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युवाओं में बढ़ती स्क्रीन की लत गंभीर स्वास्थ्य समस्या : डॉ. गोगोई
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फोटो- 23- मेडिकल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में बोलते प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई। स्रोत: महावि
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हरदोई। युवाओं में मोबाइल व लैपटॉप के बढ़ते प्रयोग से हो रहे शारीरिक नुकसान से जागरूक करने के लिए बुधवार को एक कार्यशाला का आयोजन हुआ। गौराडांडा स्थित मेडिकल कॉलेज में सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के तहत अध्ययनरत एमबीबीएस चिकित्सकों को इस उभरती चुनौती के प्रति सजग रहने का आह्वान करवाया गया।
महाविद्यालय के मेडिकल एजुकेशन यूनिट और बायोकेमिस्ट्री विभाग के संयुक्त आयोजन में स्क्रीन डिपेंडेंसी इन यूथ : न्यूरोकेमिस्ट्री, ब्रेन वल्नरेबिलिटी और फॉरेंसिक चुनौतियां विषय पर कार्यशाला हुई। प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने शुरुआत करते हुए चिकित्सकों को बताया कि युवाओं में बढ़ती स्क्रीन निर्भरता सिर्फ आदत नहीं बल्कि एक गंभीर वैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है। विद्यार्थियों को इसके पहलुओं को समझने की आवश्यकता है।
उप प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा कि डिजिटल उपकरण के प्रयोग में संतुलन जरूरी है। एमईयू समन्वयक डॉ. पुष्पलता सचान ने सतत चिकित्सा शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष प्रो. कंचन सिंह ने स्क्रीन एडिक्शन पर बायोमार्कर्स और जैव-रासायनिक प्रभाव बताए। मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुंवर अखिलेश ने स्क्रीन डिपेंडेंसी के न्यूरोबायोलॉजिकल कारण और प्रबंधन के बारे में बताया। फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह ने विधिक पहलुओं पर व्याख्यान दिया। मीडिया प्रभारी डॉ. शिवम यादव ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस मौके पर समस्त संकाय सदस्य, पैरामेडिकल स्टाफ व विद्यार्थी मौजूद रहे।
डोपामाइन के दंगल से जीता दिल
एमबीबीएस वर्ष 2025 बैच के नवागत छात्रों ने कार्यशाला में डोपामाइन का दंगल नामक एक नाट्य मंचन किया। डॉ. अपर्णा खंडेलवाल के संचालन में आयोजित नाटक का उद्देश्य जटिल मेडिकल अवधारणाओं को सरल और मनोरंजक तरीके से समझाया। छात्रों ने शरीर में डोपामाइन (खुशी और उत्तेजना के हार्मोन) के महत्व और इसके असंतुलन से होने वाले प्रभावों को एक दंगल के रूप में मंच पर जीवंत किया। छात्रों के मंचन ने मौजूद सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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उप प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा कि डिजिटल उपकरण के प्रयोग में संतुलन जरूरी है। एमईयू समन्वयक डॉ. पुष्पलता सचान ने सतत चिकित्सा शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष प्रो. कंचन सिंह ने स्क्रीन एडिक्शन पर बायोमार्कर्स और जैव-रासायनिक प्रभाव बताए। मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुंवर अखिलेश ने स्क्रीन डिपेंडेंसी के न्यूरोबायोलॉजिकल कारण और प्रबंधन के बारे में बताया। फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह ने विधिक पहलुओं पर व्याख्यान दिया। मीडिया प्रभारी डॉ. शिवम यादव ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस मौके पर समस्त संकाय सदस्य, पैरामेडिकल स्टाफ व विद्यार्थी मौजूद रहे।
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एमबीबीएस वर्ष 2025 बैच के नवागत छात्रों ने कार्यशाला में डोपामाइन का दंगल नामक एक नाट्य मंचन किया। डॉ. अपर्णा खंडेलवाल के संचालन में आयोजित नाटक का उद्देश्य जटिल मेडिकल अवधारणाओं को सरल और मनोरंजक तरीके से समझाया। छात्रों ने शरीर में डोपामाइन (खुशी और उत्तेजना के हार्मोन) के महत्व और इसके असंतुलन से होने वाले प्रभावों को एक दंगल के रूप में मंच पर जीवंत किया। छात्रों के मंचन ने मौजूद सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
