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Hamirpur News: मौदहा बांध की होगी मरम्मत, तीन गेट खोले
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sat, 18 Apr 2026 12:47 AM IST
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गोहांड/ राठ (हमीरपुर)। स्वामी ब्रह्मानंद (मौदहा) बांध की सुरक्षा को लेकर एनडीएसए (नेशनल डैम सेफ्टी अथॉरिटी) के चौंकाने वाले खुलासे के बाद अब मरम्मत के लिए बांध को खाली किया जा रहा है। तीन फाटक खोलकर पानी निकाला जा रहा है। इसके बाद बांध के गेटों का मरम्मत कार्य कराया जाएगा।
विकासखंड गोहांड के सरसेड़ा गांव के पास विरमा नदी पर स्वामी ब्रह्मानंद (मौदहा) बांध बना है। इसका निर्माण कार्य वर्ष 1976-77 में शुरू हुआ और वर्ष 1999 में लोकार्पण हुआ था। बुंदेलखंड के किसानों की जीवन रेखा बना यह बांध 22 मीटर ऊंचा व 3.48 किलोमीटर लंबा है और इससे 22,637 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। राष्ट्रीय प्राधिकरण बांध सुरक्षा ने एक नोटिस जारी किया था। उसमें कहा गया था कि मौदहा बांध वर्ष 2004 से ही ड्रेनेज गैलरी में भारी रिसाव की समस्या से जुड़ा रहा है। विशेषज्ञ संस्थाओं की चेतावनी पर भी प्रभावी सुधार नहीं हुए।
एनडीएसए ने नोटिस में कहा है कि डैम सेफ्टी एक्ट 2021 की धारा 4 (एक्स) के तहत एक निर्दिष्ट बांध होने के बावजूद संचालन और रखरखाव अधिनियम के अनुरूप नहीं हो रहा है। इस नोटिस के द्वारा जन सुरक्षा व डाउनस्ट्रीम आबादी के लिए खतरे की आशंका व्यक्त की थी। प्राधिकरण ने 30 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार के इंजीनियर इन चीफ एवं विभागाध्यक्ष, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, लखनऊ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पूछा था कि बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 का पालन न करने और जनसुरक्षा को खतरे में डालने पर क्यों न धारा 41 और 42 के तहत कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय प्राधिकरण बांध सुरक्षा के सख्त रुख के बाद दो दिन पहले से मरम्मत कार्य के लिए बांध खाली किया जाने लगा है।
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खरीफ की सफल के लिए नहीं मिलेगा पानी
इस बांध से मौदहा, सुमेरपुर व मुस्करा ब्लाक में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। अभी बांध की मरम्मत के लिए उसे खाली किया जा रहा है। इस दौरान बांध में जल उपलब्धता शून्य रहेगी। जिससे इस वर्ष खरीफ की फसलों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाएगा। मरम्मत कार्य समय से पूरा होने पर मानसून में दोबारा बांध को भरा जाएगा। जिसके बाद किसानों को रवि की फसलों के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना प्रस्तावित है।
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विकासखंड गोहांड के सरसेड़ा गांव के पास विरमा नदी पर स्वामी ब्रह्मानंद (मौदहा) बांध बना है। इसका निर्माण कार्य वर्ष 1976-77 में शुरू हुआ और वर्ष 1999 में लोकार्पण हुआ था। बुंदेलखंड के किसानों की जीवन रेखा बना यह बांध 22 मीटर ऊंचा व 3.48 किलोमीटर लंबा है और इससे 22,637 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। राष्ट्रीय प्राधिकरण बांध सुरक्षा ने एक नोटिस जारी किया था। उसमें कहा गया था कि मौदहा बांध वर्ष 2004 से ही ड्रेनेज गैलरी में भारी रिसाव की समस्या से जुड़ा रहा है। विशेषज्ञ संस्थाओं की चेतावनी पर भी प्रभावी सुधार नहीं हुए।
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एनडीएसए ने नोटिस में कहा है कि डैम सेफ्टी एक्ट 2021 की धारा 4 (एक्स) के तहत एक निर्दिष्ट बांध होने के बावजूद संचालन और रखरखाव अधिनियम के अनुरूप नहीं हो रहा है। इस नोटिस के द्वारा जन सुरक्षा व डाउनस्ट्रीम आबादी के लिए खतरे की आशंका व्यक्त की थी। प्राधिकरण ने 30 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार के इंजीनियर इन चीफ एवं विभागाध्यक्ष, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, लखनऊ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पूछा था कि बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 का पालन न करने और जनसुरक्षा को खतरे में डालने पर क्यों न धारा 41 और 42 के तहत कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय प्राधिकरण बांध सुरक्षा के सख्त रुख के बाद दो दिन पहले से मरम्मत कार्य के लिए बांध खाली किया जाने लगा है।
खरीफ की सफल के लिए नहीं मिलेगा पानी
इस बांध से मौदहा, सुमेरपुर व मुस्करा ब्लाक में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। अभी बांध की मरम्मत के लिए उसे खाली किया जा रहा है। इस दौरान बांध में जल उपलब्धता शून्य रहेगी। जिससे इस वर्ष खरीफ की फसलों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाएगा। मरम्मत कार्य समय से पूरा होने पर मानसून में दोबारा बांध को भरा जाएगा। जिसके बाद किसानों को रवि की फसलों के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना प्रस्तावित है।

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