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Hardoi News: युवाओं में तनाव और स्क्रीन टाइम से बढ़ रहा माइग्रेन का खतरा

Thu, 06 Aug 2026 11:19 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:19 PM IST
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Risk of migraines rising among youth due to stress and screen time.
फोटो- 19- मनोचिकित्सक व विभागाध्यक्ष डॉ. कुंवर अखिलेश।
हरदोई। अनियमित दिनचर्या और बढ़ते मानसिक तनाव के बीच जिले के युवाओं में माइग्रेन की समस्या तेजी से बढ़ी है। माइग्रेन को सामान्य सिरदर्द समझकर उपेक्षित करना गंभीर समस्या हो सकती है क्योंकि यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जो व्यक्ति की कार्यक्षमता और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। समय पर पहचान और उचित उपचार न मिलने पर यह समस्या लंबे समय तक परेशान कर सकती है।
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भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण लोग सुबह का नाश्ता न करना, अधूरी नींद और मानसिक तनाव से माइग्रेन की समस्या से ग्रसित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना लगभग 35 से 40 मरीज माइग्रेन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ सालों पहले यह संख्या महज आठ से 10 होती थी। अब ओपीडी में ऐसे मरीजों में करीब छह गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में बीते एक माह में करीब 1,145 मरीज माइग्रेन से ग्रसित पहुंचे। इसमें युवा सबसे अधिक रहे।
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मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुंवर अखिलेश ने बताया कि माइग्रेन के दौरान सिर के एक या दोनों ओर धड़कन जैसा तेज दर्द होता है। इसके साथ मतली, उल्टी, तेज रोशनी और तेज आवाज से परेशानी, चक्कर आना और शारीरिक गतिविधि करने पर दर्द बढ़ने की समस्या होती है। कई मरीजों में सिरदर्द शुरू होने से पहले धुंधला दिखाई देना, चमकती रोशनी नजर आना या हाथ-पैरों में झुनझुनी महसूस होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
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माइग्रेन की यह है सबसे बड़ी वजह
डॉ. कुंवर अखिलेश ने बताया कि युवाओं की अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना, अत्यधिक मानसिक तनाव, लैपटॉप और कंप्यूटर का उपयोग, समय पर भोजन न करना, फास्ट फूड और कैफीन का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी माइग्रेन के मुख्य कारण बन रहे हैं। परीक्षा का दबाव, प्रतिस्पर्धी माहौल और कार्यस्थल का तनाव भी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं।



इन बातों का रखें ध्यान
-प्राणायाम करें व लंबी सांस लें।
-विचारों से ध्यान हटाने के तरीके अपनाएं
-प्रतिदिन सात से आठ घंटे की पर्याप्त नींद लें।
-व्यायाम करें, इससे हैप्पी हार्मोन निकलते हैं।
-सुबह के भोजन को न छोड़ें।
-ज्यादा मिर्च-मसालायुक्त खान न खाएं।
-शोर-शराबे वाले वातावरण से दूर रहें।
-घुमावदार रास्तों पर यात्रा करने से बचें।
-तेज धूप में छाता व आंखों पर चश्मा लगाकर चलें।
-ज्यादा गर्मी व सर्दी से भी बचें।


दवा व काउंसलिंग से किया जाता है इलाज
डॉ. कुंवर ने बताया कि यदि सिरदर्द बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या दैनिक कार्य करने में दिक्कत हो तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें। समय पर उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर माइग्रेन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा काउंसलिंग से भी इलाज किया जा रहा है। इसमें मरीज को राहत के उपाय बताए जाते हैं।
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