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Hardoi News: गैस रिसाव से छह की मौत में फैक्टरी मालिक को सात साल की सजा

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2026 12:03 AM IST
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Factory owner sentenced to seven years in prison for gas leak that killed six
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फोटो-26 अमित श्रीवास्तव
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28 जनवरी 2011 की रात में संडीला के औद्योगिक क्षेत्र में हुई थी घटना

मां-बेटा समेत छह की गई थी जान, सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत
संवाद न्यूज़ एजेंसी
हरदोई। संडीला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कीटनाशक बनाने वाली फैक्टरी में 15 साल पहले गैस रिसाव से छह लोगों की मौत के मामले में फैक्टरी मालिक अमित श्रीवास्तव को दोषी करार दिया गया है। अपर जिला जज कोर्ट संख्या-एक कुसुमलता ने दोषी को सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही 7.52 लाख रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माने की 90 फीसदी रकम मृतकों के वारिसों को देने के आदेश भी दिए हैं। जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा अभियुक्त को काटनी होगी।
औद्योगिक क्षेत्र में अमित हाइड्रो केमिकल इंडिया लिमिटेड के नाम से फैक्टरी में रासायनिक उत्पादों और खास तौर पर कीटनाशक का उत्पादन होता था। 28 जनवरी 2011 को आधीरात के बाद लगभग एक बजे फैक्टरी में जहरीली गैस का रिसाव हो गया था। घटना में संडीला के मुरारनगर निवासी श्रीराम गुप्ता, मलकाना निवासी इंद्राणी और उनका पुत्र शैलेंद्र, बेनीगंज के कुंजरा निवासी प्रमोद कुमार शुक्ला, संडीला के बेहसरिया निवासी मुलहे और बघौली थाना क्षेत्र के महरी निवासी संदीप की जहरीली गैस के कारण मौत हो गई थी।
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इंद्राणी के पति भैरव प्रसाद की शिकायत पर पुलिस ने फैक्टरी मालिक बीएन लाल, उनके बेटे अमित कुमार श्रीवास्तव और यहीं काम करने वाले शैलेंद्र सिंह के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। साथ ही वायुमंडल को प्रदूषित करने, विषैले पदार्थों के रख-रखाव में लापरवाही, मशीनरी के इस्तेमाल में लापरवाही आदि की धाराएं लगाई गई थीं।
पुलिस ने बीएनलाल और अमित कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान बीएनलाल की मौत 29 जुलाई 2021 को हो गई थी। मामले की सुनवाई पूरी कर अपर जिला जज कुसुमलता ने अमित कुमार श्रीवास्तव को सात साल की सजा सुनाई है।
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24 गवाहों में मुकर गए सात गवाह
अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 24 गवाह सुनवाई के दौरान पेश किए गए। इनमें से सात गवाह मुकर गए। पुलिस को दिए गए बयानों में इन सातों ने खुद को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताया था लेकिन न्यायालय में इन्होंने कह दिया कि पुलिस ने कोई पूछताछ नहीं की। दावा किया कि उन्हें पता ही नहीं है कि पुलिस ने उनके नाम गवाहों के तौर पर कैसे डाल दिए। 47 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए थे।


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पता ही नहीं चल पाया किस गैस से गई जान
सनसनीखेज घटना में की विवेचना में गजब हॉल हुआ। पुलिस यही नहीं पता कर पाई कि आखिर किस गैस की वजह से छह लोगों की जान चली गई। दरअसल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि जहरीले पदार्थ से दोनों फेफड़े सिकुड़ गए और सांस न ले पाने के कारण छह लोगों की मौत हो गई। कौन सा जहरीला पदार्थ जान लेवा साबित हुआ इसके लिए विसरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था। वहां से भेजी गई रिपोर्ट में विसरा भेजे जाने को लेकर ही सवाल उठ गया। कहा गया कि विसरा के साथ दिल, फेफड़े, रक्त अलग-अलग जार में भेजना चाहिए था। पुलिस ने लीवर का टुकड़ा, पित्ताशय, बड़ी आंत का टुकड़ा, छोटी आंत का टुकड़ा, किडनी और स्प्लीन विसरा के तौर पर जांच के लिए भेजे थे। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में कहा गया था कि जब कोई जहरीला पदार्थ खाया या पिया जाता है तब विसरा के तौर पर उक्त चीजें भेजने से विष का पता चल जाता है। इस मामले में नाक या यूं कहें कि सांस लेने से केमिकल शरीर के अंदर गया है इसलिए इसमें शरीर के अन्य हिस्से भी जांच को भेजे जाने चाहिए थे। इसके कारण ही विसरा की रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि आखिर किस रसायन यानी केमिकल की वजह से मौत हुई है क्योंकि शरीर के जो हिस्से जांच के लिए भेजे गए थे उनमें कोई रासायनिक विष नहीं मिला था।
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