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Hapur News: गंगा के बढ़ते जलस्तर से खादर में दहशत, चारे और दूध की आपूर्ति पर संकट
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गंगा का जलस्तर बढने के कारण हुए जलभराव से गुजरते ग्रामीण। संवाद
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने खादर क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार दोपहर जलस्तर 198.67 मीटर दर्ज किया गया जो चेतावनी के निशान 198.33 मीटर से 34 सेंटीमीटर ऊपर था। खादर के कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी पहुंचने से आवागमन के साथ पशुओं के चारे और ग्रामीणों के ईंधन का संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर और बढ़ा तो स्थिति बाढ़ जैसी हो सकती है।
उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ पश्चिमी यूपी में मैदानी क्षेत्र में बारिश होने के कारण गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जिससे ग्रामीणों की हजारों बीघा भूमि पर गंगा तट खड़ी गन्ने और धान की फसल भी बर्बाद हो चुकी है और गंगा में बह गई है। खादर क्षेत्र के गांवों में ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता पशुओं के चारे की है। गंगा का पानी खेतों और आसपास के रास्तों तक पहुंचने के कारण पशुओं को चराने के लिए सूखे जंगलों की ओर ले जाना पड़ रहा है। चारे की व्यवस्था प्रभावित होने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। इसका सीधा असर गांवों से शहर और आसपास के क्षेत्रों में आने वाली दूध की सप्लाई पर भी पड़ने की आशंका है।
वहीं, ग्रामीणों ने कहा कि दूषित पानी, कीचड़ और मच्छरों के बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीण प्रशासन से लगातार जलस्तर पर निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव की व्यवस्था पहले से तैयार रखने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार जलस्तर 198.67 मीटर है। जिसको लेकर प्रशासन सतर्क तो है, लेकिन ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
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बोले ग्रामीण
- गंगा का पानी लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्र के हजारों किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। गन्ना और धान की फसल को काफी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। आगे यदि जल और बढ़ता है तो समस्या अधिक होगी। - रामचंद्र, ग्रामीण काकाठेर
- पशुओं को चारा खिलाने के लिए अब सूखे जंगलों की तरफ जाना पड़ रहा है। रास्तों में पानी होने से रोजमर्रा का काम प्रभावित है। चारा महंगा हुआ तो पशुपालन करना भी मुश्किल हो जाएगा। - महेंद्र सिंह, ग्रामीण, चकलठीरा
-हमारे गांवों से आसपास के क्षेत्रों में दूध की सप्लाई जाती है। गंगा का पानी और बढ़ा तो पशुओं के चारे की समस्या के साथ दूध की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। - राजेश कुमार, ग्रामीण लठीरा
- अभी इसे बाढ़ नहीं कह सकते, लेकिन हालात चिंताजनक हैं। पानी लगातार बढ़ा तो बीमारी फैलने का डर है। प्रशासन को अभी से राहत चौकियों और दवाओं की व्यवस्था दुरुस्त रखनी चाहिए। - शीशपाल सिंह, काठाठेर की मढैया
- पिछले साल इन गांवों में पहुंचा था पानी
पिछले साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर भगवंतपुर, मुकीमपुर, शाकरपुर, कुदैनी की मढैया, रेते वाली मढैया, नयागांव, रामपुर न्यामतपुर, इनायतपुर, ब्रजघाट के गंगानगर, काकाठेर की मढैया, चक लठीरा, गड़ावली और नयाबांस में पानी पहुंच गया था। इसी वजह से इस बार जलस्तर बढ़ते ही ग्रामीणों में पुरानी बाढ़ की यादें ताजा हो गई हैं।
- इन स्थानों पर बनती हैं बाढ़ राहत चौकियां
उप जिलाधिकारी श्रीराम यादव ने बताया कि भगवंतपुर गुरुद्वारा, गढ़ में नक्का कुआं मंदिर के पास, राम मनोहर इंटर कॉलेज, मीरा रेती के चौक और ब्रजघाट में भागीरथी इंटर कॉलेज को बाढ़ राहत चौकियों के लिए चिह्नित किया जाता है।-- जलस्तर के प्रमुख निशान
गांवों में यदि पानी पहुंचता है तो उसके लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी हैं। किसी भी ग्रामीण को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। नाव के साथ-साथ अन्य राहत उपकरण तैयार हैं। वहीं, आपूर्ति विभाग, स्वास्थ्य विभाग और ब्लॉक व नगर पालिका ने भी तैयारी पूरी की हुई है।-- - श्रीराम यादव, एसडीएम
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उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ पश्चिमी यूपी में मैदानी क्षेत्र में बारिश होने के कारण गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जिससे ग्रामीणों की हजारों बीघा भूमि पर गंगा तट खड़ी गन्ने और धान की फसल भी बर्बाद हो चुकी है और गंगा में बह गई है। खादर क्षेत्र के गांवों में ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता पशुओं के चारे की है। गंगा का पानी खेतों और आसपास के रास्तों तक पहुंचने के कारण पशुओं को चराने के लिए सूखे जंगलों की ओर ले जाना पड़ रहा है। चारे की व्यवस्था प्रभावित होने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। इसका सीधा असर गांवों से शहर और आसपास के क्षेत्रों में आने वाली दूध की सप्लाई पर भी पड़ने की आशंका है।
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वहीं, ग्रामीणों ने कहा कि दूषित पानी, कीचड़ और मच्छरों के बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीण प्रशासन से लगातार जलस्तर पर निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव की व्यवस्था पहले से तैयार रखने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार जलस्तर 198.67 मीटर है। जिसको लेकर प्रशासन सतर्क तो है, लेकिन ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
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बोले ग्रामीण
- गंगा का पानी लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्र के हजारों किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। गन्ना और धान की फसल को काफी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। आगे यदि जल और बढ़ता है तो समस्या अधिक होगी। - रामचंद्र, ग्रामीण काकाठेर
- पशुओं को चारा खिलाने के लिए अब सूखे जंगलों की तरफ जाना पड़ रहा है। रास्तों में पानी होने से रोजमर्रा का काम प्रभावित है। चारा महंगा हुआ तो पशुपालन करना भी मुश्किल हो जाएगा। - महेंद्र सिंह, ग्रामीण, चकलठीरा
-हमारे गांवों से आसपास के क्षेत्रों में दूध की सप्लाई जाती है। गंगा का पानी और बढ़ा तो पशुओं के चारे की समस्या के साथ दूध की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। - राजेश कुमार, ग्रामीण लठीरा
- अभी इसे बाढ़ नहीं कह सकते, लेकिन हालात चिंताजनक हैं। पानी लगातार बढ़ा तो बीमारी फैलने का डर है। प्रशासन को अभी से राहत चौकियों और दवाओं की व्यवस्था दुरुस्त रखनी चाहिए। - शीशपाल सिंह, काठाठेर की मढैया
- पिछले साल इन गांवों में पहुंचा था पानी
पिछले साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर भगवंतपुर, मुकीमपुर, शाकरपुर, कुदैनी की मढैया, रेते वाली मढैया, नयागांव, रामपुर न्यामतपुर, इनायतपुर, ब्रजघाट के गंगानगर, काकाठेर की मढैया, चक लठीरा, गड़ावली और नयाबांस में पानी पहुंच गया था। इसी वजह से इस बार जलस्तर बढ़ते ही ग्रामीणों में पुरानी बाढ़ की यादें ताजा हो गई हैं।
- इन स्थानों पर बनती हैं बाढ़ राहत चौकियां
उप जिलाधिकारी श्रीराम यादव ने बताया कि भगवंतपुर गुरुद्वारा, गढ़ में नक्का कुआं मंदिर के पास, राम मनोहर इंटर कॉलेज, मीरा रेती के चौक और ब्रजघाट में भागीरथी इंटर कॉलेज को बाढ़ राहत चौकियों के लिए चिह्नित किया जाता है।
गांवों में यदि पानी पहुंचता है तो उसके लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी हैं। किसी भी ग्रामीण को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। नाव के साथ-साथ अन्य राहत उपकरण तैयार हैं। वहीं, आपूर्ति विभाग, स्वास्थ्य विभाग और ब्लॉक व नगर पालिका ने भी तैयारी पूरी की हुई है।