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Hapur News: बीमा से बाहर हापुड़ की 99 फीसदी फसल, बेमौसम बारिश ने सरसों, आलू कर दिए बर्बाद
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गांव श्यामपुर ददायरा में खेत में बारिश में भीगी कटी पड़ी सरसों की फसल को देखते ग्रामीण। संवाद
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हापुड़। बेमौसम बारिश, पछुआ हवाओं ने जिले में सरसों, आलू और गेहूं की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। किसानों को हुए इस नुकसान की भरपाई होना मुश्किल है। इसकी वजह रबी के सीजन में 1.10 लाख किसानों में से महज 1380 ने फसल बीमा कराया है। सरसों की फसल पूरी तरह बीमा से बाहर है, किसानों को अब शासन, प्रशासन से उम्मीद है।
पिछले दो सप्ताह से रुक रुककर हो रही बरसात की वजह से आलू की खोदाई बीच में ही रुक गई है। जिन खेतों में अभी तक खोदाई नहीं हुई हैं वहां आलू में गलन फैलने की आशंका बढ़ गई है। सरसों की फसल भी पककर खेतों तैयार खड़ी है। कुछ खेतों में सरसों की फसल कटी पड़ी है। बरसात की वजह से कटी हुई फसल को भी नुकसान पहुंच रहा है। धूप खिलते ही फलियां फूटने लगी हैं। दाने की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। सरसों की फसल का किसी ने बीमा भी नहीं कराया है।
गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है, तेज हवाएं अभी भी जारी हैं। खेतों में नमी होने के कारण पौधा खड़ा नहीं हो पा रहा है। इससे गेहूं के उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहीं हैं। रबी सीजन में 1380 किसानों ने ही गेहूं की फसल का बीमा कराया है। इसमें महज 400 हेक्टेयर रकबा ही कवर किया गया है। यह फसल का महज एक फीसदी है। इसके अलावा बीमा कंपनियों की शर्तें भी इस तरह हैं जिससे नुकसान की भरपाई होना मुश्किल ही लग रहा है। आलू की फसल का बीमा तो पांच किसानों ने ही कराया है।
डेढ़ फीसदी प्रीमियम पर होता है फसल बीमा
गेहूं की बात करें तो एक हेक्टेयर की फसल का बीमा 1381.50 रुपये में होता है, इसमें 92100 रुपये तक का नुकसान कवर हो जाता है। कुल कवर राशि का डेढ़ फीसदी प्रीमियम किसानों से लिया जाता है। जिले में बीमा कंपनियों का कहना है कि जहां नुकसान 20 फीसदी से अधिक होता है, वहां बीमा का लाभ किसानों को दिया जाता है। इसके लिए किसानों को टोल फ्री नंबर 14447 पर संपर्क करना होगा।
तहसीलवार सर्वे कर दिलाएं मुआवजा
खेतों में सरसों, आलू, गेहूं की फसल को बेमौसम बरसात से भारी नुकसान हुआ है। जिला प्रशासन तहसीलवार सर्वे कराए, खेतों में कटी पड़ी सरसों की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान है। इसका आकलन कर, किसानों को मुआवजा दिलाया जाए, इस प्रकरण में डीएम से वार्ता करेंगे।-- पवन हूण, जिलाध्यक्ष भाकियू अराजनैतिक।
किसानों को जल्द मिले मुआवजा
किसानों को बीमा के चक्कर में न उलझाया जाए, बल्कि पूरे जिले में युद्धस्तर पर सर्वे कराकर किसानों को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई कराई जाए। बेमौसम बारिश ने आलू, सरसों, गेहूं को काफी नुकसान पहुंचाया है। यदि मुआवजा नहीं दिलाया तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।-- दिनेश खेड़ा, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत।
जिले में कराया जा रहा सर्वे
जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, वह टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के अंदर सूचना दें। विभाग की ओर से भी जिले में फसल क्षति का सर्वे कराया जा रहा है। बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान हो रहा है। -गौरव प्रकाश, जिला कृषि अधिकारी।
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पिछले दो सप्ताह से रुक रुककर हो रही बरसात की वजह से आलू की खोदाई बीच में ही रुक गई है। जिन खेतों में अभी तक खोदाई नहीं हुई हैं वहां आलू में गलन फैलने की आशंका बढ़ गई है। सरसों की फसल भी पककर खेतों तैयार खड़ी है। कुछ खेतों में सरसों की फसल कटी पड़ी है। बरसात की वजह से कटी हुई फसल को भी नुकसान पहुंच रहा है। धूप खिलते ही फलियां फूटने लगी हैं। दाने की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। सरसों की फसल का किसी ने बीमा भी नहीं कराया है।
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गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है, तेज हवाएं अभी भी जारी हैं। खेतों में नमी होने के कारण पौधा खड़ा नहीं हो पा रहा है। इससे गेहूं के उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहीं हैं। रबी सीजन में 1380 किसानों ने ही गेहूं की फसल का बीमा कराया है। इसमें महज 400 हेक्टेयर रकबा ही कवर किया गया है। यह फसल का महज एक फीसदी है। इसके अलावा बीमा कंपनियों की शर्तें भी इस तरह हैं जिससे नुकसान की भरपाई होना मुश्किल ही लग रहा है। आलू की फसल का बीमा तो पांच किसानों ने ही कराया है।
डेढ़ फीसदी प्रीमियम पर होता है फसल बीमा
गेहूं की बात करें तो एक हेक्टेयर की फसल का बीमा 1381.50 रुपये में होता है, इसमें 92100 रुपये तक का नुकसान कवर हो जाता है। कुल कवर राशि का डेढ़ फीसदी प्रीमियम किसानों से लिया जाता है। जिले में बीमा कंपनियों का कहना है कि जहां नुकसान 20 फीसदी से अधिक होता है, वहां बीमा का लाभ किसानों को दिया जाता है। इसके लिए किसानों को टोल फ्री नंबर 14447 पर संपर्क करना होगा।
तहसीलवार सर्वे कर दिलाएं मुआवजा
खेतों में सरसों, आलू, गेहूं की फसल को बेमौसम बरसात से भारी नुकसान हुआ है। जिला प्रशासन तहसीलवार सर्वे कराए, खेतों में कटी पड़ी सरसों की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान है। इसका आकलन कर, किसानों को मुआवजा दिलाया जाए, इस प्रकरण में डीएम से वार्ता करेंगे।
किसानों को जल्द मिले मुआवजा
किसानों को बीमा के चक्कर में न उलझाया जाए, बल्कि पूरे जिले में युद्धस्तर पर सर्वे कराकर किसानों को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई कराई जाए। बेमौसम बारिश ने आलू, सरसों, गेहूं को काफी नुकसान पहुंचाया है। यदि मुआवजा नहीं दिलाया तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
जिले में कराया जा रहा सर्वे
जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, वह टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के अंदर सूचना दें। विभाग की ओर से भी जिले में फसल क्षति का सर्वे कराया जा रहा है। बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान हो रहा है। -गौरव प्रकाश, जिला कृषि अधिकारी।

गांव श्यामपुर ददायरा में खेत में बारिश में भीगी कटी पड़ी सरसों की फसल को देखते ग्रामीण। संवाद