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Hamirpur News: दूध, पनीर, खोया, छेना में घालमेल, 95 नमूने जांच में फेल
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- गुझिया में इस्तेमाल में होने वाला खोया केमिकल युक्त पाउडर से तैयार होता
- ज्यादा मुनाफे के लिए 800 की जगह 200 रुपये किलो वाला सिंथेटिक रंग डालते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर (महोबा)। होली पर मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में खरीदारी करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। हमीरपुर में खाद्य विभाग ने 31 जनवरी तक दूध के कुल 24 नमूने लिए, इनमें 17 की जांच रिपोर्ट में 14 नमूने फेल निकले हैं। वहीं, महोबा में एक साल में विभाग की ओर से लिए गए 191 नमूनों में से 81 फेल हो गए।
पिछले वर्ष दीपावली पर बिके पनीर, खोया, दाल, छेना, दूध सहित अन्य खाद्य सामानों के खाद्य विभाग ने करीब 363 नमूने लिए थे। इनमें 98 नमूने जांच में अधोमानक मिले। इनमें मिलावट की गई थी। अब होली नजदीक है और खोया, पनीर व मसाले की मांग बढ़ेगी। जिले की मांग पूरी करने के लिए राठ, कानपुर, फतेहपुर और लखनऊ आदि मंडियों से खोया और पनीर मंगाया जाता है।
होली का पर्व चार मार्च को है। इस पर्व पर मिठाई की मांग ज्यादा होती है। इसके साथ ही गुझिया सबसे ज्यादा बनाई जाती है। कुछ जगहों पर तो डिब्बा बंद गुझिया बेची जाती है। ऐसे में उन्हें लेने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। यहां केमिकल युक्त पाउडर से मावा तैयार किया जाता है।
यह खोय गुझिया में इस्तेमाल होता है। इसके साथ ही इसमें सस्ता वनस्पति घी और रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल हो रहा है। यह शहर के तमाम जगहों पर बिक रहा है। जो सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसे में मिठाई खरीदते समय गुणवत्ता की जांच अवश्य कर लें। यही नहीं राठ, कानपुर और फतेहपुर से आ रहे मिलावटी खोया से भी मिठाई बनाई जा रही हैं। इस समय बाजार में मिलावटी मिठाई को खपाया जा रहा है।
मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत की परवाह नहीं करते। दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। जिले में मिलावटखोरी का धंधा नया नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से समय-समय पर इसके विरुद्ध अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मिलावटखोरी का यह धंधा जोरों से फल-फूल रहा है।
बाहर से आती हैं तैयार मिठाइयां
जिले में बाहर से डिब्बा बंद मिठाई आती है। इसकी खपत जिले में ज्यादा है। इसमें बर्फी, पेड़ा, पपड़ी, गुझिया, रसगुल्ला आदि शामिल है। यह मिठाई 200 से 250 रुपये किलो तक मिलती है। यहां आने के बाद इसका भाव 500 से 800 रुपये तक हो जाता है। इससे व्यापारियों को काफी फायदा होता है। इसमें उन्हें कारीगर नहीं रखने पड़ते हैं और खर्च बचता है।
नकली-असली पनीर की ऐसे करें पहचान
सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि के अनुसार, असली और नकली पनीर की पहचान हाथों से मसल कर लगा सकते हैं। अगर आपका पनीर मसलने के बाद टूटकर गिरने लगता है। ऐसी स्थिति में समझ जाइए कि पनीर नकली है। नकली पनीर की पहचान पानी में उबालकर भी कर सकते हैं। इसके लिए पनीर को पानी में उबालने के लिए रखना है। इसके बाद पनीर को पानी से निकालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने के बाद पनीर पर सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालकर 10 मिनट के लिए छोड़ देना है। ऐसा करने के बाद अगर पनीर का रंग हल्का लाल हो जाता है तो खरीदा गया पनीर डिटर्जेंट या यूरिया से बनाया गया है।
दूध में डिटर्जेंट की मिलावट : पांच से 10 मिली दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं। यदि अधिक और गाढ़ी झाग बने तो डिटर्जेंट की मिलावट की आशंका है जबकि शुद्ध दूध में हल्की झाग की पतली परत ही बनती है। खोया, पनीर और छेना में स्टार्च की मिलावट : सैंपल में थोड़ा पानी मिलाकर ठंडा करें और उसमें आयोडीन की 2-3 बूंद डालें। यदि नीला रंग उभर आए तो स्टार्च की मिलावट है। घी व मक्खन में उबले आलू या स्टार्च की मिलावट : आधा चम्मच घी या मक्खन में आयोडीन की बूंद डालने पर नीला रंग दिखाई दे तो यह आलू या अन्य स्टार्च की मिलावट का संकेत है।
मिलावटी मिठाई गुर्दा, यकृत, पेट के लिए घातक
मिठाई व पनीर में मिलावट सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसमें अगर केमिकल युक्त रंग मिला हुआ है तो वह सीधे यकृत पर असर डालता है। पेट के लिए भी इस तरह के केमिकल नुकसानदायक होते हैं। मिलावटी मिठाई गुर्दा, यकृत, पेट के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होती हैं। ऐसे में इसकी खरीदारी करते समय सतर्कता जरूर बरतें। -डॉ. आरएस प्रजापति, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल
वर्जन
लगातार अभियान चलाया जा रहा है। छेना, मिठाई, पनीर और खोवा का नमूना लेकर जांच को भेजे गए हैं। यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। लोग खाद्य पदार्थों की खरीदारी करते समय सावधानी बरतें। जान पहचान की दुकान से ही इसकी खरीदारी करें। राठ खोआ मंडी पर सोमवार को एक क्विंटल किलो खोआ बरामद हुआ था। इसे नष्ट कराया गया था। इस वजह से सतर्कता जरूरी है।-- डॉ. गौरीशंकर, सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन
वर्जन
अमानक खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोकथाम को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य पदार्थों की दुकानों में पहुंचकर जांच की जा रही है। खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। जांच में जो नमूने फेल हो रहे हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है। -मनोज कुमार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, महोबा।
फोटो 25 एचएएमपी 19- मिठाई की दुकान पर नमूना लेती खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम। संवाद
मिठाई दुकानों पर छापामारी, एक का नमूना भरा
सरीला (हमीरपुर)। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बुधवार को कस्बे में मिठाई एवं खाद्य पदार्थ बनाने वाली दुकानों पर छापामारी की। तहसीलदार राम मोहन कुशवाहा के नेतृत्व में कार्रवाई से कई दुकानदार दुकानें बंद कर मौके से चले गए। टीम ने मिठाई दुकानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की। इस दौरान एक दुकान से मिठाई का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। तहसीलदार राम मोहन कुशवाहा ने बताया कि त्योहार के मद्देनजर मिलावटखोरी पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। (संवाद)
महोबा। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पिछले एक साल में 191 खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा था। जहां से अभी तक 145 सैंपलों की ही जांच रिपोर्ट आई है। जिसमें 81 नमूने फेल मिले हैं। जिसमें दूध के 25 सैंपल में से 13 सैंपल फेल हो गए। खोया के आठ में से दो नमूने अमानक मिले हैं। मिठाई के 46 सैंपल लिए गए। जिसमें 10 फेल हुए हैं। मसाला के पांच में से एक सैंपल अमानक मिला है। सुपाड़ी पान मसाला के 14 में से 13 सैंपल फेल हुए हैं।
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- ज्यादा मुनाफे के लिए 800 की जगह 200 रुपये किलो वाला सिंथेटिक रंग डालते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर (महोबा)। होली पर मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में खरीदारी करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। हमीरपुर में खाद्य विभाग ने 31 जनवरी तक दूध के कुल 24 नमूने लिए, इनमें 17 की जांच रिपोर्ट में 14 नमूने फेल निकले हैं। वहीं, महोबा में एक साल में विभाग की ओर से लिए गए 191 नमूनों में से 81 फेल हो गए।
पिछले वर्ष दीपावली पर बिके पनीर, खोया, दाल, छेना, दूध सहित अन्य खाद्य सामानों के खाद्य विभाग ने करीब 363 नमूने लिए थे। इनमें 98 नमूने जांच में अधोमानक मिले। इनमें मिलावट की गई थी। अब होली नजदीक है और खोया, पनीर व मसाले की मांग बढ़ेगी। जिले की मांग पूरी करने के लिए राठ, कानपुर, फतेहपुर और लखनऊ आदि मंडियों से खोया और पनीर मंगाया जाता है।
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होली का पर्व चार मार्च को है। इस पर्व पर मिठाई की मांग ज्यादा होती है। इसके साथ ही गुझिया सबसे ज्यादा बनाई जाती है। कुछ जगहों पर तो डिब्बा बंद गुझिया बेची जाती है। ऐसे में उन्हें लेने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। यहां केमिकल युक्त पाउडर से मावा तैयार किया जाता है।
यह खोय गुझिया में इस्तेमाल होता है। इसके साथ ही इसमें सस्ता वनस्पति घी और रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल हो रहा है। यह शहर के तमाम जगहों पर बिक रहा है। जो सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसे में मिठाई खरीदते समय गुणवत्ता की जांच अवश्य कर लें। यही नहीं राठ, कानपुर और फतेहपुर से आ रहे मिलावटी खोया से भी मिठाई बनाई जा रही हैं। इस समय बाजार में मिलावटी मिठाई को खपाया जा रहा है।
मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत की परवाह नहीं करते। दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। जिले में मिलावटखोरी का धंधा नया नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से समय-समय पर इसके विरुद्ध अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मिलावटखोरी का यह धंधा जोरों से फल-फूल रहा है।
बाहर से आती हैं तैयार मिठाइयां
जिले में बाहर से डिब्बा बंद मिठाई आती है। इसकी खपत जिले में ज्यादा है। इसमें बर्फी, पेड़ा, पपड़ी, गुझिया, रसगुल्ला आदि शामिल है। यह मिठाई 200 से 250 रुपये किलो तक मिलती है। यहां आने के बाद इसका भाव 500 से 800 रुपये तक हो जाता है। इससे व्यापारियों को काफी फायदा होता है। इसमें उन्हें कारीगर नहीं रखने पड़ते हैं और खर्च बचता है।
नकली-असली पनीर की ऐसे करें पहचान
सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि के अनुसार, असली और नकली पनीर की पहचान हाथों से मसल कर लगा सकते हैं। अगर आपका पनीर मसलने के बाद टूटकर गिरने लगता है। ऐसी स्थिति में समझ जाइए कि पनीर नकली है। नकली पनीर की पहचान पानी में उबालकर भी कर सकते हैं। इसके लिए पनीर को पानी में उबालने के लिए रखना है। इसके बाद पनीर को पानी से निकालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने के बाद पनीर पर सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालकर 10 मिनट के लिए छोड़ देना है। ऐसा करने के बाद अगर पनीर का रंग हल्का लाल हो जाता है तो खरीदा गया पनीर डिटर्जेंट या यूरिया से बनाया गया है।
दूध में डिटर्जेंट की मिलावट : पांच से 10 मिली दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं। यदि अधिक और गाढ़ी झाग बने तो डिटर्जेंट की मिलावट की आशंका है जबकि शुद्ध दूध में हल्की झाग की पतली परत ही बनती है। खोया, पनीर और छेना में स्टार्च की मिलावट : सैंपल में थोड़ा पानी मिलाकर ठंडा करें और उसमें आयोडीन की 2-3 बूंद डालें। यदि नीला रंग उभर आए तो स्टार्च की मिलावट है। घी व मक्खन में उबले आलू या स्टार्च की मिलावट : आधा चम्मच घी या मक्खन में आयोडीन की बूंद डालने पर नीला रंग दिखाई दे तो यह आलू या अन्य स्टार्च की मिलावट का संकेत है।
मिलावटी मिठाई गुर्दा, यकृत, पेट के लिए घातक
मिठाई व पनीर में मिलावट सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसमें अगर केमिकल युक्त रंग मिला हुआ है तो वह सीधे यकृत पर असर डालता है। पेट के लिए भी इस तरह के केमिकल नुकसानदायक होते हैं। मिलावटी मिठाई गुर्दा, यकृत, पेट के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होती हैं। ऐसे में इसकी खरीदारी करते समय सतर्कता जरूर बरतें। -डॉ. आरएस प्रजापति, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल
वर्जन
लगातार अभियान चलाया जा रहा है। छेना, मिठाई, पनीर और खोवा का नमूना लेकर जांच को भेजे गए हैं। यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। लोग खाद्य पदार्थों की खरीदारी करते समय सावधानी बरतें। जान पहचान की दुकान से ही इसकी खरीदारी करें। राठ खोआ मंडी पर सोमवार को एक क्विंटल किलो खोआ बरामद हुआ था। इसे नष्ट कराया गया था। इस वजह से सतर्कता जरूरी है।
वर्जन
अमानक खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोकथाम को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य पदार्थों की दुकानों में पहुंचकर जांच की जा रही है। खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। जांच में जो नमूने फेल हो रहे हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है। -मनोज कुमार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, महोबा।
फोटो 25 एचएएमपी 19- मिठाई की दुकान पर नमूना लेती खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम। संवाद
मिठाई दुकानों पर छापामारी, एक का नमूना भरा
सरीला (हमीरपुर)। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बुधवार को कस्बे में मिठाई एवं खाद्य पदार्थ बनाने वाली दुकानों पर छापामारी की। तहसीलदार राम मोहन कुशवाहा के नेतृत्व में कार्रवाई से कई दुकानदार दुकानें बंद कर मौके से चले गए। टीम ने मिठाई दुकानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की। इस दौरान एक दुकान से मिठाई का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। तहसीलदार राम मोहन कुशवाहा ने बताया कि त्योहार के मद्देनजर मिलावटखोरी पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। (संवाद)
महोबा। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पिछले एक साल में 191 खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा था। जहां से अभी तक 145 सैंपलों की ही जांच रिपोर्ट आई है। जिसमें 81 नमूने फेल मिले हैं। जिसमें दूध के 25 सैंपल में से 13 सैंपल फेल हो गए। खोया के आठ में से दो नमूने अमानक मिले हैं। मिठाई के 46 सैंपल लिए गए। जिसमें 10 फेल हुए हैं। मसाला के पांच में से एक सैंपल अमानक मिला है। सुपाड़ी पान मसाला के 14 में से 13 सैंपल फेल हुए हैं।
