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Hamirpur News: डॉ. यशवर्धन सिंह ने यूपीएससी में पाई सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:12 AM IST
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फोटो 06 एचएएमपी 27- राठ के डॉ. यशवर्धन सिंह अपने पिता डॉ. सुरेंद्र सिंह के साथ। स्वयं
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राठ (हमीरपुर)। ब्रह्मानंद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह के बेटे डॉ. यशवर्धन सिंह का यूपीएससी में चयन हुआ है। उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 212 के साथ सफलता पाई है।
डॉ. यशवर्धन सिंह ने केजीएमयू लखनऊ से एमबीबीएस किया है। इससे पूर्व भी दो बार यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा 728 व 574 रैंक के साथ उत्तीर्ण कर चुके हैं। पहली सफलता एमबीबीएस की इंटर्नशिप के दौरान मिली थी। तभी से प्रत्येक बार सिविल सर्विस का प्री व मेंस क्वालीफाई करते आ रहे हैं। लगातार 4 बार सिविल सर्विस का इंटरव्यू दे चुके हैं। उन्होंने नीट परीक्षा 2017 ऑल इंडिया रैंक जनरल कैटेगरी 525, एम्स परीक्षा ऑल इंडिया रैंक 721 व जिपमर परीक्षा ऑल इंडिया रैंक 271 के साथ उत्तीर्ण की थी। उनके बाबा दिवंगत डॉ. हरगोविंद सिंह बुंदेली महाकवि व ब्रह्मानंद पीजी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष रहे हैं। डॉ. यशवर्धन सिंह ने कहा कि यह सफलता उनकी निरंतर मेहनत, धैर्य और समर्पण का परिणाम है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। परिजनों, मित्रों एवं क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
डॉ. यशवर्धन ने बताई संघर्ष की कहानी और दिया सफलता का मंत्र-
प्रश्न- आप की प्रारंभिक शिक्षा कहां हुई
उत्तर- राठ के क्राइस्ट कॉन्वेंट स्कूल से 2014 में हाईस्कूल की परीक्षा 95 प्रतिशत व 2016 में इंटर की परीक्षा 91.4 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की।
प्रश्न - एमबीबीएस की तैयारी कहां से की। पढ़ाई में कितना समय दिया
उत्तर - एक साल कोटा में रहकर एमबीबीएस के लिए तैयारी की। 2017 में नीट, एम्स व जिपमर में सफलता पाई। प्रतिदिन 10 घंटे की व्यवस्थित पढ़ाई की।
प्रश्न- एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ सिविल की तैयारी कैसे कर पाए
उत्तर- जब किसी काम की मन में लगन हो तो सब संभव हो जाता है। एमबीबीएस करते हुए समय निकालकर पढ़ाई करते रहे। मां, पिता, भाई व बहन के सहयोग से पढ़ाई में ज्यादा दिक्कत नहीं आई।
प्रश्न - आपकी सफलता में परिवार का सहयोग कैसा रहा
उत्तर- मेरे प्रत्येक निर्णय में परिजनों ने पूरा साथ दिया। मां किरन सिंह घर छोड़कर बराबर मेरे साथ रहीं। पिता डॉ सुरेंद्र सिंह ने हमेशा हौसला बढ़ाया। बड़े भाई बीटेक प्रतीक सिंह व बहन डॉ प्रज्ञा हर्ष लोधी ने पूरा सहयोग और समर्थन दिया।
प्रश्न- सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए संदेश
उत्तर- सिर्फ यह कहूंगा कि लक्ष्य निर्धारण कर किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता है। जिस भी क्षेत्र में मौका मिले अपना सबसे अच्छा प्रयास करें। जिस भी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों उसके बारे में पहले विस्तार से समझें। शिक्षकों के मार्गदर्शन में दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।
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डॉ. यशवर्धन सिंह ने केजीएमयू लखनऊ से एमबीबीएस किया है। इससे पूर्व भी दो बार यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा 728 व 574 रैंक के साथ उत्तीर्ण कर चुके हैं। पहली सफलता एमबीबीएस की इंटर्नशिप के दौरान मिली थी। तभी से प्रत्येक बार सिविल सर्विस का प्री व मेंस क्वालीफाई करते आ रहे हैं। लगातार 4 बार सिविल सर्विस का इंटरव्यू दे चुके हैं। उन्होंने नीट परीक्षा 2017 ऑल इंडिया रैंक जनरल कैटेगरी 525, एम्स परीक्षा ऑल इंडिया रैंक 721 व जिपमर परीक्षा ऑल इंडिया रैंक 271 के साथ उत्तीर्ण की थी। उनके बाबा दिवंगत डॉ. हरगोविंद सिंह बुंदेली महाकवि व ब्रह्मानंद पीजी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष रहे हैं। डॉ. यशवर्धन सिंह ने कहा कि यह सफलता उनकी निरंतर मेहनत, धैर्य और समर्पण का परिणाम है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। परिजनों, मित्रों एवं क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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डॉ. यशवर्धन ने बताई संघर्ष की कहानी और दिया सफलता का मंत्र-
प्रश्न- आप की प्रारंभिक शिक्षा कहां हुई
उत्तर- राठ के क्राइस्ट कॉन्वेंट स्कूल से 2014 में हाईस्कूल की परीक्षा 95 प्रतिशत व 2016 में इंटर की परीक्षा 91.4 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की।
प्रश्न - एमबीबीएस की तैयारी कहां से की। पढ़ाई में कितना समय दिया
उत्तर - एक साल कोटा में रहकर एमबीबीएस के लिए तैयारी की। 2017 में नीट, एम्स व जिपमर में सफलता पाई। प्रतिदिन 10 घंटे की व्यवस्थित पढ़ाई की।
प्रश्न- एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ सिविल की तैयारी कैसे कर पाए
उत्तर- जब किसी काम की मन में लगन हो तो सब संभव हो जाता है। एमबीबीएस करते हुए समय निकालकर पढ़ाई करते रहे। मां, पिता, भाई व बहन के सहयोग से पढ़ाई में ज्यादा दिक्कत नहीं आई।
प्रश्न - आपकी सफलता में परिवार का सहयोग कैसा रहा
उत्तर- मेरे प्रत्येक निर्णय में परिजनों ने पूरा साथ दिया। मां किरन सिंह घर छोड़कर बराबर मेरे साथ रहीं। पिता डॉ सुरेंद्र सिंह ने हमेशा हौसला बढ़ाया। बड़े भाई बीटेक प्रतीक सिंह व बहन डॉ प्रज्ञा हर्ष लोधी ने पूरा सहयोग और समर्थन दिया।
प्रश्न- सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए संदेश
उत्तर- सिर्फ यह कहूंगा कि लक्ष्य निर्धारण कर किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता है। जिस भी क्षेत्र में मौका मिले अपना सबसे अच्छा प्रयास करें। जिस भी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों उसके बारे में पहले विस्तार से समझें। शिक्षकों के मार्गदर्शन में दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।

फोटो 06 एचएएमपी 27- राठ के डॉ. यशवर्धन सिंह अपने पिता डॉ. सुरेंद्र सिंह के साथ। स्वयं
