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Hamirpur News: सब रजिस्ट्रार दफ्तर में मृतक की जमीन का हो गया बैनामा
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हमीरपुर। राठ क्षेत्र में वर्ष 2025 में एक मृतक के नाम दर्ज जमीन खरीदी गई। सब रजिस्ट्रार दफ्तर में उसका बैनामा भी हो गया। मृत्यु के तीन साल बाद हुई इस रजिस्ट्री से राजस्व और पंजीकरण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। दस्तावेज के सत्यापन पर भी प्रश्नचिह्न लगा है।
राठ तहसील के गांव धनौरी खुर्द निवासी हरिहर सिंह की मृत्यु 14 जून 2022 को हुई थी। वह गांव से लखनऊ रहने लगे थे। गांव में तो वह कभी-कभार ही आते थे। उनके नाम गाटा संख्या 911 में जमीन दर्ज थी। हरिहर की मौत के बाद उनकी जमीन को विरासतन उनके आश्रित के नाम होनी चाहिए थी लेकिन यहां पर ऐसा नहीं हुआ। मौत के तीन साल बाद चार अप्रैल 2025 को हरिहर ने 0.535 हेक्टेयर रकबा सरीला तहसील क्षेत्र के पथखुरी गांव निवासी आकाश को बेचा गया।
मृतक के नाम के बकायदा बैनामा के कागजात तैयार हुए और जिम्मेदार अफसर ने रजिस्ट्री भी कर दी। मामला उजागर हुआ तो उसे दबाने का प्रयास किया गया। पहले शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। बात जब क्षेत्रीय विधायक मनीषा अनुरागी के संज्ञान में आई तो उन्होंने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। बताया जा रहा है कि जांच के आदेश तो दिए गए लेकिन जांच में क्या हुआ इसकी समीक्षा नहीं की गई। शायद यही वजह है कि सब रजिस्ट्रार अभी बेरोकटोक कार्य कर रहे हैं।
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एक बार फिर विधायक ने पूरे मामले में की जा रही जांच पर सवाल खड़े किए हैं। जांच आदेश के बाद अब तक क्या हुआ, इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन से मांगी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच किस रफ्तार से होती है।
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राठ तहसील के गांव धनौरी खुर्द निवासी हरिहर सिंह की मृत्यु 14 जून 2022 को हुई थी। वह गांव से लखनऊ रहने लगे थे। गांव में तो वह कभी-कभार ही आते थे। उनके नाम गाटा संख्या 911 में जमीन दर्ज थी। हरिहर की मौत के बाद उनकी जमीन को विरासतन उनके आश्रित के नाम होनी चाहिए थी लेकिन यहां पर ऐसा नहीं हुआ। मौत के तीन साल बाद चार अप्रैल 2025 को हरिहर ने 0.535 हेक्टेयर रकबा सरीला तहसील क्षेत्र के पथखुरी गांव निवासी आकाश को बेचा गया।
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मृतक के नाम के बकायदा बैनामा के कागजात तैयार हुए और जिम्मेदार अफसर ने रजिस्ट्री भी कर दी। मामला उजागर हुआ तो उसे दबाने का प्रयास किया गया। पहले शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। बात जब क्षेत्रीय विधायक मनीषा अनुरागी के संज्ञान में आई तो उन्होंने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। बताया जा रहा है कि जांच के आदेश तो दिए गए लेकिन जांच में क्या हुआ इसकी समीक्षा नहीं की गई। शायद यही वजह है कि सब रजिस्ट्रार अभी बेरोकटोक कार्य कर रहे हैं।
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एक बार फिर विधायक ने पूरे मामले में की जा रही जांच पर सवाल खड़े किए हैं। जांच आदेश के बाद अब तक क्या हुआ, इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन से मांगी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच किस रफ्तार से होती है।