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Hapur News: श्रीकृष्ण ने किया कंस का वध, जयघोष से गूंजा क्षेत्र
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गंगानगरी के शीतल आश्रम श्रीमद्भागवत कथा सुनाते व्यास चेतन स्वरूप महाराज। संवाद
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ब्रजघाट। गंगानगरी के शीतल आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के छठे दिन व्यास चेतन स्वरूप महाराज ने कंस वध की कथा सुनाई। भगवान ने कंस का वध किया तो कथा स्थल और आसपास का क्षेत्र जय श्रीकृष्ण के घोष से गूंज उठा।
कहा कि आकाशवाणी से भयभीत कंस ने श्रीकृष्ण का वध करने के अनेकों प्रयास किए लेकिन एक भी प्रयास सफल नहीं हो सका। वहीं, भगवान ने कंस के कई मुख्य राक्षसों को परलोक धाम भेज दिया। जिसके बाद कंस ने कृष्ण-बलराम की हत्या करने के लिए नई योजना बनाई। कंस ने मथुरा में उत्सव का आयोजन किया। जिसमें शामिल होने के लिए अपने भांजे कृष्ण और बलराम को भी निमंत्रण दिया।
कंस ने अपने प्रमुख अक्रूर को नंदगांव भेजकर दोनों को मथुरा बुला लिया। जहां पागल हाथी से कुचलवाने के अलाव अन्य कई तरीके अपनाए लेकिन वह प्रभु का बाल भी बांका नहीं कर सका। अंत में कंस के दरबार में मल्ल युद्ध कर श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया। स्वयं भगवान के हाथों मृत्यु प्राप्त कर कंस को सद्गति प्राप्त हुई।
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कंस का वध कर श्रीकृष्ण ने अपने नाना उग्रसेन, माता देवकी, पिता वासुदेव के अलावा कारागार में बंद साधू-संतों और अन्य लोगों को मुक्त कराया। इस दौरान निशा बंसल, रुक्मणी, दीपशिखा मिश्रा, मनोज गोयल, आचार्य कृष्णकांत, राजीव रस्तौगी, आशु, नूतन रस्तौगी, सविता, कपिल शर्मा आदि मौजूद रहे।
वहीं, गढ़ क्षेत्र के गांव लडपुरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मुख्य यजमान धर्मवीर फौजी ने व्यास पूजन किया। व्यास ने कहा कि कंस के अत्याचारों का अंत करने और धरा को दुष्टों से मुक्त कराने के लिए भगवान ने कड़े पहरे के बीच कारागार में माता देवकी के गर्भ से अवतार लिया। जन्म से पूर्व ही प्रभु ने अपनी लीलाएं और चमत्कार दिखाने आरंभ कर दिए थे। श्रीकृष्ण का जन्म होते ही माता-पिता की बेड़िया स्वतः ही खुल गईं।
कारागार के कपाट खुल गए और पहरेदार गहन निद्रा में सो गए। वासुदेव बालकृष्ण को लेकर नंदग्राम की ओर चले, तो यमुना मैया भी कृष्ण चरणों को स्पर्श करने के लिए उफान पर आ गई। भारी बारिश में स्वयं शेषनाग छतरी बने। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर कथा स्थल पर खुशी मनाई गईं। इस दौरान मोनू भाटी, हरि भाटी, जगमाल भगत, रमेश कुमार कर्दम, धनीराम, राकेश कुमार कर्दम आदि मौजूद रहे।
कहा कि आकाशवाणी से भयभीत कंस ने श्रीकृष्ण का वध करने के अनेकों प्रयास किए लेकिन एक भी प्रयास सफल नहीं हो सका। वहीं, भगवान ने कंस के कई मुख्य राक्षसों को परलोक धाम भेज दिया। जिसके बाद कंस ने कृष्ण-बलराम की हत्या करने के लिए नई योजना बनाई। कंस ने मथुरा में उत्सव का आयोजन किया। जिसमें शामिल होने के लिए अपने भांजे कृष्ण और बलराम को भी निमंत्रण दिया।
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कंस ने अपने प्रमुख अक्रूर को नंदगांव भेजकर दोनों को मथुरा बुला लिया। जहां पागल हाथी से कुचलवाने के अलाव अन्य कई तरीके अपनाए लेकिन वह प्रभु का बाल भी बांका नहीं कर सका। अंत में कंस के दरबार में मल्ल युद्ध कर श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया। स्वयं भगवान के हाथों मृत्यु प्राप्त कर कंस को सद्गति प्राप्त हुई।
कंस का वध कर श्रीकृष्ण ने अपने नाना उग्रसेन, माता देवकी, पिता वासुदेव के अलावा कारागार में बंद साधू-संतों और अन्य लोगों को मुक्त कराया। इस दौरान निशा बंसल, रुक्मणी, दीपशिखा मिश्रा, मनोज गोयल, आचार्य कृष्णकांत, राजीव रस्तौगी, आशु, नूतन रस्तौगी, सविता, कपिल शर्मा आदि मौजूद रहे।
वहीं, गढ़ क्षेत्र के गांव लडपुरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मुख्य यजमान धर्मवीर फौजी ने व्यास पूजन किया। व्यास ने कहा कि कंस के अत्याचारों का अंत करने और धरा को दुष्टों से मुक्त कराने के लिए भगवान ने कड़े पहरे के बीच कारागार में माता देवकी के गर्भ से अवतार लिया। जन्म से पूर्व ही प्रभु ने अपनी लीलाएं और चमत्कार दिखाने आरंभ कर दिए थे। श्रीकृष्ण का जन्म होते ही माता-पिता की बेड़िया स्वतः ही खुल गईं।
कारागार के कपाट खुल गए और पहरेदार गहन निद्रा में सो गए। वासुदेव बालकृष्ण को लेकर नंदग्राम की ओर चले, तो यमुना मैया भी कृष्ण चरणों को स्पर्श करने के लिए उफान पर आ गई। भारी बारिश में स्वयं शेषनाग छतरी बने। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर कथा स्थल पर खुशी मनाई गईं। इस दौरान मोनू भाटी, हरि भाटी, जगमाल भगत, रमेश कुमार कर्दम, धनीराम, राकेश कुमार कर्दम आदि मौजूद रहे।