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Hardoi News: खरमास लगा है झीलों पे, लक्ष्मी बाई तलवार लिए अब नाच रही हैं रीलों पे...

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 10:51 PM IST
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Kharmas is in effect on the lakes, Lakshmi Bai is now dancing on the reels with a sword...
फोटो-01- नुमाइश मेला के कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते कवि मानक मुकेश। संवाद
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हरदोई। श्रीराम लीला मेला कमेटी की ओर से रविवार रात कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। नुमाइश मैदान में आयोजित कार्यक्रम में कवियों के काव्य पाठ पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। हास्य, शृंगार, व्यंग्य और श्रद्धा से भरपूर गीतों ने श्रोताओं को बांधे रखा। कानपुर से आए कवि मानक मुकेश ने पढ़ा, बोतल में बिकता है पानी, खरमास लगा है झीलों पे, लक्ष्मी बाई तलवार लिए अब नाच रही हैं रीलों पे।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने नगर मजिस्ट्रेट एसके त्रिवेदी और नगर पालिका अध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर के साथ किया। कासगंज से आए डॉ. अजय अटल ने पढ़ा, नयन में सागर है वरना अश्रु नमकीन नहीं होते, कंठ में करुणा है वरना गीत गमगीन नहीं होते। सतना से आए रावे शंकर चतुर्वेदी ने पढ़ा, जाने कैसा गुनाह करता है, आफतों से निकाह करता है। दिल चुराने की बात करनी थी, वोट चोरी की बात करता है।
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हाथरस से आए ख्यातिलब्ध हास्य कवि पदम अलबेला ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने पढ़ा कि, क्या सोचते हो मुझमें कॉन्फिडेंस नहीं है, वक्त पहचानने का सेंस नहीं है। कॉन्फिडेंस भी है, सेंस भी है, वैलिडिटी भी है, क्या करूं इस उम्र में बैलेंस नहीं है। ग्वालियर से आए राज किशोर राज ने पढ़ा, मुख से मीठे वचन बोलकर देख लो, प्रेम श्रद्धा का रंग घोलकर देख लो। पीर पर्वत सी पल में पिघल जाएगी, द्वार दिल के जरा खोलकर देख लो। लखनऊ से आए मुकुल महान ने पढ़ा, भारत हमारा देश ओलंपिक में फेल है पर उल्लू सीधा करना हमारे बायें हाथ का खेल है।
लखनऊ से आए अतुल वाजपेयी ने पढ़ा, बल, बुद्धि, पराक्रम के सागर, जिनके आयुध धनु सायक हैं। वह पुरषोत्तम भारत गौरव, प्रभु राम हमारे नायक हैं। संभल से आए डॉ. सौरभ कांत शर्मा ने पढ़ा, समय तराजू तोल रहा, इतिहास के पन्ने खोल रहा है। सत्य सनातनी आंखों में काशी मथुरा डोल रहा है। फिरोजाबाद से आए विष्णु उपाध्याय ने पढ़ा, सुध-बुध भूल गए रिश्ते घर आंगन के, ममता के द्वार को कपाट नहीं मिला है। इंच-इंच टुकड़ों में खोज रही माई किंतु, चूमने को लाल का ललाट नहीं मिला है। मेरठ से आईं शुभम त्यागी ने होली से जुड़ा शृंगार का गीत सुनाया। उन्होंने पढ़ा, पछुआ की चले बयार सजन इस होली में, अब बिरहा नहीं स्वीकार सजन इस होली में। सोमवार सुबह चार बजे कवि सम्मेलन के समापन पर आयोजक राम प्रकाश शुक्ला ने अतिथियों का आभार जताया।

फोटो-01- नुमाइश मेला के कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते कवि मानक मुकेश। संवाद

फोटो-01- नुमाइश मेला के कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते कवि मानक मुकेश। संवाद

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