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Hardoi News: बदलते मौसम से बच्चों में बढ़ा सोर थ्रोट व पेट दर्द का संक्रमण

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Apr 2026 10:56 PM IST
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Changing weather increases the risk of sore throat and stomach pain in children
फोटो- 13- मेडिकल कॉलेज ​स्थित पीडियाट्रिक वार्ड। संवाद
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हरदोई। मौसम के बदलते मिजाज ने जनपद में मासूमों की सेहत बिगाड़ दी है। अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी और तेज धूप के कारण गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है जिसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। दिन और रात के तापमान में आ रहे अंतर के कारण बच्चे वायरल इंफेक्शन, सोर थ्रोट और पेट दर्द की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक वार्ड में रोजाना तीन से चार बच्चों को भर्ती किया जा रहा है।
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मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना 150 से 200 परिजन अपने बच्चों में पेट दर्द, उल्टी व बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। गर्मी की वजह से हालात यह हैं कि ओपीडी में मरीजों की संख्या 10 से 20 फीसदी तक बढ़ गई है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करन गौड़ बताते हैं कि अधिक गर्मी में बाहर से आते ही लोग ठंडा पानी पी लेते हैं। इस कारण वह फैरिनजाइटिस व सोर थ्रोट और वायरल बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। पेट दर्द का संक्रमण भी बढ़ रहा है। इससे डायरिया के मरीज बढ़ रहे हैं। बच्चों को पानी पिलाते रहें डिहाइड्रेशन बिल्कुल भी न होने दें। दिन में धूप और पसीने से बुखार का वायरस एक्टिव हो जाता है। मरीजों में तेज बुखार, कफ, जुकाम, जोड़ों का दर्द व कमजोरी देखी जा रही है। इसके लिए बच्चों का नेबुलाइजेशन कराना पड़ रहा है। तीन दिन के कोर्स के लिए बच्चों को भर्ती करना पड़ता है।
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गेहूं की कटाई से बढ़ रहा इंफेक्शन

डॉक्टर ने बताया कि गेहूं की कटाई के सीजन में इंफेक्शन बढ़ जाता है। धूल भरी हवाओं के कारण लोग बीमारियों की चपेट में आते हैं। धूल भरी हवाओं से अस्थमा का वायरस भी बढ़ता है। बताया कि आसपास गंदगी होना, गंदा पानी पीने व किसी प्रकार की एलर्जी से हर वर्ग के लोग बीमार हो रहे हैं। गर्मी बढ़ने के बाद भी लोग अपनी दिनचर्या में बदलाव नहीं ला पा रहे हैं। गर्मी के मौसम में खानपान का खास ख्याल रखना चाहिए।


सोर थ्रोट के यह हैं लक्षण

सोर थ्रोट से टॉन्सिल्स सूज जाते हैं और गला लाल हो जाता है। गले और फेफड़ों में दर्द होता है, नाक बंद होने से सांस लेने में भी तकलीफ होती है। बुखार आने पर गले का दर्द, जुकाम, तेज सर्दी लगना व नाक से पानी बहने लगता है। पेट में दर्द के साथ उल्टियां भी होने लगती हैं। दो दिन से ज्यादा बुखार रहने पर उपचार कराना चाहिए।


यह बरतें सावधानी
.अपने आसपास सफाई रखें।

.ताजा भोजन खाएं और साफ पानी ही पीएं।
.ठंडी चीज, दही व पेय पदार्थों का सेवन कम करें।

.धूल भरी हवाओं में मुंह ढककर चलें।
.खुले में रखे खाद्य पदार्थ न खाएं।
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