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Hapur News: एनएचएआई की हीलाहवाली का दंश झेल रहे हजारों वाहन चालक
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हापुड़। एनएचएआई की हीलाहवाली से मेरठ-गढ़ हाईवे 709ए के चौड़ीकरण का कार्य पिछले एक साल से अटका है और इस पर प्रतिदिन सफर करने वाले करीब 20 हजार से अधिक वाहन चालक परेशानी झेल रहे हैं। उच्च न्यायालय में मजबूत पैरवी न होने के कारण फिलहाल कार्य शुरू होता नजर नहीं आ रहा है और पुरानी सड़क और जर्जर होती जा रही है। ऐसे में जहां इस रूट से गुजरने वाले वाहन चालक परेशान हैं वहीं, आए दिन इस पर दुर्घटना की संख्या भी बढ़ रही है।
जनपद मेरठ के गांव सिसौली से लेकर गढ़मुक्तेश्वर के गांव बदरखा तक हाईवे 709 ए का चौड़ीकरण प्रस्तावित है। टाटा कंपनी को कार्य को पूरा करने के लिए 10 अक्तूबर 2021 से लेकर 10 अक्तूबर 2023 तक की समय सीमा के साथ ठेका दिया गया था। 47 किलोमीटर के इस हाईवे के निर्माण में करीब 955 करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन परियोजना की समीक्षा में पाया गया कि वर्तमान में करीब 462 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी केवल 48 प्रतिशत कार्य हुआ है।
इसके बाद से ही एनएचएआई और टाटा के बीच अनुबंध को लेकर मनमुटाव शुरू हो गया। इसके बाद एनएचएआई ने 23 दिसंबर 2024 को अनुबंध समाप्त करने के लिए टाटा कंपनी को नोटिस भेजा। उस समय भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर 30 दिसंबर 2024 को कंपनी का अनुबंध खत्म कर दिया गया। लेकिन टाटा कंपनी के संबंधित अधिकारी ने न्यायालय में टेंडर निरस्त होने पर वाद दायर कर दिया। इसके बाद से टेंडर प्रक्रिया रुकी हुई है और फरवरी 2025 से इस हाईवे का निर्माण कार्य बंद है।
ऐसी स्थिति में पिछले एक साल से इस रूट से मेरठ और गढ़ के बीच सफर करने वाले करीब 20 हजार वाहन चालक परेशानी झेल रहे हैं। जबकि आम लोगों से जुड़ी इस समस्या का समाधान जल्दी होना चाहिए था, लेकिन एनएचएआई इस मामले में लोगों की ओर से मजबूत पक्ष नहीं रख सका। जिसके कारण लोगों लगातार जर्जर हो रही सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। समस्या यह है कि हाईवे का कार्य बंद होने के कारण कुछ स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं। हाईवे पर जगह-जगह डायवर्जन है। जिस स्थान पर सड़क का निर्माण हुआ था, वहां कई स्थानों पर सड़कें धंस गई हैं। बड़ी बात है कि यह हाईवे जहां मेरठ और गढ़ को जोड़ता है, वहीं इसकी मेरठ से लखनऊ तक कनेक्टिविटी है। ब्रजघाट आने वाले हजारों श्रद्धालु भी प्रतिदिन इसी रूट से गुजरते हैं।
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-- आए दिन बढ़ी रही दुर्घटनाएं --
इस हाईवे पर गड्ढों और जगह जगह डायवर्जन के कारण लोगों को जहां परेशानी झेलनी पड़ रही है, वहीं इस पर दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। केवल गढ़ क्षेत्र की बात करें तो मात्र सात आठ किलोमीटर क्षेत्र में पिछले दिनों में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। बाइक सवार दो लोगों की मौत करीब पंद्रह दिन पहले दोतई क्षेत्र में हुई थी। इसके अलावा एक थ्रीव्हीलर में बस ने टक्कर मारी थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। इस प्रकार की दुर्घटनाएं इस सड़क पर हो रहे डायर्जन और गड्ढों के कारण ही बढ़ रही हैं।
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कोर्ट के आदेश के कारण इस हाईवे निर्माण की टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है। प्रयास किए जा रहे हैं कि कोर्ट से इस संबंध में उनके पक्ष में आदेश हो और लोगों को समस्या से निजात दिलाने के लिए जल्द ही दोबारा कार्य शुरू कराया जा सके।- अमित प्रणव, परियोजना निदेशक एनएचएआई
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जनपद मेरठ के गांव सिसौली से लेकर गढ़मुक्तेश्वर के गांव बदरखा तक हाईवे 709 ए का चौड़ीकरण प्रस्तावित है। टाटा कंपनी को कार्य को पूरा करने के लिए 10 अक्तूबर 2021 से लेकर 10 अक्तूबर 2023 तक की समय सीमा के साथ ठेका दिया गया था। 47 किलोमीटर के इस हाईवे के निर्माण में करीब 955 करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन परियोजना की समीक्षा में पाया गया कि वर्तमान में करीब 462 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी केवल 48 प्रतिशत कार्य हुआ है।
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इसके बाद से ही एनएचएआई और टाटा के बीच अनुबंध को लेकर मनमुटाव शुरू हो गया। इसके बाद एनएचएआई ने 23 दिसंबर 2024 को अनुबंध समाप्त करने के लिए टाटा कंपनी को नोटिस भेजा। उस समय भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर 30 दिसंबर 2024 को कंपनी का अनुबंध खत्म कर दिया गया। लेकिन टाटा कंपनी के संबंधित अधिकारी ने न्यायालय में टेंडर निरस्त होने पर वाद दायर कर दिया। इसके बाद से टेंडर प्रक्रिया रुकी हुई है और फरवरी 2025 से इस हाईवे का निर्माण कार्य बंद है।
ऐसी स्थिति में पिछले एक साल से इस रूट से मेरठ और गढ़ के बीच सफर करने वाले करीब 20 हजार वाहन चालक परेशानी झेल रहे हैं। जबकि आम लोगों से जुड़ी इस समस्या का समाधान जल्दी होना चाहिए था, लेकिन एनएचएआई इस मामले में लोगों की ओर से मजबूत पक्ष नहीं रख सका। जिसके कारण लोगों लगातार जर्जर हो रही सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। समस्या यह है कि हाईवे का कार्य बंद होने के कारण कुछ स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं। हाईवे पर जगह-जगह डायवर्जन है। जिस स्थान पर सड़क का निर्माण हुआ था, वहां कई स्थानों पर सड़कें धंस गई हैं। बड़ी बात है कि यह हाईवे जहां मेरठ और गढ़ को जोड़ता है, वहीं इसकी मेरठ से लखनऊ तक कनेक्टिविटी है। ब्रजघाट आने वाले हजारों श्रद्धालु भी प्रतिदिन इसी रूट से गुजरते हैं।
इस हाईवे पर गड्ढों और जगह जगह डायवर्जन के कारण लोगों को जहां परेशानी झेलनी पड़ रही है, वहीं इस पर दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। केवल गढ़ क्षेत्र की बात करें तो मात्र सात आठ किलोमीटर क्षेत्र में पिछले दिनों में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। बाइक सवार दो लोगों की मौत करीब पंद्रह दिन पहले दोतई क्षेत्र में हुई थी। इसके अलावा एक थ्रीव्हीलर में बस ने टक्कर मारी थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। इस प्रकार की दुर्घटनाएं इस सड़क पर हो रहे डायर्जन और गड्ढों के कारण ही बढ़ रही हैं।
कोर्ट के आदेश के कारण इस हाईवे निर्माण की टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है। प्रयास किए जा रहे हैं कि कोर्ट से इस संबंध में उनके पक्ष में आदेश हो और लोगों को समस्या से निजात दिलाने के लिए जल्द ही दोबारा कार्य शुरू कराया जा सके।- अमित प्रणव, परियोजना निदेशक एनएचएआई
