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Hamirpur News: चंदूपुर गांव में पक्की सड़क नहीं, ग्रामीणों का प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 13 Jan 2026 01:02 AM IST
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हमीरपुर। ब्लॉक कुरारा के चंदूपुर गांव में पक्की सड़क न होने से ग्रामीणों व स्कूली बच्चों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। सोमवार को ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट परिसर में एक घंटे प्रदर्शन किया इसके बाद अतिरिक्त एसडीएम गुलाम हैदर को ज्ञापन सौंपा और शीघ्र सड़क निर्माण की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि गांव बसा होने के बावजूद मूलभूत सुविधा जैसे सड़क नहीं मिल सकी। मांगें पूरी न होने पर लखनऊ कूच की चेतावनी दी। ग्रामीणों ने बताया कि 600 बच्चों की पढ़ाई व भविष्य प्रभावित हो रहा। सड़क न होने से बीमारों को इलाज में देरी और आपात स्थिति में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि सड़क निर्माण नहीं शुरू हुआ तो वह आंदोलन करेंगे।
बरसात में भर जाता है पानी
ग्रामीण अशोक निषाद ने कहा कि गांव से बच्चों के डेरा होते हुए सिटी फॉरेस्ट तक की सड़क वर्षों से कच्ची है। बरसात में मार्ग पर एक मीटर ऊंचाई तक पानी भर जाता है और मार्ग दलदली होने से आवागमन ठप हो जाता है। ऐसे में बच्चे स्कूल जाना बंद कर देते हैं।
बारिश के दिनों में बच्चे नहीं जाते स्कूल
स्कूली छात्रा प्रीति ने बताया कि हर साल बरसात के चार माह स्कूल जाना असंभव हो जाता है, उसके बाद धूल व गड्ढों से पैदल चलना कठिन हो जाता है। इससे स्वास्थ्य तो खराब हो ही रहा है, हम बच्चों का भविष्य भी इस मार्ग की वजह से चौपट हो रहा है।
ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की समस्या को पूरी संवेदना के साथ सुना गया है। सड़क निर्माण से जुड़ी शिकायत की जांच कराई जा रही है और समस्या के निस्तारण के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
गुलाम हैदर, डिप्टी कलक्टर
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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि गांव बसा होने के बावजूद मूलभूत सुविधा जैसे सड़क नहीं मिल सकी। मांगें पूरी न होने पर लखनऊ कूच की चेतावनी दी। ग्रामीणों ने बताया कि 600 बच्चों की पढ़ाई व भविष्य प्रभावित हो रहा। सड़क न होने से बीमारों को इलाज में देरी और आपात स्थिति में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि सड़क निर्माण नहीं शुरू हुआ तो वह आंदोलन करेंगे।
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बरसात में भर जाता है पानी
ग्रामीण अशोक निषाद ने कहा कि गांव से बच्चों के डेरा होते हुए सिटी फॉरेस्ट तक की सड़क वर्षों से कच्ची है। बरसात में मार्ग पर एक मीटर ऊंचाई तक पानी भर जाता है और मार्ग दलदली होने से आवागमन ठप हो जाता है। ऐसे में बच्चे स्कूल जाना बंद कर देते हैं।
बारिश के दिनों में बच्चे नहीं जाते स्कूल
स्कूली छात्रा प्रीति ने बताया कि हर साल बरसात के चार माह स्कूल जाना असंभव हो जाता है, उसके बाद धूल व गड्ढों से पैदल चलना कठिन हो जाता है। इससे स्वास्थ्य तो खराब हो ही रहा है, हम बच्चों का भविष्य भी इस मार्ग की वजह से चौपट हो रहा है।
ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की समस्या को पूरी संवेदना के साथ सुना गया है। सड़क निर्माण से जुड़ी शिकायत की जांच कराई जा रही है और समस्या के निस्तारण के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
गुलाम हैदर, डिप्टी कलक्टर