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Hardoi News: लोगों को रास नहीं आ रही नितिन और जय प्रकाश के बीच पटती खाई

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:08 AM IST
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People are not liking the growing rift between Nitin and Jai Prakash.
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फोटो-36-वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक कार्यकर्ता सम्मेलन में एकता प्रदर्शित करते नितिन अग्रवाल, नरेश अग्रवाल और जय प्रकाश। आर्काइव
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जय प्रकाश सार्वजनिक रूप से कह चुके बीच के लोगों ने बढ़ाई गलतफहमियां



नरेश अग्रवाल ने खुले मंच से दिया है मतभेद खत्म करने का संदेश



संवाद न्यूज एजेंसी



हरदोई। आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल और सांसद जय प्रकाश के रिश्ते सामान्य होने की उम्मीद बीच के लोगों को नागवार गुजर रही है। आने वाले चुनावों, संगठन और जिले के समीकरणों के लिहाज से भले ही रिश्ते सामान्य होने के बेहिसाब फायदे हों, लेकिन व्यक्तिगत नफा नुकसान की गणित ने कई लोगों की नींद उड़ा दी है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर चौराहों तक पर चर्चा का मुद्दा नितिन और जय प्रकाश के रिश्ते ही हैं।



सदर सांसद जय प्रकाश और दिग्गज नेता नरेश अग्रवाल के रिश्ते किसी से छिपे नहीं रहे। जय प्रकाश को पिछले लगभग तीन दशक से नरेश अग्रवाल का सबसे करीबी शख्स माना जाता रहा है। जय प्रकाश ने भी अपने इस रिश्ते को शिद्दत से निभाया और सियासी ताकत होने के बाद भी कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जय प्रकाश के समर्थन में न सिर्फ नरेश अग्रवाल बल्कि उनके बेटे नितिन अग्रवाल और भाई जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने ताबड़तोड़ जनसभाएं की थीं। नतीजे भी सकारात्मक आए थे, लेकिन इसके बाद रिश्ते बिगड़ते चले गए। तकरीबन दो साल से बिगड़े रिश्तों को पुराने रंग में लाने की कवायद नरेश अग्रवाल ने शुरू की। होली मिलन समारोह के मंच से भारी भीड़ के बीच जय प्रकाश पर अपना हक जताते हुए मतभेद खत्म करने की बात कह दी। इसके बाद नितिन अग्रवाल ने भी सांसद को उम्र और अनुभव में बड़ा बताते हुए गलती पर माफी मांगने में संकोच न होने की बात कह दी। सांसद जय प्रकाश ने भी इस पर सकारात्मक लेकिन सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मतभेद न होने की बात कही, लेकिन यह भी कहा कि बीच के कुछ लोगों ने मतभेद बढ़ाए थे। आबकारी मंत्री और सांसद के बीच सामान्य होते रिश्ते इन बीच के लोगों को रास नहीं आ रहे हैं। इसकी अलग-अलग वजहें भी हैं।
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इनसेट



इन वजहों से रिश्ते सामान्य नहीं होने देना चाहते बीच के लोग



. कुछ लोग राजनीतिक तौर पर सिर्फ इसलिए सक्रिय हैं क्योंकि वह अग्रवाल परिवार के विरोधी हैं। सांसद और मंत्री के बीच मनमुटाव के बाद ऐसे लोगों को सांसद का बरदहस्त मिल गया था। अगर रिश्ते सामान्य हो गए तो ऐसे लोगों को अस्तित्व बचाना बड़ी चुनौती होगी।



. सांसद और मंत्री के बीच तकरार के कारण अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कई दावेदार तैयार हो गए थे। अब इन दावेदारों को अपना भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। ऐसे लोग दोनों पक्षों के बीच मधुर संबंध नहीं चाहते।



. अग्रवाल परिवार और सांसद के एक साथ आते ही यह जिले की सबसे बड़ी सियासी ताकत हो जाएगी। पूर्व में भी नितिन और जय प्रकाश एक रहते थे और तब इन्हें जिले की सबसे बड़ी सियासी ताकत माना जाता था। यही वजह है कि अग्रवाल परिवार से व्यक्तिगत विरोध रखने वाले लोग दोनों को एक मंच पर देखना नहीं चाहते।



इनसेट



इधर की उधर करने वालों की बढ़ी धुकधुकी



दोनों पक्षों के बीच टकराव फैलाने वाली बातों को इधर-उधर करने वाले लोगों की धुकधुकी बढ़ी हुई है। ऐसे लोग भी परेशान इसलिए हैं कि दोनों पक्षों के सामने एक-दूसरे की बुराई कर अपने मतलब सिद्ध कर लिए गए। अब दोनों दिग्गज एक साथ बैठ गए तो यह बातें भी खुलेंगी।
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