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Hardoi News: नाला-नालियों से निकली पाइप लाइन, लीकेज पर आ जाता गंदा पानी
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फोटो-03- आवास विकास कॉलोनी के सी ब्लॉक में कुछ इस तरह नाली से गुजरी वाटर लाइन। संवाद
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हरदोई। लोगों को शुद्ध जलापूर्ति के लिए भूमिगत पाइपलाइन से घरों को दिए गए कनेक्शन नाले-नालियों से होकर निकले हैं। नाला-नालियों से निकली पाइपलाइन में लीकेज होने पर आपूर्ति में घरों को गंदा पानी मिलता है। इससे लोगों को दिक्कतों के साथ ही बीमारियों के पनपने की भी आशंका रहती है।
नगरीय निकायों में लोगों को पाइपलाइन जलापूर्ति की सुविधा दी गई है लेकिन इसमें लीकेज लोगों के लिए समस्या और बीमारियों का कारण बन जाता है। वैसे फिलहाल अभी तक जिले में पाइपलाइन जलापूर्ति में गंदा पानी आने से किसी की मौत नहीं हुई हैं लेकिन नाले-नालियों से निकली पाइपलाइन के लीकेज होने पर गंदा पानी पीने से बीमार होने की बहुत कुछ आशंका रहती है।
शहर में नगर पालिका की ओर से जलापूर्ति कराई जाती है। शहर की करीब 1.25 लाख आबादी को शुद्ध जलापूर्ति कराने के लिए सात ओवरहेड पानी की टंकी हैं जबकि 39 नलकूप हैं। नगरीय निकाय की ओर से ओवरहेड टंकी के साथ ही सीधे नलकूपों से भी जलापूर्ति दी जा रही है। आबादी के आकलन और निकाय की ओर से की जानी वाली जलापूर्ति में प्रतिदिन औसतन 15,00,000 लीटर की आपूर्ति की जा रही है।
शहर में जलापूर्ति के लिए ओवरहेड पानी की टंकी और नलकूपों से जुड़ी पाइपलाइन को मार्ग के मध्य में भूमिगत डाला गया है लेकिन इन पाइपों से घरों को दी जानी वाली आपूर्ति के लिए अधिकांश पाइप नाले-नालियों से होकर निकले हैं। इन्हीं पाइपलाइनों में लीकेज के कारण नगरीय निकाय की ओर से की जाने वाली जलापूर्ति के साथ गंदा पानी भी घरों में पहुंच जाता है। शहर की पॉश कॉलोनी आवास विकास सहित कई मोहल्लों में घरों को जाने वाली पाइप नाले-नालियों से होकर गुजरी है।
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मोहल्ला आवास विकास कॉलोनी के सी ब्लॉक निवासी सुमन ने बताया कि घर तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप नाली से होकर ही निकला है। कभी-कभार लीकेज हो ही जाता है। लीकेज होने पर पानी गंदा आने लगता है जिससे दिक्कतें होती हैं। ऐसी स्थिति में पास के घरों से हैंडपंप या सबमर्सिबल पंप से पानी लेना पड़ता है।
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रजनी ने बताया कि नाले-नालियों से होकर घरों तक आने वाली पाइपलाइन में कभी जोड़ पर, लीकेज और पाइप क्षतिग्रस्त हो जाने पर जलापूर्ति के साथ नाली का गंदा पानी आने लगता है जिससे वह पानी उपयोग लायक नहीं रह जाता है। ऐसे में सबमर्सिबल पंप से ही पानी लेकर उपयोग में लाना पड़ता है। पाइप को अपने पास से ही दुरुस्त कराना पड़ता है।
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पाइपलाइन में लीकेज होने की जानकारी पर तत्काल दुरुस्त कराया जाता है। वैसे जलापूर्ति के लिए सभी ओवरहेड टैंक पर ऑटोमेटेड क्लोरिन डोजर लगे हैं जिससे वह जलापूर्ति के समय पानी में जरूरी मात्रा भर क्लोरिन की ड्रॉप करते रहते हैं। इससे पानी में क्लोरिन की मात्रा भी संतुलित रहती है। नाले-नालियों से घरों को जाने वाले पाइपों में लीकेज की शिकायत मिलने पर ठीक करा दिया जाता है। वैसे घरों को जाने वाले पाइप लोग स्वयं ही अपने हिसाब से फिट कराते हैं। ओवरहेड टैंक की सफाई छह-छह माह के अंतराल पर कराई जाती है। पानी की गुणवत्ता की जांच 15 दिन के अंतराल पर जल निगम विभाग के माध्यम कराई जा रही है। -रामेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
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शहर में नगर पालिका की ओर से जलापूर्ति कराई जाती है। शहर की करीब 1.25 लाख आबादी को शुद्ध जलापूर्ति कराने के लिए सात ओवरहेड पानी की टंकी हैं जबकि 39 नलकूप हैं। नगरीय निकाय की ओर से ओवरहेड टंकी के साथ ही सीधे नलकूपों से भी जलापूर्ति दी जा रही है। आबादी के आकलन और निकाय की ओर से की जानी वाली जलापूर्ति में प्रतिदिन औसतन 15,00,000 लीटर की आपूर्ति की जा रही है।
शहर में जलापूर्ति के लिए ओवरहेड पानी की टंकी और नलकूपों से जुड़ी पाइपलाइन को मार्ग के मध्य में भूमिगत डाला गया है लेकिन इन पाइपों से घरों को दी जानी वाली आपूर्ति के लिए अधिकांश पाइप नाले-नालियों से होकर निकले हैं। इन्हीं पाइपलाइनों में लीकेज के कारण नगरीय निकाय की ओर से की जाने वाली जलापूर्ति के साथ गंदा पानी भी घरों में पहुंच जाता है। शहर की पॉश कॉलोनी आवास विकास सहित कई मोहल्लों में घरों को जाने वाली पाइप नाले-नालियों से होकर गुजरी है।
मोहल्ला आवास विकास कॉलोनी के सी ब्लॉक निवासी सुमन ने बताया कि घर तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप नाली से होकर ही निकला है। कभी-कभार लीकेज हो ही जाता है। लीकेज होने पर पानी गंदा आने लगता है जिससे दिक्कतें होती हैं। ऐसी स्थिति में पास के घरों से हैंडपंप या सबमर्सिबल पंप से पानी लेना पड़ता है।
रजनी ने बताया कि नाले-नालियों से होकर घरों तक आने वाली पाइपलाइन में कभी जोड़ पर, लीकेज और पाइप क्षतिग्रस्त हो जाने पर जलापूर्ति के साथ नाली का गंदा पानी आने लगता है जिससे वह पानी उपयोग लायक नहीं रह जाता है। ऐसे में सबमर्सिबल पंप से ही पानी लेकर उपयोग में लाना पड़ता है। पाइप को अपने पास से ही दुरुस्त कराना पड़ता है।
पाइपलाइन में लीकेज होने की जानकारी पर तत्काल दुरुस्त कराया जाता है। वैसे जलापूर्ति के लिए सभी ओवरहेड टैंक पर ऑटोमेटेड क्लोरिन डोजर लगे हैं जिससे वह जलापूर्ति के समय पानी में जरूरी मात्रा भर क्लोरिन की ड्रॉप करते रहते हैं। इससे पानी में क्लोरिन की मात्रा भी संतुलित रहती है। नाले-नालियों से घरों को जाने वाले पाइपों में लीकेज की शिकायत मिलने पर ठीक करा दिया जाता है। वैसे घरों को जाने वाले पाइप लोग स्वयं ही अपने हिसाब से फिट कराते हैं। ओवरहेड टैंक की सफाई छह-छह माह के अंतराल पर कराई जाती है। पानी की गुणवत्ता की जांच 15 दिन के अंतराल पर जल निगम विभाग के माध्यम कराई जा रही है। -रामेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका

फोटो-03- आवास विकास कॉलोनी के सी ब्लॉक में कुछ इस तरह नाली से गुजरी वाटर लाइन। संवाद

फोटो-03- आवास विकास कॉलोनी के सी ब्लॉक में कुछ इस तरह नाली से गुजरी वाटर लाइन। संवाद

फोटो-03- आवास विकास कॉलोनी के सी ब्लॉक में कुछ इस तरह नाली से गुजरी वाटर लाइन। संवाद