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Hapur News: महंगा उत्पादन, सस्ता बाजार... पावरलूम उद्योग पर दोहरी मार
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पिलखुवा में बनी चादर दिखाते व्यापारी। संवाद
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पिलखुवा। हैंडलूम नगरी पिलखुवा का पावरलूम उद्योग इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां मशीन तो लगातार चल रही हैं लेकिन कारोबारियों का मुनाफा लगातार सिमटता जा रहा है। बाजार में ऑर्डर की कमी नहीं है, फिर भी बढ़ती उत्पादन लागत ने उद्योग का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।
धागा, रंग, केमिकल, बिजली, मजदूरी, पैकिंग और ढुलाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि खरीदार पुराने भाव पर ही माल लेने की जिद पर अड़े हैं। ऐसे में सबसे अधिक संकट छोटे और मध्यम पावरलूम संचालकों के सामने खड़ा हो गया है।
उद्योग से संबंधित बाजार में सूती धागा इन दिनों 260 से 275 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बिक रहा है। कई बार पुराने भाव पर ऑर्डर स्वीकार करने पड़ते हैं, लेकिन माल तैयार होने तक लागत बढ़ जाती है। बढ़ती लागत और घटते लाभ के कारण कई छोटी इकाइयों ने उत्पादन सीमित कर दिया है। यदि यही स्थिति रही तो इसका असर रोजगार और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है।
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छोटे उद्यमियों पर सबसे ज्यादा असर
बाजार में मांग बनी हुई है, लेकिन खरीदार बढ़े हुए दाम देने को तैयार नहीं हैं। सबसे अधिक नुकसान छोटे उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है।
दिनेश गुप्ता,
धागा कारोबारी
..............
राहत नहीं मिली तो और बढ़ेगा संकट
बिजली दरों में राहत, सस्ता कार्यशील ऋण और नए बाजार समय की जरूरत हैं। समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो छोटी इकाइयों का संचालन मुश्किल हो जाएगा।
दीपक राबिया, कपड़ा कारोबारी
................
कारोबारियों की प्रमुख मांगें -
- बिजली दरों में राहत
- सस्ता कार्यशील ऋण
- धागे के दाम स्थिर हों
- नए बाजार उपलब्ध हों
- निर्यात को बढ़ावा मिले
- आधुनिकीकरण पर अनुदान
- विशेष औद्योगिक पैकेज-
..................
हैंडलूम नगरी एक नजर में
- 600 से अधिक हैंडलूम और पावरलूम इकाइयां।
- 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार।
- बेडशीट व होम फर्निशिंग उत्पाद तैयार होते हैं।
- धागा पानीपत, भिवंडी, सूरत व अहमदाबाद से आता है।
- तैयार माल देश और विदेश के बाजारों में भेजा जाता है।
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धागा, रंग, केमिकल, बिजली, मजदूरी, पैकिंग और ढुलाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि खरीदार पुराने भाव पर ही माल लेने की जिद पर अड़े हैं। ऐसे में सबसे अधिक संकट छोटे और मध्यम पावरलूम संचालकों के सामने खड़ा हो गया है।
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उद्योग से संबंधित बाजार में सूती धागा इन दिनों 260 से 275 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बिक रहा है। कई बार पुराने भाव पर ऑर्डर स्वीकार करने पड़ते हैं, लेकिन माल तैयार होने तक लागत बढ़ जाती है। बढ़ती लागत और घटते लाभ के कारण कई छोटी इकाइयों ने उत्पादन सीमित कर दिया है। यदि यही स्थिति रही तो इसका असर रोजगार और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है।
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छोटे उद्यमियों पर सबसे ज्यादा असर
बाजार में मांग बनी हुई है, लेकिन खरीदार बढ़े हुए दाम देने को तैयार नहीं हैं। सबसे अधिक नुकसान छोटे उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है।
दिनेश गुप्ता,
धागा कारोबारी
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राहत नहीं मिली तो और बढ़ेगा संकट
बिजली दरों में राहत, सस्ता कार्यशील ऋण और नए बाजार समय की जरूरत हैं। समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो छोटी इकाइयों का संचालन मुश्किल हो जाएगा।
दीपक राबिया, कपड़ा कारोबारी
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कारोबारियों की प्रमुख मांगें -
- बिजली दरों में राहत
- सस्ता कार्यशील ऋण
- धागे के दाम स्थिर हों
- नए बाजार उपलब्ध हों
- निर्यात को बढ़ावा मिले
- आधुनिकीकरण पर अनुदान
- विशेष औद्योगिक पैकेज-
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हैंडलूम नगरी एक नजर में
- 600 से अधिक हैंडलूम और पावरलूम इकाइयां।
- 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार।
- बेडशीट व होम फर्निशिंग उत्पाद तैयार होते हैं।
- धागा पानीपत, भिवंडी, सूरत व अहमदाबाद से आता है।
- तैयार माल देश और विदेश के बाजारों में भेजा जाता है।