां रास्ता को चलने लायक बनाया जाएगा। ग्रामीणों को बताया है कि शासन को कार्ययोजना भेजी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। -राकेश कुमार, अपर जिलाधिकारी हमीरपुर
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चंदूपुर ग्राम पंचायत के मजरा गुसांईबाबा का डेरा, पचुआ का डेरा, बच्ची का डेरा, चिनकू का डेरा, भिखुआ का डेरा और नगर पालिका परिषद हमीरपुर में आने वाले वनवासी का डेरा व ब्रह्मा का डेरा के बाशिंदे करीब 1600 मीटर कच्चे रास्ते की दुश्वारियां झेल रहे हैं। बारिश में रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है जबकि गर्मी के मौसम में धूल उड़ती है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। बारिश के दिनों में पढ़ाई प्रभावित होती है। परेशान बच्चे और उनके अभिभावकों ने 40 दिन के अंदर दूसरी बार सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया।
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मंगलवार को बच्चे अभिभावकों के साथ गांव से कलक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए अपनी पीड़ा को व्यक्त किया। कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी से मिलने के लिए पहुंचे तो बच्चों का रास्ता रोका गया। इस पर उनका आक्रोश फूट पड़ा और प्रदर्शन ने आंदोलन का रूप ले लिया। बच्चों की इस हुंकार ने प्रशासन को भी हरकत में ला दिया। बुधवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राकेश कुमार, एसडीएम अभिषेक कुमार, खान अधिकारी विकास परमार, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अरुण कुमार, बीएसए मुकेश खरवार समेत राजस्व विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
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अफसरों ने सड़क की स्थिति देखी और ग्रामीणों से बातचीत कर समस्या जानी। जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल बजरा डलवाया गया ताकि बच्चों और ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिल सके। अफसरों ने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि स्थायी समाधान की दिशा में भी कार्रवाई चल रही है। हालांकि इसके पहले भी तीन जुलाई को प्रदर्शन किया गया था जिसके बाद प्रशासन ने मिट्टी डलवाई थी लेकिन वह कारगर साबित नहीं हुई थी। इस बार बजरा का प्रयोग किया गया है।
अब शासन की मंजूरी का इंतजार
अधिकारियों ने बताया कि सड़क निर्माण में वन विभाग की ओर से आ रही अड़चन दूर हो गई है। विभाग ने एनओसी दे दी है। पक्की सड़क के लिए 1.81 करोड़ रुपये की कार्ययोजना शासन को भेजी गई है। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य कराया जाएगा। ग्रामीणों को शासन की मंजूरी मिलने तक इंतजार करना पड़ेगा।
अफसरों के सामने प्रधान को घेरा
बच्ची के डेरा के पास जब अधिकारी पहुंचे तो वहां ग्राम प्रधान शिवकुमार को भी बुलाया गया। ग्राम प्रधान से काम देखने के लिए कहा गया। इस पर बच्ची के डेरा की महिलाएं और पुरुष आक्रोशित हो गए। कहा कि जब कल बच्चे पैदल जा रहे थे तब प्रधान जी कहां थे। कहा कि यह अधिकारियों की हां में हां मिलाते हैं। यही वजह है कि यहां पर काम नहीं हो पाया। इन्हें अपनी जांच की चिंता रहती है। कहीं अधिकारी इनके कामों की जांच न करने आ जाएं। गांव के लोगों का दर्द नहीं समझा। हालांकि कुछ लोगों ने आक्रोशित लोगों को समझाया, तब जाकर वह शांत हुए।
मंगलवार को समस्या लेकर गांव के लोग बच्चों के साथ आए थे। उनकी मांग पर कच्ची सड़क पर बजरा डलवाया गया है। जहां और जरूरत होगी वहां रास्ता को चलने लायक बनाया जाएगा। ग्रामीणों को बताया है कि शासन को कार्ययोजना भेजी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। -राकेश कुमार, अपर जिलाधिकारी हमीरपुर

फोटो12एचएएमपी 19- कच्ची सड़क पर बजरा बिछाती जेसीबी मशीन। संवाद