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Hamirpur News: एनएच-34 पर डिवाइडर के बिना ओवरटेकिंग में उजड़ रहे परिवार
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फोटो 17 एचएएमपी 03- एनएच-34 पर भारी वाहनों के बीच चल रहा मिश्रित यातायात। संवाद
- फोटो : ट्रामा सेंटर में हंगामा के बाद बाहर विलाप करते परिजन। संवाद
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हमीरपुर। कानपुर-कबरई राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-34) पर आमने-सामने की टक्कर का खतरा बढ़ रहा है। करीब 10 मीटर चौड़ी दो लेन की सड़क पर दोनों दिशाओं का यातायात एक साथ चलता है। करीब 20 हजार वाहनों के दबाव वाले इस मार्ग पर 10 से 13 हजार भारी वाहन भी चलते हैं।
डंपर, ट्रेलर और ट्रकों के बीच कार, बस और छोटे वाहन भी दौड़ते हैं। ओवरटेक करने के दौरान कई बार वाहन विपरीत लेन में पहुंच जाते हैं और सामने से आ रहे वाहन से भिड़ जाते हैं। सवाल यह है कि बार-बार हो रहे हादसों के बीच संवेदनशील हिस्सों में यातायात को अलग करने वाला डिवाइडर कब बनेगा। कानपुर से कबरई तक करीब 123.6 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव सड़क सुरक्षा की बड़ी चुनौती बना है।
दो लेन की इस सड़क पर मिश्रित यातायात के कारण तेज और धीमे वाहनों के बीच गति का अंतर रहता है। सीधे हिस्सों में ओवरटेकिंग के दौरान यही अंतर आमने-सामने की भिड़ंत का खतरा बढ़ाता है। मौदहा के छिरका मोड़ पर करीब 20 दिन के भीतर 100 मीटर के दायरे में दो हादसों में आठ लोगों की मौत हुई। 27 अप्रैल को वैन-ट्रक की भिड़ंत में चार और 17 मई को श्रद्धालुओं की कार-ट्रक की टक्कर में चार लोगों की जान गई।
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अगस्त में कुंडौरा के पास रोडवेज बस और डीजल टैंकर की आमने-सामने भिड़ंत में तीन लोगों की मौत और कई यात्रियों के घायल होने से फिर सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठे। यह खतरा नया नहीं है। 22 जून 2022 को मकरांव में पिकअप और ऑटो की भिड़ंत में आठ लोगों की मौत हुई थी। जुलाई 2024 से फरवरी 2025 के बीच राठ तिराहा, भरुआ सुमेरपुर और छिरका में ट्रक-डंपर की आमने-सामने भिड़ंत के तीन हादसों में सात लोगों की जान चली गई थी।
नया हाईवे मंजूर, तब तक पुराने मार्ग की सुरक्षा चुनौती: कानपुर-कबरई के लिए नया ग्रीनफील्ड हाईवे मंजूर हो चुका है। इसके बनने से मौजूदा मार्ग पर यातायात का दबाव घटने की उम्मीद है लेकिन नया मार्ग तैयार होने में समय लगेगा। तब तक एनएच-34 पर भारी यातायात चलता रहेगा। इसलिए नए हाईवे का इंतजार करने के बजाय मौजूदा मार्ग के सबसे दुर्घटना संभावित हिस्सों में तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तर पर सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
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डंपर, ट्रेलर और ट्रकों के बीच कार, बस और छोटे वाहन भी दौड़ते हैं। ओवरटेक करने के दौरान कई बार वाहन विपरीत लेन में पहुंच जाते हैं और सामने से आ रहे वाहन से भिड़ जाते हैं। सवाल यह है कि बार-बार हो रहे हादसों के बीच संवेदनशील हिस्सों में यातायात को अलग करने वाला डिवाइडर कब बनेगा। कानपुर से कबरई तक करीब 123.6 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव सड़क सुरक्षा की बड़ी चुनौती बना है।
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दो लेन की इस सड़क पर मिश्रित यातायात के कारण तेज और धीमे वाहनों के बीच गति का अंतर रहता है। सीधे हिस्सों में ओवरटेकिंग के दौरान यही अंतर आमने-सामने की भिड़ंत का खतरा बढ़ाता है। मौदहा के छिरका मोड़ पर करीब 20 दिन के भीतर 100 मीटर के दायरे में दो हादसों में आठ लोगों की मौत हुई। 27 अप्रैल को वैन-ट्रक की भिड़ंत में चार और 17 मई को श्रद्धालुओं की कार-ट्रक की टक्कर में चार लोगों की जान गई।
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अगस्त में कुंडौरा के पास रोडवेज बस और डीजल टैंकर की आमने-सामने भिड़ंत में तीन लोगों की मौत और कई यात्रियों के घायल होने से फिर सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठे। यह खतरा नया नहीं है। 22 जून 2022 को मकरांव में पिकअप और ऑटो की भिड़ंत में आठ लोगों की मौत हुई थी। जुलाई 2024 से फरवरी 2025 के बीच राठ तिराहा, भरुआ सुमेरपुर और छिरका में ट्रक-डंपर की आमने-सामने भिड़ंत के तीन हादसों में सात लोगों की जान चली गई थी।
नया हाईवे मंजूर, तब तक पुराने मार्ग की सुरक्षा चुनौती: कानपुर-कबरई के लिए नया ग्रीनफील्ड हाईवे मंजूर हो चुका है। इसके बनने से मौजूदा मार्ग पर यातायात का दबाव घटने की उम्मीद है लेकिन नया मार्ग तैयार होने में समय लगेगा। तब तक एनएच-34 पर भारी यातायात चलता रहेगा। इसलिए नए हाईवे का इंतजार करने के बजाय मौजूदा मार्ग के सबसे दुर्घटना संभावित हिस्सों में तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तर पर सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।